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Sarla Bhat Murder Case: 35 साल बाद सरला भट हत्याकांड में बड़ा मोड़, SIA ने 737 पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की

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Sarla Bhat Murder Case, SIA Charge Sheet

Sarla Bhat Murder Case: 35 साल बाद सरला भट हत्याकांड में बड़ा मोड़, SIA ने 737 पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की

करीब 35 वर्ष पुराने चर्चित सरला भट हत्याकांड में जम्मू-कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एसआईए) ने महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए 737 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट श्रीनगर की विशेष अदालत में दाखिल की है। वर्ष 1990 में एसकेआईएमएस (शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) की स्टाफ नर्स सरला भट के अपहरण, कथित यातना और हत्या के मामले में एजेंसी ने इसे अपनी जांच की बड़ी उपलब्धि बताया है। एसआईए का कहना है कि आतंकवाद से जुड़े पुराने मामलों में भी कानून की प्रक्रिया लगातार जारी है और समय बीत जाने के बावजूद दोषियों को न्याय के दायरे में लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

एसआईए के अनुसार, यह मामला 18 मार्च 2024 को जम्मू-कश्मीर पुलिस महानिदेशक के आदेश पर एजेंसी को सौंपा गया था। इसके बाद मामले की दोबारा विस्तृत जांच शुरू की गई। जांच के दौरान एजेंसी ने प्रत्यक्षदर्शियों और अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए, दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए, फोरेंसिक और बैलिस्टिक रिपोर्ट का परीक्षण किया, मेडिकल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों सहित अन्य उपलब्ध सामग्री के आधार पर विस्तृत चार्जशीट तैयार की।

जांच एजेंसी के अनुसार, 18 अप्रैल 1990 को सरला भट का श्रीनगर स्थित एसकेआईएमएस अस्पताल के पास से कथित तौर पर अपहरण किया गया था। आरोप है कि उनका अपहरण करने के बाद उन्हें यातनाएं दी गईं और बाद में श्रीनगर के ओमर कॉलोनी, मालबाग क्षेत्र में गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई। यह मामला उस समय जम्मू-कश्मीर में बढ़ती आतंकवादी गतिविधियों के बीच सामने आया था और लंबे समय तक इसकी जांच विभिन्न स्तरों पर चलती रही।

एसआईए ने अपनी चार्जशीट में आरोप लगाया है कि यह पूरी घटना जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) की एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी। एजेंसी ने मामले में तत्कालीन जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक सहित खुर्शीद अहमद चाल्कू, अब्दुल हमीद शेख, मोहम्मद यूसुफ सोफी उर्फ इदरीस और गुलाम मोहम्मद टपलू की कथित भूमिका का उल्लेख किया है। एजेंसी के अनुसार, इनमें से अब्दुल हमीद शेख, मोहम्मद यूसुफ सोफी और गुलाम मोहम्मद टपलू का निधन हो चुका है। वहीं यासीन मलिक एक अन्य मामले में न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि फरार आरोपी खुर्शीद अहमद चाल्कू के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

चार्जशीट में भारतीय दंड संहिता, टाडा (TADA) और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। एसआईए का दावा है कि जांच के दौरान सरला भट को मुखबिर बताए जाने के आरोपों के समर्थन में कोई विश्वसनीय साक्ष्य नहीं मिले। एजेंसी का कहना है कि इस दावे को हत्या को उचित ठहराने के लिए गढ़ी गई कहानी के रूप में देखा गया है।

एसआईए के अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में वर्षों बाद चार्जशीट दाखिल होना केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि आतंकवाद से जुड़े गंभीर अपराधों में समय बीत जाने से न्याय की प्रक्रिया समाप्त नहीं होती। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में उपलब्ध सभी साक्ष्यों के आधार पर दोषियों को कानून के दायरे में लाने के प्रयास आगे भी जारी रहेंगे।

अब इस मामले में विशेष अदालत चार्जशीट का परीक्षण करेगी और आगे की न्यायिक प्रक्रिया शुरू होगी। आने वाले दिनों में अदालत के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्यों और कानूनी बहस के आधार पर मामले की अगली सुनवाई तय की जाएगी।

 

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