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Rajasthan: भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में प्रसूताओं की मौत से हड़कंप, 10 दिनों में 9 मौतों पर जांच के लिए जयपुर से एक्सपर्ट टीम रवाना

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Rajasthan: भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में प्रसूताओं की मौत से हड़कंप, 10 दिनों में 9 मौतों पर जांच के लिए जयपुर से एक्सपर्ट टीम रवाना

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की लगातार हो रही मौतों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। कोटा और बीकानेर के बाद अब भीलवाड़ा और बांसवाड़ा से सामने आए मामलों ने पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए जयपुर से विशेषज्ञों की टीम रवाना की है, जो दोनों अस्पतालों में मौतों के कारणों और चिकित्सा व्यवस्था की विस्तृत जांच करेगी।

भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल स्थित मातृ एवं शिशु चिकित्सालय (एमसीएच) में पिछले छह दिनों के भीतर पांच प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। सभी महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। ऑपरेशन के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें मेडिकल आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।

शुक्रवार को पोटला निवासी 32 वर्षीय संगीता जीनगर की सिजेरियन डिलीवरी के बाद हालत गंभीर हो गई और इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इससे पहले 5 जुलाई को शिमला गुर्जर, 7 जुलाई को फोरी देवी, 8 जुलाई को ईशा पांडे और 9 जुलाई को दिव्या की भी प्रसव के बाद मौत हो चुकी है। इन सभी मामलों में परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही बरतने के आरोप लगाए हैं।

अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, मार्च से अब तक महात्मा गांधी अस्पताल में प्रसूताओं की मौत का आंकड़ा नौ तक पहुंच चुका है। इनमें से पांच मौतें केवल जुलाई के पहले 11 दिनों के भीतर हुई हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

अस्पताल में प्रतिदिन 30 से 40 सिजेरियन ऑपरेशन किए जा रहे हैं, जबकि नियमित और आपातकालीन सर्जरी के लिए केवल आठ सर्जिकल सेट उपलब्ध हैं। एक सर्जिकल सेट को दोबारा उपयोग में लेने से पहले लगभग तीन घंटे तक स्टरलाइजेशन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। ऐसे में सीमित संसाधनों के बीच बड़ी संख्या में ऑपरेशन होने से संक्रमण की आशंका भी व्यक्त की जा रही है।

हालांकि भीलवाड़ा जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू ने अस्पताल का निरीक्षण करने के बाद कहा कि प्रारंभिक जांच में मौतों का कारण संक्रमण नहीं पाया गया है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में सभी आवश्यक सावधानियां बरती जा रही हैं और विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा।

उधर, बांसवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय में भी 7 से 10 जुलाई के बीच एक नाबालिग सहित चार प्रसूताओं की मौत हो गई। लगातार सामने आ रहे इन मामलों के बाद राज्य स्वास्थ्य विभाग ने पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। विशेषज्ञों की टीम चिकित्सा प्रक्रियाओं, ऑपरेशन थिएटर की व्यवस्था, संक्रमण नियंत्रण, उपकरणों की उपलब्धता और उपचार प्रोटोकॉल की समीक्षा करेगी।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम भी उठाए जाएंगे।

 

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