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Rajendra Nagar Basement Death Case: कोर्ट ने CBI को फटकार लगाई, सीनियर अधिकारियों की भूमिका की नए सिरे से जांच के आदेश दिए

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Rajendra Nagar Basement Death Case: कोर्ट ने CBI को फटकार लगाई, सीनियर अधिकारियों की भूमिका की नए सिरे से जांच के आदेश दिए

दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित एक कोचिंग सेंटर के अवैध बेसमेंट में पानी भरने से तीन UPSC अभ्यर्थियों की मौत के मामले में अदालत ने सीबीआई को कड़ी फटकार लगाई है और दोबारा जांच के आदेश दिए हैं। प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज दिनेश भट्ट ने मृतक छात्र नेविन दलविन के पिता द्वारा दायर ‘प्रोटेस्ट पिटीशन’ को स्वीकार करते हुए CBI को निर्देश दिया कि वह दिल्ली नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की गहराई से जांच करे।

याचिकाकर्ता के वकील अभिजीत आनंद ने अदालत में तर्क दिया कि जांच अधिकारी ने इस मामले में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच नहीं की और बड़े अधिकारियों को बचाने की कोशिश की। अदालत ने अपने 20 पन्नों के फैसले में कहा कि जांच अधिकारी उन वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच करने में विफल रहे जिनकी लापरवाही के कारण कोचिंग संस्थान लंबे समय तक बेसमेंट का अवैध उपयोग करता रहा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह लापरवाही सीधे तौर पर निर्दोष नागरिकों की मौत की वजह बनी।

अदालत ने सीबीआई के केवल करोल बाग जोन के जूनियर इंजीनियर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने और किसी भी वरिष्ठ अधिकारी का नाम न लेने पर नाराजगी जताई। जज ने कहा कि छह मंजिला विशाल इमारत में सैकड़ों छात्र पढ़ रहे थे और यह मानना असंभव है कि वरिष्ठ अधिकारियों को इस अवैध इस्तेमाल की जानकारी नहीं थी। जूनियर इंजीनियर ने नियम उल्लंघन का फोटो और नोट भी लगाया था, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों ने निरीक्षण नहीं किया या जानबूझकर विवरण छुपा दिए।

अदालत ने यह भी कहा कि यह इलाका जलभराव के लिए संवेदनशील था और पहले भी बेसमेंट में पानी भरने की घटनाएं हो चुकी थीं। प्रशासन को इस बात से पहले ही आगाह किया गया था। 26 जून 2024 को शिकायत दी गई और 18 जुलाई 2024 को उसका रिमाइंडर डिप्टी कमिश्नर (MCD) के कार्यालय में पहुंचा, लेकिन 27 जुलाई 2024 को हुए हादसे तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। जांच अधिकारी ने तर्क दिया कि तकनीकी खराबी के कारण शिकायत देर से मिली, जिस पर अदालत ने फटकार लगाई कि 18 जुलाई के बाद भी 27 जुलाई तक क्यों कोई कदम नहीं उठाया गया।

जज दिनेश भट्ट ने कहा कि सिर्फ पदानुक्रम के सबसे निचले कर्मचारी को बलि का बकरा बनाना पर्याप्त नहीं है। वरिष्ठ और सुपरवाइजरी अधिकारियों की जिम्मेदारी थी कि वे सुनिश्चित करें कि जमीन पर नियमों का पालन हो रहा है। अदालत ने सीबीआई को आदेश दिया कि वह सभी कड़ियों को जोड़कर वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी, भ्रष्टाचार के एंगल और लापरवाही की गहन जांच करे और रिपोर्ट पेश करे।

इस आदेश के बाद अब मामले में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका, प्रशासनिक लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है। अदालत का यह फैसला न्याय प्रणाली में जवाबदेही और सरकारी अधिकारियों की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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