Category: राज्य

  • Yamunanagar Murder Case: यमुनानगर में रेप पीड़िता का गला काटकर मर्डर, जान बचाने के लिए पड़ोसी के घर छिपी महिला की हत्या

    Yamunanagar Murder Case: यमुनानगर में रेप पीड़िता का गला काटकर मर्डर, जान बचाने के लिए पड़ोसी के घर छिपी महिला की हत्या

    Yamunanagar Murder Case: यमुनानगर में रेप पीड़िता का गला काटकर मर्डर, जान बचाने के लिए पड़ोसी के घर छिपी महिला की हत्या

    यमुनानगर। हरियाणा के यमुनानगर में 24 वर्षीय महिला की चाकू से हमला कर हत्या किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि पड़ोस में रहने वाले युवक ने महिला के घर में घुसने के बाद उसका पीछा किया और उस पर चाकू से ताबड़तोड़ कई वार किए। हमलावर को देखकर महिला अपनी जान बचाने के लिए पड़ोसी के घर में छिपने की कोशिश कर रही थी, लेकिन आरोपी कथित तौर पर पीछा करते हुए वहां भी पहुंच गया और उसके गले समेत शरीर पर चाकू से वार कर दिए। गंभीर रूप से घायल महिला को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

    मृतक महिला की उम्र करीब 24 वर्ष बताई गई है। घटना के समय उसका पति काम के सिलसिले में घर से बाहर गया हुआ था। घर पर महिला के साथ उसकी नौ महीने की बेटी, चार साल का बेटा और देवर मौजूद थे। इसी दौरान आरोपी साजन कथित तौर पर महिला के घर पहुंचा। आरोपी को देखकर महिला ने खुद को बचाने का प्रयास किया और पड़ोसी के घर की तरफ चली गई।

    आरोप है कि साजन ने महिला का पीछा नहीं छोड़ा और वह भी उसके पीछे पड़ोसी के घर पहुंच गया। वहां उसने चाकू से महिला पर हमला कर दिया। महिला के गले पर गंभीर वार किए जाने के साथ उसके शरीर पर भी कई बार चाकू से हमला किए जाने का आरोप है। अचानक हुए हमले से मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

    महिला के देवर के अनुसार, हमले के समय वह भी घर पर मौजूद था। उसका आरोप है कि साजन ने वारदात के दौरान उन्हें भी ललकारा। आरोपी के पास बड़ा चाकू होने की बात भी कही गई है। हमले के बाद महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। परिजन और आसपास मौजूद लोग उसे इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन गंभीर चोटों के कारण इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।

    घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। मामले की गंभीरता को देखते हुए फोरेंसिक टीम को भी घटनास्थल पर बुलाया गया। पुलिस और फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की। महिला के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच करने के साथ आरोपी की तलाश में जुटी है।

    मामले में सामने आई जानकारी के मुताबिक मृतक महिला और आरोपी के बीच विवाद काफी समय से चल रहा था। महिला के पति का आरोप है कि करीब डेढ़ साल पहले उसकी पत्नी ने साजन के खिलाफ रेप का मामला दर्ज कराया था। बाद में उस मामले में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया था। हालांकि इसके बाद भी दोनों पक्षों के बीच विवाद खत्म नहीं हुआ।

    महिला के पति के मुताबिक रेप के मामले में समझौते के बावजूद आरोपी से उनका विवाद चलता रहा। करीब पांच महीने पहले साजन पर महिला के पति के साथ मारपीट करने का भी आरोप लगा था। इसी मारपीट से जुड़े मामले में आरोपी जेल गया था और बाद में उसे हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। बताया जा रहा है कि वह हाल ही में जमानत पर जेल से बाहर आया था।

    महिला के पति ने आरोप लगाया कि जमानत पर बाहर आने के बाद भी साजन की तरफ से खतरा बना हुआ था। उनका दावा है कि घटना वाले दिन आरोपी उन्हें और उनके भाई को निशाना बनाने के इरादे से आया था। हालांकि उस समय महिला का पति काम के सिलसिले में घर से बाहर था।

    आरोपी के घर पहुंचने के बाद महिला ने कथित तौर पर खतरे को भांप लिया और अपनी जान बचाने के लिए वहां से निकलकर पड़ोसी के घर में छिपने की कोशिश की। आरोप है कि साजन ने उसका पीछा किया और पड़ोसी के घर में पहुंचकर हमला कर दिया। महिला के गले पर किए गए वार के कारण उसकी हालत बेहद गंभीर हो गई।

    घटना के समय महिला के छोटे बच्चे भी घर पर मौजूद थे। नौ महीने की बेटी और चार वर्षीय बेटे की मां की हत्या के बाद परिवार में मातम का माहौल है। परिजनों ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    पुलिस अब महिला के पति, देवर, पड़ोसियों और अन्य संभावित प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है। इसके साथ ही फोरेंसिक टीम द्वारा घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी मामले की जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

    पुलिस के सामने यह पता लगाने की भी चुनौती है कि आरोपी घटना से पहले कहां था, वह किस तरह महिला के घर तक पहुंचा और वारदात को अंजाम देने के बाद किस दिशा में गया। पुराने रेप और मारपीट के मामलों से संबंधित रिकॉर्ड भी मौजूदा हत्या की जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

    महिला के पति की ओर से लगाए गए आरोपों और पुराने मामलों की पूरी परिस्थितियों की भी पुलिस जांच करेगी। फिलहाल परिजनों की ओर से आरोपी साजन पर हत्या का आरोप लगाया गया है। पुलिस मामले में साक्ष्यों और बयानों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।

    घटना के बाद इलाके में सनसनी और स्थानीय लोगों में आक्रोश है। एक महिला द्वारा हमलावर से बचने के लिए पड़ोसी के घर में शरण लेने के बावजूद उसकी हत्या किए जाने के आरोप ने मामले को और गंभीर बना दिया है। पुलिस और फोरेंसिक टीम मामले की जांच में जुटी हैं, जबकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों से हत्या के घटनाक्रम से जुड़ी और जानकारियां सामने आने की उम्मीद है।

     

  • Sonipat Couple Death: सुबह भाई से दुकान की बात, कुछ देर बाद फंदे पर मिले पति-पत्नी; दो साल पहले की थी लव मैरिज

    Sonipat Couple Death: सुबह भाई से दुकान की बात, कुछ देर बाद फंदे पर मिले पति-पत्नी; दो साल पहले की थी लव मैरिज

    Sonipat Couple Death: सुबह भाई से दुकान की बात, कुछ देर बाद फंदे पर मिले पति-पत्नी; दो साल पहले की थी लव मैरिज

    सोनीपत। हरियाणा के सोनीपत में पति-पत्नी की मौत का मामला सामने आया है। सदर थाना क्षेत्र के कबीरपुर में किराए के मकान में रहने वाले ऋतिक और उसकी पत्नी सिमरन फंदे पर लटके मिले। घटना की जानकारी मिलने के बाद सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सोनीपत के नागरिक अस्पताल भेज दिया। दोनों की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे क्या कारण रहे, पुलिस इसकी जांच कर रही है।

    मृतकों की पहचान ऋतिक और सिमरन के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक, ऋतिक मूल रूप से सोनीपत के गन्नौर क्षेत्र के गांव तेवड़ी का रहने वाला था, जबकि सिमरन गांव राठधाना की रहने वाली थी। दोनों एक-दूसरे को पसंद करते थे और वर्ष 2024 में उन्होंने प्रेम विवाह किया था।

    शादी के बाद दोनों कबीरपुर इलाके में किराए के मकान में रह रहे थे। करीब दो साल पहले साथ जिंदगी शुरू करने वाले दंपती की अचानक मौत की खबर मिलने से दोनों परिवारों और आसपास के लोगों में शोक का माहौल है।

    परिजनों के मुताबिक, घटना से पहले ऐसी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं थी जिससे यह अंदाजा लगाया जा सके कि दंपती किसी गंभीर परेशानी से गुजर रहा था। परिवार का कहना है कि सुबह भी ऋतिक की अपने भाई से सामान्य बातचीत हुई थी।

    बताया जा रहा है कि सुबह ऋतिक ने अपने भाई से किसी नई दुकान को लेकर बातचीत की थी। दोनों के बीच दुकान से संबंधित चर्चा होने के कुछ समय बाद जब परिवार ने ऋतिक से दोबारा संपर्क करने की कोशिश की तो उसका फोन नहीं उठा।

    लगातार फोन नहीं उठने पर ऋतिक के भाई को चिंता हुई। इसके बाद वह कबीरपुर स्थित उसके घर पहुंचा। घर के अंदर पहुंचने पर ऋतिक और सिमरन फंदे पर लटके मिले। यह देखकर उसने परिवार के अन्य सदस्यों और पुलिस को घटना की जानकारी दी।

    सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद दोनों शवों को नीचे उतरवाया और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की।

    दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए सोनीपत के नागरिक अस्पताल भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के जरिए मौत के कारण और समय से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।

    पुलिस घटनास्थल की परिस्थितियों की भी जांच कर रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि घटना से पहले दंपती के साथ क्या हुआ था और क्या किसी तरह का विवाद, आर्थिक परेशानी या कोई अन्य कारण इसके पीछे था।

    परिजनों से भी दोनों के पिछले कुछ दिनों के व्यवहार और परिस्थितियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल परिवार की ओर से ऐसा कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है जिससे दोनों की मौत की वजह तय की जा सके।

    पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि घटना से पहले ऋतिक और सिमरन ने किसी व्यक्ति से फोन पर बातचीत की थी या नहीं। जरूरत पड़ने पर उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों और अन्य जानकारियों को भी जांच का हिस्सा बनाया जा सकता है।

    सुबह ऋतिक की अपने भाई से नई दुकान को लेकर हुई बातचीत को देखते हुए परिवार भी घटना से स्तब्ध है। परिजनों के मुताबिक, बातचीत सामान्य थी और उन्हें ऐसी किसी परिस्थिति का अंदाजा नहीं था जिसके बाद इतना गंभीर घटनाक्रम सामने आएगा।

    ऋतिक और सिमरन ने करीब दो साल पहले प्रेम विवाह किया था। दोनों ने अपनी पसंद से एक-दूसरे के साथ जीवन शुरू किया था। ऐसे में उनकी अचानक मौत ने दोनों परिवारों को गहरा सदमा दिया है।

    पुलिस प्रेस प्रवक्ता रविंद्र कुमार ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि कबीरपुर में पति-पत्नी के फंदे पर लटके मिलने की सूचना प्राप्त हुई थी। इसके बाद सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की गई।

    पुलिस के मुताबिक, मामले में परिजनों की शिकायत और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों का इंतजार किया जा रहा है।

    घटनास्थल से किसी तरह का सुसाइड नोट मिला है या नहीं, इसे लेकर फिलहाल स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में दोनों की मौत के कारण को लेकर अटकल लगाने के बजाय पुलिस जांच के नतीजों का इंतजार किया जा रहा है।

    पुलिस दोनों परिवारों से बातचीत कर यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दंपती के जीवन में हाल के दिनों में कोई ऐसा बदलाव या घटना हुई थी या नहीं, जिसका इस मामले से संबंध हो सकता है।

    फिलहाल ऋतिक और सिमरन की मौत की परिस्थितियां स्पष्ट नहीं हो सकी हैं। सदर थाना पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कराई जा रही है। जांच और परिजनों के बयान सामने आने के बाद ही दोनों की मौत के पीछे की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।

     

  • Nalagarh IED Blast: नए साल पर पुलिस स्टेशन में धमाका, NIA का बड़ा क्रैकडाउन; 3 और आरोपी गिरफ्तार, अब तक 6 अरेस्ट

    Nalagarh IED Blast: नए साल पर पुलिस स्टेशन में धमाका, NIA का बड़ा क्रैकडाउन; 3 और आरोपी गिरफ्तार, अब तक 6 अरेस्ट

    Nalagarh IED Blast: नए साल पर पुलिस स्टेशन में धमाका, NIA का बड़ा क्रैकडाउन; 3 और आरोपी गिरफ्तार, अब तक 6 अरेस्ट

    हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ पुलिस स्टेशन में नए साल के दिन हुए IED ब्लास्ट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने मामले की जांच आगे बढ़ाते हुए तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही नालागढ़ पुलिस स्टेशन ब्लास्ट केस में गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या बढ़कर छह हो गई है। NIA अब इस हमले के पीछे मौजूद पूरे नेटवर्क, आरोपियों के आपसी संबंध और संभावित गैंगस्टर-टेरर कनेक्शन की जांच कर रही है।

    यह घटना 1 जनवरी 2026 की सुबह हुई थी। नए साल के पहले ही दिन सुबह करीब 9:40 बजे नालागढ़ पुलिस स्टेशन परिसर में अचानक जोरदार धमाका हुआ था। शुरुआती जांच में सामने आया कि IED पुलिस स्टेशन में इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर (IO) के कमरे से सटी बाहरी दीवार के पास लगाया गया था। पुलिस स्टेशन जैसे संवेदनशील और सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान को निशाना बनाए जाने के कारण सुरक्षा एजेंसियों ने मामले को गंभीरता से लिया था।

    धमाके के बाद स्थानीय स्तर पर तुरंत जांच शुरू की गई और नालागढ़ पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। जांच एजेंसियों ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए और यह पता लगाने की कोशिश शुरू की कि विस्फोटक वहां तक कैसे पहुंचाया गया तथा इसके पीछे कौन लोग शामिल थे। मामले की गंभीरता और इसके संभावित व्यापक नेटवर्क को देखते हुए बाद में जांच NIA को सौंप दी गई।

    8 मई 2026 को NIA ने मामले को अपने हाथ में लेते हुए दोबारा केस दर्ज किया। जांच एजेंसी ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट और गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की।

    NIA ने अब इस मामले में पंजाब के शहीद भगत सिंह नगर और राहों क्षेत्र से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान अरशदीप सिंह उर्फ अरश कंडोला, करणप्रताप और दिलजोत सैनी के रूप में हुई है। जांच के दौरान एजेंसी को तीनों के नालागढ़ IED ब्लास्ट मामले से कथित संबंधों के बारे में जानकारी मिली थी।

    ये तीनों आरोपी पहले से ही एक अन्य आपराधिक मामले में जेल में बंद थे। इनके खिलाफ पंजाब के गढ़शंकर पुलिस स्टेशन में FIR नंबर 11/2026 के तहत मामला दर्ज था। NIA की जांच आगे बढ़ने के दौरान नालागढ़ पुलिस स्टेशन ब्लास्ट से इनके कथित तार सामने आने के बाद एजेंसी ने कानूनी प्रक्रिया के तहत इन्हें इस मामले में भी गिरफ्तार कर लिया।

    इससे पहले NIA ने नालागढ़ ब्लास्ट मामले में महावीर कुमार उर्फ काका, अजय मेहरा और मनप्रीत सिंह उर्फ मनी को गिरफ्तार किया था। ये आरोपी भी पहले पंजाब पुलिस की स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल (SSOC), मोहाली की हिरासत में थे। जांच में नालागढ़ मामले से कथित संबंध सामने आने के बाद NIA ने इन्हें अपनी जांच के दायरे में लिया था।

    तीन नई गिरफ्तारियों के बाद अब इस मामले में कुल छह आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। जांच एजेंसी सभी आरोपियों की भूमिका अलग-अलग स्तर पर खंगाल रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि IED तैयार करने, उसे नालागढ़ तक पहुंचाने, पुलिस स्टेशन के पास लगाने और विस्फोट की योजना को अंजाम देने में किस आरोपी की क्या भूमिका थी।

    पुलिस स्टेशन को निशाना बनाए जाने के कारण इस मामले में किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका की आशंका को भी जांच के दायरे में रखा गया है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि गिरफ्तार आरोपियों के संबंध किसी संगठित गैंगस्टर नेटवर्क, आतंकी मॉड्यूल या दूसरे आपराधिक समूहों से तो नहीं हैं।

    इसके अलावा आरोपियों के बीच संपर्क के तरीकों की भी जांच की जा रही है। मोबाइल फोन रिकॉर्ड, डिजिटल कम्युनिकेशन, वित्तीय लेन-देन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के जरिए कथित साजिश की पूरी श्रृंखला तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह पता लगाना भी है कि विस्फोटक तैयार करने के लिए सामग्री कहां से आई और इसे उपलब्ध कराने में किन लोगों की भूमिका रही।

    NIA संभावित फंडिंग नेटवर्क की भी जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस पूरी कथित साजिश के लिए पैसा कहां से आया, किस माध्यम से आरोपियों तक पहुंचा और क्या इसके पीछे देश के भीतर या बाहर मौजूद किसी अन्य व्यक्ति अथवा नेटवर्क की भूमिका थी।

    नालागढ़ पुलिस स्टेशन में हुए धमाके की टाइमिंग भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नए साल की सुबह पुलिस स्टेशन को निशाना बनाने के पीछे आरोपियों का उद्देश्य क्या था, इसकी भी पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसी कथित साजिश के पीछे मौजूद मुख्य लोगों तक पहुंचने के लिए गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही है।

    मामले में तीन और आरोपियों की गिरफ्तारी को जांच की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अब तक छह लोगों की गिरफ्तारी के बावजूद जांच समाप्त नहीं हुई है। एजेंसी की जांच इस बात पर केंद्रित है कि घटना की योजना किसने बनाई, इसे अंजाम देने के निर्देश कहां से आए और क्या इस नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल हैं।

    फिलहाल NIA गिरफ्तार आरोपियों के कथित आपसी कनेक्शन, वित्तीय नेटवर्क, विस्फोटक की व्यवस्था और संभावित मास्टरमाइंड की भूमिका की जांच कर रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और गिरफ्तारियां या नए खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। एजेंसी का उद्देश्य नालागढ़ पुलिस स्टेशन IED ब्लास्ट की पूरी साजिश और इसमें शामिल नेटवर्क की सभी कड़ियों का पता लगाना है।

  • Aurangabad Gangrape: बिहार में चलती कार में 15 वर्षीय छात्रा से गैंगरेप, चीखने पर तेज आवाज में बजाए गाने; दो आरोपी गिरफ्तार

    Aurangabad Gangrape: बिहार में चलती कार में 15 वर्षीय छात्रा से गैंगरेप, चीखने पर तेज आवाज में बजाए गाने; दो आरोपी गिरफ्तार

    Aurangabad Gangrape: बिहार में चलती कार में 15 वर्षीय छात्रा से गैंगरेप, चीखने पर तेज आवाज में बजाए गाने; दो आरोपी गिरफ्तार

    बिहार के औरंगाबाद जिले से नाबालिग छात्रा के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। कुटुंबा थाना क्षेत्र में 15 वर्षीय छात्रा को कथित तौर पर जबरन कार में बैठाकर तीन युवकों ने चलती कार में उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। आरोप है कि छात्रा ने जब मदद के लिए चीखना-चिल्लाना शुरू किया तो आरोपियों ने कार में तेज आवाज में गाने बजा दिए, ताकि उसकी आवाज बाहर तक न पहुंच सके। करीब छह घंटे बाद आरोपी छात्रा को उसके घर से लगभग एक किलोमीटर दूर स्कूल के पास छोड़कर फरार हो गए।

    पीड़िता सातवीं कक्षा की छात्रा है। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की और दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रिंस कुमार और रौशन कुमार के रूप में बताई गई है। वहीं तीसरा आरोपी राजू कुमार उर्फ झूनू फरार बताया जा रहा है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए तलाश कर रही है। तीनों आरोपियों की उम्र करीब 20 से 25 वर्ष के बीच बताई गई है।

    पीड़िता के पिता के मुताबिक, घटना सोमवार की है। वह मजदूरी करने के लिए घर से बाहर गए हुए थे, जबकि उनकी पत्नी बच्चों का इलाज कराने अस्पताल गई थीं। अस्पताल पहुंचने के बाद मां ने फोन कर अपनी बेटी को भी वहां बुलाया था। इसके बाद छात्रा दोपहर करीब 12 बजे घर से पैदल कुटुंबा रेफरल अस्पताल जाने के लिए निकली।

    परिजनों के अनुसार, घर से करीब एक किलोमीटर आगे नहर के पास पहुंचने पर छात्रा को एक टाटा पंच कार में सवार तीन युवक मिले। आरोप है कि युवकों ने पहले छात्रा से पूछा कि वह कहां जा रही है और उसके साथ कोई अन्य व्यक्ति है या नहीं। छात्रा ने बताया कि वह अकेली कुटुंबा जा रही है। इसके बाद आरोपियों ने उसे अस्पताल तक छोड़ने की बात कही।

    आरोप है कि छात्रा के मना करने के बावजूद तीनों युवकों ने उसे जबरन कार में बैठा लिया और वहां से लेकर चले गए। छात्रा ने इसका विरोध किया और मदद के लिए चीखना शुरू कर दिया। एफआईआर में लगाए गए आरोपों के अनुसार, उसकी आवाज बाहर न जा सके इसके लिए कार में तेज आवाज में गाना बजा दिया गया।

    पुलिस में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, आरोपी BR02BR9383 नंबर की टाटा पंच कार में छात्रा को लेकर अनुग्रह नारायण रोड की तरफ गए। आरोप है कि इसके बाद आरोपियों ने बारी-बारी से नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता और उसके परिजनों के बयान के आधार पर पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।

    मामले में एक और गंभीर आरोप लगाया गया है कि दुष्कर्म के बाद आरोपी छात्रा की हत्या करने की योजना बना रहे थे। पीड़िता के पिता के मुताबिक, उनकी बेटी ने आरोपियों के सामने काफी गुहार लगाई और घटना के बारे में किसी को कुछ नहीं बताने की बात कही। इसके बाद आरोपियों ने कथित तौर पर उसे छोड़ने का फैसला किया।

    बताया गया है कि आरोपियों ने करीब छह घंटे बाद शाम के समय छात्रा को उसके घर से लगभग एक किलोमीटर दूर स्थित एक स्कूल के पास छोड़ दिया और मौके से फरार हो गए। इस दौरान छात्रा के परिजन लगातार उसकी तलाश करते रहे।

    परिजनों के मुताबिक, छात्रा जब निर्धारित समय तक कुटुंबा रेफरल अस्पताल नहीं पहुंची तो उसकी मां और परिवार के अन्य सदस्यों को चिंता हुई। उन्होंने छात्रा के मोबाइल फोन पर कई बार कॉल किया, लेकिन शुरुआत में किसी ने फोन नहीं उठाया। लगातार फोन करने के बाद एक बार कॉल रिसीव हुई तो परिजनों को दूसरी तरफ से छात्रा के चीखने की आवाज सुनाई देने का दावा किया गया है।

    इसके बाद परिवार की चिंता और बढ़ गई और छात्रा की तलाश शुरू कर दी गई। शाम करीब छह बजे छात्रा ने स्वयं परिवार को फोन किया। परिजनों के अनुसार, वह फोन पर दर्द से कराह रही थी और उसने परिवार को स्कूल के पास आने के लिए कहा। सूचना मिलते ही परिवार के सदस्य वहां पहुंचे।

    परिजनों का कहना है कि जब वे स्कूल के पास पहुंचे तो छात्रा की हालत खराब थी। इसके बाद घटना की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने पीड़िता और उसके परिवार के बयान के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपियों की तलाश में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान प्रिंस कुमार और रौशन कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि राजू कुमार उर्फ झूनू की तलाश जारी है। पुलिस घटना में इस्तेमाल कार और आरोपियों की भूमिका से जुड़े साक्ष्य जुटाने में भी लगी है।

    नाबालिग से जुड़े यौन अपराध के कारण उसकी पहचान और ऐसी किसी भी जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता जिससे उसकी पहचान उजागर हो। पुलिस मामले में दर्ज आरोपों की जांच करने के साथ उपलब्ध तकनीकी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम की पुष्टि करने में जुटी है।

    चलती कार में नाबालिग छात्रा के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म और उसके बाद उसकी हत्या की योजना बनाने के आरोपों ने इलाके में सनसनी फैला दी है। फिलहाल दो आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं और तीसरे आरोपी की तलाश जारी है। पुलिस जांच पूरी होने और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ मामले से जुड़े अन्य तथ्य स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • Palwal Accident: हरियाणा के पलवल में KMP एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा, 6 श्रद्धालुओं की मौत, 16 लोग घायल

    Palwal Accident: हरियाणा के पलवल में KMP एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा, 6 श्रद्धालुओं की मौत, 16 लोग घायल

    Palwal Accident: हरियाणा के पलवल में KMP एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा, 6 श्रद्धालुओं की मौत, 16 लोग घायल

    हरियाणा के पलवल में कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे पर मंगलवार तड़के भीषण सड़क हादसा हो गया। श्रद्धालुओं को लेकर जा रही एक पिकअप गाड़ी यादवपुर गांव के पास खड़े ट्रक से जा टकराई। हादसा इतना भीषण था कि छह श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 16 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को उपचार के लिए अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों तथा पुलिस की मदद से घायलों को वाहनों से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया।

    जानकारी के अनुसार, पिकअप गाड़ी में सवार सभी श्रद्धालु उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के रहने वाले थे। मैनपुरी के किशनपुर मुरैया, मकोया, चांदा और आसपास के गांवों से श्रद्धालुओं का समूह धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए निकला था। श्रद्धालु राजस्थान और हरियाणा के प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन करने के बाद उत्तर प्रदेश के मथुरा-वृंदावन की ओर जा रहे थे। इसी दौरान पलवल में उनकी गाड़ी दुर्घटना का शिकार हो गई।

    बताया जा रहा है कि श्रद्धालुओं ने राजस्थान स्थित खाटू श्याम और बालाजी समेत अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन किए थे। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने गोगामेड़ी के भी दर्शन किए। इसके बाद समूह की योजना वृंदावन और बरसाना जाने की थी। सभी श्रद्धालु पिकअप वाहन में सवार होकर आगे की यात्रा कर रहे थे, लेकिन पलवल के यादवपुर गांव के पास KMP एक्सप्रेसवे पर उनकी पिकअप सड़क किनारे खड़े एक ट्रक से टकरा गई।

    टक्कर इतनी तेज थी कि पिकअप का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और वाहन में सवार कई श्रद्धालु अंदर ही फंस गए। हादसे की आवाज सुनकर आसपास मौजूद लोग मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। पुलिस और एंबुलेंस को भी घटना की सूचना दी गई। इसके बाद घायलों को पिकअप से निकालकर उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।

    हादसे में छह श्रद्धालुओं की मौत होने की जानकारी सामने आई है। मृतकों की पहचान उत्तर प्रदेश के मैनपुरी निवासी 70 वर्षीय विजय, 45 वर्षीय रसमा देवी, 65 वर्षीय कमला, 40 वर्षीय राजकुमार, 60 वर्षीय महेश और 52 वर्षीय सुधा के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि कुछ श्रद्धालुओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक महिला ने अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।

    इस भीषण दुर्घटना में 16 से अधिक श्रद्धालुओं के घायल होने की जानकारी है। इनमें से नौ घायलों को तत्काल इलाज के लिए पलवल के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम घायलों का उपचार कर रही है। गंभीर रूप से घायल लोगों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    हादसे की प्रारंभिक वजह पिकअप चालक को नींद की झपकी आना मानी जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि लंबी यात्रा के दौरान चालक को झपकी आने के कारण वाहन पर उसका नियंत्रण नहीं रहा और पिकअप आगे खड़े ट्रक से टकरा गई। हालांकि, दुर्घटना की वास्तविक वजह पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    घटना के बाद चालक के मौके से फरार होने की बात भी सामने आई है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है और दुर्घटना से जुड़ी परिस्थितियों की जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि हादसे के समय पिकअप की रफ्तार कितनी थी और जिस ट्रक से पिकअप टकराई, वह एक्सप्रेसवे पर किस स्थिति में खड़ा था।

    पुलिस दुर्घटनाग्रस्त दोनों वाहनों से संबंधित जानकारी जुटाने के साथ प्रत्यक्षदर्शियों से भी पूछताछ कर रही है। हादसे के बाद कुछ समय के लिए एक्सप्रेसवे पर यातायात भी प्रभावित हुआ। दुर्घटनाग्रस्त वाहन को हटाकर यातायात व्यवस्था सामान्य कराने की कार्रवाई की गई।

    एक साथ छह श्रद्धालुओं की मौत से उनके परिवारों और गांवों में शोक का माहौल है। धार्मिक यात्रा पर निकले लोगों के परिजनों को जैसे ही हादसे की सूचना मिली, उनमें चिंता और मातम पसर गया। प्रशासन की ओर से मृतकों के परिजनों को सूचना देने और घायलों के इलाज की व्यवस्था में सहयोग किया जा रहा है।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। चालक को झपकी आने की आशंका समेत दुर्घटना के सभी संभावित कारणों की पड़ताल की जा रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि KMP एक्सप्रेसवे पर हुए इस दर्दनाक हादसे की वास्तविक वजह क्या थी और इसके लिए किसकी लापरवाही जिम्मेदार रही।

  • Brishti Mukherjee Death: ममता बनर्जी की भतीजी बृष्टि मुखर्जी की मौत, घर में फंदे से लटका मिला शव

    Brishti Mukherjee Death: ममता बनर्जी की भतीजी बृष्टि मुखर्जी की मौत, घर में फंदे से लटका मिला शव

    Brishti Mukherjee Death: ममता बनर्जी की भतीजी बृष्टि मुखर्जी की मौत, घर में फंदे से लटका मिला शव

    पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की रिश्तेदार बताई जा रही 28 वर्षीय बृष्टि मुखर्जी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। बृष्टि मुखर्जी का शव रामपुरहाट क्षेत्र के कुसुम्बा गांव स्थित उनके घर में फंदे से लटका मिला। शुरुआती जानकारी में इसे कथित आत्महत्या का मामला बताया जा रहा है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच पूरी होने के बाद ही मौत की वास्तविक परिस्थितियों के बारे में स्पष्ट रूप से कुछ कहा जा सकेगा।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बृष्टि मुखर्जी अपने परिवार के साथ कुसुम्बा गांव में रहती थीं। उनका शव मकान की दूसरी मंजिल पर स्थित एक कमरे में मिला। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि मामले की जांच की जा रही है। फिलहाल पुलिस ने आत्महत्या के पीछे किसी निश्चित कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

    बृष्टि मुखर्जी की मौत इसलिए भी चर्चा में आ गई है क्योंकि उनका पारिवारिक संबंध पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बताया जा रहा है। बृष्टि के पिता निहार मुखर्जी स्थानीय तृणमूल कांग्रेस से जुड़े नेता बताए जाते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, निहार मुखर्जी ममता बनर्जी के मामा के बेटे हैं। इसी पारिवारिक रिश्ते के आधार पर बृष्टि मुखर्जी को ममता बनर्जी की भतीजी बताया जा रहा है।

    बृष्टि मुखर्जी गैर-शिक्षण कर्मचारी के रूप में कार्यरत थीं, लेकिन पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित शिक्षक भर्ती मामले में अदालत के फैसले के बाद उनकी नौकरी चली गई थी। मार्च 2023 में उनकी नौकरी समाप्त होने की बात सामने आई थी। शिक्षक भर्ती से जुड़े मामले में अदालत ने बड़ी संख्या में शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियों को रद्द करने का आदेश दिया था।

    पश्चिम बंगाल का शिक्षक भर्ती मामला पिछले कई वर्षों से राज्य की राजनीति में बड़े विवाद का कारण बना हुआ है। सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षकों तथा गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे। मामला अदालत पहुंचने के बाद हजारों नियुक्तियों को लेकर कानूनी कार्रवाई हुई। बाद में लगभग 26 हजार शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द किए जाने का मामला भी सामने आया।

    आरोप था कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान कुछ उम्मीदवारों को कथित रूप से अवैध तरीके से लाभ पहुंचाया गया और नियुक्तियों में पैसों के लेन-देन तथा पक्षपात जैसी अनियमितताएं हुईं। यह मामला धीरे-धीरे पश्चिम बंगाल के सबसे बड़े राजनीतिक और भर्ती विवादों में शामिल हो गया। जांच के दौरान राज्य के तत्कालीन शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी समेत सत्तारूढ़ दल से जुड़े कुछ नेताओं और शिक्षा विभाग तथा संबंधित भर्ती संस्थाओं के अधिकारियों पर भी कार्रवाई हुई।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन उम्मीदवारों की नियुक्तियां अदालत के आदेश के बाद प्रभावित हुई थीं, उनकी सूची में बृष्टि मुखर्जी का नाम भी शामिल था। उनका नाम सूची में 608वें स्थान पर होने की बात कही गई है। नौकरी जाने के बाद से उनकी व्यक्तिगत परिस्थितियों को लेकर भी अलग-अलग जानकारियां सामने आई हैं।

    मीडिया रिपोर्ट्स में परिवार के सदस्यों के हवाले से दावा किया गया है कि नौकरी जाने के बाद बृष्टि पिछले कुछ वर्षों से मानसिक तनाव से गुजर रही थीं और उनका इलाज भी चल रहा था। हालांकि, उनकी मानसिक स्थिति और मौत के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुलिस ने अभी पुष्टि नहीं की है। इसलिए मौत के कारण को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा।

    पुलिस अब घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत के समय और कारण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही परिवार के सदस्यों और अन्य संबंधित लोगों से भी जानकारी ली जा सकती है। पुलिस का कहना है कि सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

    बृष्टि मुखर्जी की अचानक मौत से परिवार और स्थानीय क्षेत्र में शोक का माहौल है। वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से पारिवारिक संबंध और शिक्षक भर्ती विवाद में नौकरी प्रभावित होने के कारण यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • Anna Hazare Health: अन्ना हजारे की तबीयत बिगड़ी, वायरल इंफेक्शन और डिहाइड्रेशन के बाद मुंबई के अस्पताल में भर्ती

    Anna Hazare Health: अन्ना हजारे की तबीयत बिगड़ी, वायरल इंफेक्शन और डिहाइड्रेशन के बाद मुंबई के अस्पताल में भर्ती

    Anna Hazare Health: अन्ना हजारे की तबीयत बिगड़ी, वायरल इंफेक्शन और डिहाइड्रेशन के बाद मुंबई के अस्पताल में भर्ती

    मुंबई। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें मुंबई के बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के मुताबिक वह गंभीर वायरल संक्रमण और तेज डिहाइड्रेशन की समस्या से जूझ रहे हैं। फिलहाल उन्हें अस्पताल के ICU में रखा गया है, जहां डॉक्टरों की टीम उनकी सेहत पर लगातार नजर बनाए हुए है।

    अन्ना हजारे की तबीयत सबसे पहले उनके पैतृक गांव रालेगण सिद्धि में खराब हुई थी। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी बढ़ने के बाद उन्हें वहां के एक स्थानीय अस्पताल में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनका प्राथमिक उपचार शुरू किया।

    जानकारी के अनुसार रालेगण सिद्धि के अस्पताल में इलाज के बावजूद उनकी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसके बाद स्वास्थ्य की स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा के लिए मुंबई ले जाने का फैसला किया।

    अन्ना हजारे को रालेगण सिद्धि से मुंबई लाकर बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। यहां वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. गौतम भंसाली की निगरानी में उनका इलाज किया जा रहा है।

    बताया जा रहा है कि वायरल संक्रमण के साथ उन्हें गंभीर डिहाइड्रेशन की समस्या भी हुई है। शरीर में पानी की कमी और संक्रमण के कारण उनकी सेहत प्रभावित हुई, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती रखकर इलाज करने का निर्णय लिया।

    फिलहाल अन्ना हजारे को ICU में रखा गया है। उनकी उम्र और स्वास्थ्य की मौजूदा स्थिति को देखते हुए डॉक्टर विशेष निगरानी कर रहे हैं। अस्पताल में आवश्यक जांच और उपचार की प्रक्रिया जारी है।

    डॉक्टरों की टीम वायरल संक्रमण की गंभीरता और डिहाइड्रेशन से शरीर पर पड़े प्रभाव की निगरानी कर रही है। उपचार के दौरान उनकी स्थिति में होने वाले बदलावों के आधार पर आगे की चिकित्सा प्रक्रिया तय की जाएगी।

    अन्ना हजारे की तबीयत खराब होने की जानकारी सामने आने के बाद उनके समर्थकों और शुभचिंतकों में चिंता बढ़ गई है। उनके स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी पर लोगों की नजर बनी हुई है।

    रालेगण सिद्धि लंबे समय से अन्ना हजारे की सामाजिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। वह महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के इसी गांव से भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों और ग्रामीण विकास से जुड़े आंदोलनों को आगे बढ़ाते रहे हैं।

    अन्ना हजारे देश में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में लंबे समय से सक्रिय हजारे ने पारदर्शिता, ग्रामीण विकास और भ्रष्टाचार के खिलाफ विभिन्न अभियानों का नेतृत्व किया है।

    विशेष रूप से लोकपाल की मांग को लेकर किए गए उनके आंदोलनों ने राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक ध्यान आकर्षित किया था। दिल्ली में उनके अनशन और आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान से जुड़े थे।

    हालांकि इस समय उनकी प्राथमिकता स्वास्थ्य लाभ है। बॉम्बे हॉस्पिटल में डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है और स्वास्थ्य की स्थिति को देखते हुए उन्हें ICU में रखा गया है।

    वायरल संक्रमण के साथ डिहाइड्रेशन होने की स्थिति में शरीर में कमजोरी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसी वजह से डॉक्टर उनके स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न मानकों की लगातार निगरानी कर रहे हैं।

    रालेगण सिद्धि में प्राथमिक इलाज के बाद मुंबई शिफ्ट किए जाने का फैसला उनकी स्थिति में सुधार नहीं होने के कारण लिया गया। मुंबई पहुंचने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कर आवश्यक चिकित्सा शुरू की गई।

    फिलहाल अस्पताल की ओर से उनकी सेहत को लेकर विस्तृत मेडिकल बुलेटिन की जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में उनकी स्वास्थ्य स्थिति से संबंधित आगे की जानकारी चिकित्सकों या अधिकृत सूत्रों की ओर से जारी अपडेट के बाद स्पष्ट हो सकेगी।

    अन्ना हजारे के समर्थक उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। बॉम्बे हॉस्पिटल में डॉ. गौतम भंसाली की निगरानी में उनका इलाज जारी है और डॉक्टर उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

  • Kaushambi Firecracker Factory Blast: प्रयागराज एयरफोर्स स्टेशन के पास पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट, 11 की मौत; मृतकों में 8 बच्चे, प्रशासन का बुलडोजर एक्शन

    Kaushambi Firecracker Factory Blast: प्रयागराज एयरफोर्स स्टेशन के पास पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट, 11 की मौत; मृतकों में 8 बच्चे, प्रशासन का बुलडोजर एक्शन

    Kaushambi Firecracker Factory Blast: प्रयागराज एयरफोर्स स्टेशन के पास पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट, 11 की मौत; मृतकों में 8 बच्चे, प्रशासन का बुलडोजर एक्शन

    कौशांबी। उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में प्रयागराज एयरफोर्स स्टेशन के पास मनौरी इलाके में एक पटाखा फैक्ट्री में सोमवार को हुए भीषण विस्फोट में 11 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में आठ बच्चे बताए जा रहे हैं, जबकि एक दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं। धमाका इतना जबरदस्त था कि फैक्ट्री बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और आसपास के कुछ मकानों को भी भारी नुकसान पहुंचा। हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुट गईं। प्रशासन ने मामले में कार्रवाई करते हुए संबंधित गोदाम पर बुलडोजर भी चलवाया है।

    घटना कौशांबी के पिपरी थाना क्षेत्र के महमूदपुर मनौरी इलाके की बताई जा रही है। सोमवार को पटाखा बनाने वाली फैक्ट्री में अचानक तेज विस्फोट हुआ। धमाके की आवाज दूर तक सुनाई दी और कुछ ही क्षणों में पूरे इलाके में अफरातफरी मच गई।

    विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि फैक्ट्री का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। आसपास स्थित कुछ मकानों को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। धमाके के बाद मलबा दूर तक फैल गया और घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई।

    स्थानीय लोगों ने घटना की जानकारी पुलिस और प्रशासन को दी। इसके बाद पुलिस, प्रशासन और राहत-बचाव से जुड़ी टीमें मौके पर पहुंचीं। मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने का काम शुरू किया गया।

    हादसे में 11 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है। मृतकों में आठ बच्चे बताए जा रहे हैं। इसके अलावा एक दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं। घायलों को उपचार के लिए अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर दुख जताया और मृतकों के परिजनों तथा घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को घायलों के समुचित उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं। इसके बाद पुलिस और प्रशासन ने मामले की जांच और कानूनी कार्रवाई तेज कर दी है।

    पुलिस ने मामले में फैक्ट्री संचालन से जुड़े कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इनमें आदिल पुत्र नौशाद, शकील पुत्र निजामुद्दीन, शबाना पत्नी शकील, नौशाद पुत्र निजामुद्दीन, कहकसा बानो पत्नी नौशाद और साइना पुत्री शकील समेत अन्य संबंधित लोगों के नाम बताए गए हैं। ये सभी महमूदपुर मनौरी, पिपरी क्षेत्र से जुड़े बताए जा रहे हैं।

    हालांकि मामले में किस आरोपी की क्या भूमिका थी और हादसे के समय फैक्ट्री का वास्तविक संचालन कौन कर रहा था, इसकी विस्तृत जांच पुलिस कर रही है। दर्ज मुकदमे में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

    प्रारंभिक पुलिस जांच में पटाखा फैक्ट्री के संचालन को लेकर कई गंभीर जानकारियां सामने आने का दावा किया गया है। बताया जा रहा है कि यह फैक्ट्री करीब दो दशक से संचालित हो रही थी और यहां पटाखों के लिए विस्फोटक सामग्री तैयार की जाती थी।

    जानकारी के अनुसार फैक्ट्री का संचालन पहले नौशाद द्वारा किए जाने की बात सामने आई है। बाद में उसके पुत्र आदिल और भाई शकील द्वारा इसे संचालित किए जाने का आरोप है। पुलिस इस दावे की भी जांच कर रही है कि वर्तमान में फैक्ट्री का नियंत्रण और दैनिक संचालन किसके हाथ में था।

    सबसे गंभीर आरोप फैक्ट्री के लाइसेंस को लेकर सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि यहां बिना वैध लाइसेंस के पटाखे और विस्फोटक सामग्री तैयार की जा रही थी। प्रशासन अब फैक्ट्री से संबंधित पुराने और मौजूदा लाइसेंस रिकॉर्ड की जांच कर रहा है।

    पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फैक्ट्री में कितनी मात्रा में विस्फोटक सामग्री रखी गई थी और उसके भंडारण के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं।

    आरोप है कि फैक्ट्री में तैयार पटाखे और विस्फोटक सामग्री कौशांबी के अलावा दूसरे स्थानों पर भी भेजी जाती थी। यदि जांच में यह दावा सही पाया जाता है तो पुलिस इससे जुड़े सप्लाई नेटवर्क और अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर सकती है।

    इस मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया है कि अवैध रूप से पटाखे बनाने और उनका भंडारण करने के मामले में फैक्ट्री संचालक बताए जा रहे आदिल के खिलाफ पहले भी कार्रवाई हुई थी। जानकारी के मुताबिक वह वर्ष 2024 में इसी तरह के एक मामले में जेल जा चुका था।

    आरोप है कि जेल से रिहा होने के बाद भी मनौरी बाजार के रिहायशी इलाके में कथित रूप से बिना आवश्यक लाइसेंस के पटाखे और विस्फोटक सामग्री तैयार करने का काम जारी रहा। पुलिस और प्रशासन अब पुराने मामलों के रिकॉर्ड भी खंगाल रहे हैं।

    फैक्ट्री के लंबे समय से संचालित होने के दावे के बाद स्थानीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि रिहायशी इलाके में विस्फोटक सामग्री तैयार और जमा की जा रही थी तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी थी या नहीं, यह भी प्रशासनिक जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।

    जांच में यह पता लगाया जाना है कि फैक्ट्री का अंतिम बार निरीक्षण कब किया गया था, इसके पास कौन-कौन सी अनुमतियां थीं और विस्फोटक सामग्री के निर्माण एवं भंडारण से संबंधित नियमों का पालन हो रहा था या नहीं।

    हादसे के बाद प्रशासन ने अवैध निर्माण और भंडारण से संबंधित कार्रवाई भी शुरू कर दी है। जिलाधिकारी के निर्देश पर संबंधित गोदाम पर बुलडोजर चलाए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रशासन अब इससे जुड़ी संपत्तियों और दस्तावेजों की भी जांच कर रहा है।

    कौशांबी के जिलाधिकारी डॉ. अमित पाल ने कहा है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

    जिलाधिकारी के मुताबिक दोषियों की संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। इसके लिए पहले हादसे में जिम्मेदारी और संबंधित लोगों की भूमिका निर्धारित की जाएगी।

    प्रशासन के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल विस्फोट के वास्तविक कारण का पता लगाना है। फैक्ट्री के अंदर किस तरह की विस्फोटक सामग्री मौजूद थी, कितनी मात्रा में उसका भंडारण किया गया था और पहली चिंगारी या विस्फोट किस वजह से हुआ, इसकी तकनीकी जांच की जा रही है।

    इसके अलावा सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई थी या नहीं, इसकी भी जांच होगी। रिहायशी क्षेत्र में इस तरह की इकाई संचालित करने के लिए आवश्यक अनुमति और सुरक्षा दूरी जैसे पहलुओं से संबंधित दस्तावेज भी खंगाले जा रहे हैं।

    11 लोगों की मौत और बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने के कारण हादसे ने प्रशासनिक निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेष रूप से मृतकों में बच्चों के शामिल होने की जानकारी के बाद घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर आक्रोश और दुख का माहौल है।

    पुलिस अब दर्ज मुकदमे में नामजद लोगों की भूमिका, फैक्ट्री के संचालन, विस्फोटक सामग्री की खरीद और सप्लाई तथा संभावित अवैध भंडारण की जांच कर रही है। आवश्यक होने पर अन्य लोगों को भी जांच के दायरे में लिया जा सकता है।

    घटनास्थल पर मौजूद मलबे और विस्फोटक सामग्री के अवशेष भी हादसे की वजह का पता लगाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि विस्फोट किस सामग्री में और किन परिस्थितियों में शुरू हुआ था।

    फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता घायलों का उपचार सुनिश्चित करने के साथ पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी तय करना है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद पुलिस और प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है।

    प्रशासनिक और पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित रूप से बिना वैध लाइसेंस के फैक्ट्री इतने लंबे समय तक कैसे संचालित होती रही और इसके लिए किन लोगों या स्तरों पर जिम्मेदारी बनती है। अधिकारियों ने साफ किया है कि जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • Krishna Janmabhoomi Silver Shila: अयोध्या में रजत शिला का पूजन, श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए ब्रज रवाना; वृंदावन में होगा भव्य स्वागत

    Krishna Janmabhoomi Silver Shila: अयोध्या में रजत शिला का पूजन, श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए ब्रज रवाना; वृंदावन में होगा भव्य स्वागत

    Krishna Janmabhoomi Silver Shila: अयोध्या में रजत शिला का पूजन, श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए ब्रज रवाना; वृंदावन में होगा भव्य स्वागत

    अयोध्या। राम मंदिर निर्माण के बाद अब श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े अभियान को लेकर संतों और हिंदू पक्ष से जुड़े लोगों ने गतिविधियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए तैयार कराई गई रजत शिला का शनिवार को अयोध्या में विधि-विधान से पूजन कराया गया। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने रजत शिला का सांकेतिक पूजन किया और अभियान की सफलता के लिए आशीर्वाद दिया। अयोध्या में पूजन के बाद अब इस शिला को ब्रजभूमि ले जाया जा रहा है।

    इस आयोजन को राम मंदिर आंदोलन के दौरान हुए शिला पूजन की परंपरा से जोड़कर देखा जा रहा है। राम मंदिर निर्माण से पहले मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे दिगम्बर अखाड़ा के तत्कालीन महंत रामचंद्र दास परमहंस ने शिला पूजन किया था। अब उसी परंपरा से प्रेरणा लेते हुए श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े अभियान के लिए रजत शिला का पूजन कराया गया है।

    हालांकि राम मंदिर आंदोलन के दौरान हुए शिला पूजन और वर्तमान आयोजन की परिस्थितियां अलग हैं। रामचंद्र दास परमहंस ने अपनी अंतिम इच्छा के रूप में शिला दान की घोषणा की थी, जबकि श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े इस कार्यक्रम की घोषणा ब्रजभूमि के संतों की ओर से नौ अगस्त को की गई थी।

    ब्रजभूमि से हिंदू पक्षकार दिनेश फलाहारी की अगुवाई में श्रद्धालुओं का एक दल रजत शिला लेकर अयोध्या पहुंचा। शनिवार को श्रद्धालुओं ने सबसे पहले पूर्णिमा के अवसर पर सरयू नदी में स्नान किया। इसके बाद सरयू तट पर रजत शिला का विधि-विधान के साथ पूजन-अर्चन किया गया।

    सरयू तट पर धार्मिक अनुष्ठान पूरा करने के बाद श्रद्धालु रजत शिला को लेकर अयोध्या की प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी पहुंचे। यहां शिला को हनुमान जी के समक्ष अर्पित किया गया और धार्मिक परंपरा के अनुसार आगे के अभियान के लिए उनका आशीर्वाद लिया गया।

    इसके बाद रजत शिला को श्रीराम जन्मभूमि की चौखट तक ले जाया गया। श्रद्धालुओं ने रामलला के दर्शन किए और श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े अभियान की सफलता के लिए प्रार्थना की। रामलला के दर्शन के बाद श्रद्धालुओं का दल रजत शिला लेकर मणिराम छावनी पहुंचा।

    मणिराम छावनी में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एवं श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के हाथों रजत शिला का सांकेतिक पूजन कराया गया। महंत नृत्यगोपाल दास ने शिला का स्पर्श कर पूजा-अर्चना की और वहां मौजूद श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया।

    मणिराम छावनी के संत और महंत नृत्यगोपाल दास के निजी सहायक जानकी दास ने भी कार्यक्रम की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े श्रद्धालु अपने साथ रजत शिला लेकर अयोध्या आए थे। महंत नृत्यगोपाल दास ने शिला का स्पर्श कर उसका पूजन किया और श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े अभियान की सफलता के लिए श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान किया।

    हिंदू पक्षकार दिनेश फलाहारी के मुताबिक, इस रजत शिला को केवल अयोध्या और ब्रजभूमि तक सीमित रखने की योजना नहीं है। इसे ब्रजभूमि के विभिन्न धार्मिक स्थलों के साथ देश के प्रमुख मंदिरों और बड़ी संख्या में गांवों तक ले जाकर पूजन कराने की योजना बनाई गई है।

    उन्होंने बताया कि ब्रजभूमि सहित देश के प्रमुख मंदिरों और एक लाख से अधिक गांवों में रजत शिला के पूजन का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए बृज धर्माचार्य परिषद के महामंत्री पंडित राजेश पाठक को अभियान का प्रभारी नियुक्त किया गया है।

    अभियान के प्रभारी राजेश पाठक के अनुसार, एक सितंबर को रजत शिला विशेष वाहन से ब्रजभूमि में प्रवेश करेगी। शिला के आगमन को लेकर रास्ते में विभिन्न स्थानों पर स्वागत की तैयारियां की जा रही हैं। धार्मिक संगठनों और श्रद्धालुओं की ओर से शिला के स्वागत के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है।

    ब्रजभूमि पहुंचने के बाद रजत शिला को सबसे पहले श्रीधाम वृंदावन ले जाया जाएगा। यहां धार्मिक अनुष्ठानों और पूजन के बाद इसे आगे के निर्धारित स्थानों तक ले जाने की तैयारी है। आयोजकों की योजना इस अभियान के माध्यम से अधिक से अधिक मंदिरों और गांवों को श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े धार्मिक अभियान से जोड़ने की है।

    अयोध्या में हुए रजत शिला पूजन का धार्मिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया क्योंकि इसका पूजन महंत नृत्यगोपाल दास ने किया। वह लंबे समय से अयोध्या और ब्रजभूमि दोनों की धार्मिक परंपराओं से जुड़े रहे हैं। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के साथ वह श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं।

    महंत नृत्यगोपाल दास का ब्रजभूमि और जन्माष्टमी से पुराना संबंध रहा है। वह हर साल जन्माष्टमी के अवसर पर बांकेबिहारी मंदिर में दर्शन के लिए जाते रहे हैं। पांच अगस्त 2020 को अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल होने के बाद भी वह जन्माष्टमी मनाने ब्रज गए थे।

    उसी दौरान वह कोरोना संक्रमित हो गए थे। इसके बाद से उनका स्वास्थ्य पहले जैसा नहीं रहा। हालांकि वह लगातार स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं, लेकिन उम्र और स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों के कारण उनके सार्वजनिक कार्यक्रम सीमित हो गए हैं।

    उनके उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास के अनुसार, महंत नृत्यगोपाल दास की जन्माष्टमी पर ब्रज जाने की पुरानी परंपरा रही है। इस बार भी उनकी यात्रा की संभावना उनके स्वास्थ्य पर निर्भर करेगी। फिलहाल इस संबंध में कार्यक्रम को अंतिम रूप नहीं दिया गया है।

    श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़ी रजत शिला का अयोध्या में सरयू तट से लेकर हनुमानगढ़ी, श्रीराम जन्मभूमि और मणिराम छावनी तक पूजन कराया जाना आयोजकों की ओर से इस अभियान के महत्वपूर्ण चरण के रूप में देखा जा रहा है।

    अब इस धार्मिक अभियान का अगला प्रमुख पड़ाव ब्रजभूमि होगा। एक सितंबर को विशेष वाहन से शिला के ब्रज में प्रवेश करने और सबसे पहले वृंदावन ले जाए जाने की तैयारी है। इसके बाद आयोजकों की योजना देश के प्रमुख मंदिरों और एक लाख से अधिक गांवों तक रजत शिला के पूजन अभियान को पहुंचाने की है।

  • Greater Noida Encounter: ग्रेनो में छह वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म-हत्या का आरोपी मुठभेड़ में ढेर, गाजियाबाद समेत पहले भी दर्ज थे गंभीर मामले

    Greater Noida Encounter: ग्रेनो में छह वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म-हत्या का आरोपी मुठभेड़ में ढेर, गाजियाबाद समेत पहले भी दर्ज थे गंभीर मामले

    Greater Noida Encounter: ग्रेनो में छह वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म-हत्या का आरोपी मुठभेड़ में ढेर, गाजियाबाद समेत पहले भी दर्ज थे गंभीर मामले

    ग्रेटर नोएडा। ईकोटेक-3 थाना क्षेत्र के एक गांव में छह वर्षीय बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के मामले में गिरफ्तार 32 वर्षीय आरोपी बलराज की शनिवार को पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई। पुलिस का दावा है कि आरोपी को उसकी निशानदेही पर अवैध पिस्टल बरामद कराने के लिए ले जाया गया था। इसी दौरान उसने छिपाकर रखी पिस्टल निकालकर पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। गोली लगने से एक कांस्टेबल घायल हो गया। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में बलराज को गोली लगी। उसे गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

    पुलिस उपायुक्त ग्रेटर नोएडा शैलेंद्र कुमार सिंह के मुताबिक, 28 अगस्त की रात हल्दौनी गांव निवासी एक व्यक्ति ने ईकोटेक-3 थाने में अपनी छह वर्षीय बेटी के लापता होने की सूचना दी थी। बच्ची के अचानक गायब होने की जानकारी मिलते ही पुलिस ने मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की पांच टीमों को बच्ची की तलाश में लगाया गया। पुलिस टीमों ने आसपास के इलाकों में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालने के साथ स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटानी शुरू की। तकनीकी और अन्य माध्यमों से भी बच्ची के बारे में सुराग तलाशे गए।

    जांच आगे बढ़ने के दौरान पुलिस को बलराज नामक व्यक्ति पर संदेह हुआ। पुलिस के मुताबिक, जांच में सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर बच्ची को अगवा कर अपने साथ ले गया था। उस पर बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या करने का आरोप लगाया गया।

    पुलिस का कहना है कि हत्या के बाद बच्ची के शव को बोरे में भरकर फेंक दिया गया था। जांच के दौरान पुलिस ने शव बरामद किया और मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया गया। पुलिस के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई।

    पुलिस ने इसके बाद बलराज को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपने पास एक अवैध पिस्टल होने की जानकारी दी। उसने पुलिस को उस स्थान के बारे में भी बताया, जहां कथित तौर पर हथियार छिपाया गया था।

    आरोपी से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस टीम उसे पिस्टल बरामद कराने के लिए बताए गए स्थान पर लेकर पहुंची। पुलिस का दावा है कि वहां पहुंचने के बाद बलराज ने छिपाकर रखी पिस्टल निकाली, लेकिन हथियार पुलिस को सौंपने के बजाय अचानक पुलिसकर्मियों पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग कर दी।

    आरोपी की ओर से की गई फायरिंग में पुलिस का एक कांस्टेबल गोली लगने से घायल हो गया। अचानक हुए हमले के बाद पुलिसकर्मियों ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की। इस दौरान पुलिस की गोली बलराज को लगी और वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

    घायल आरोपी को तत्काल उपचार के लिए नोएडा के जिला अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं गोली लगने से घायल कांस्टेबल को भी उपचार उपलब्ध कराया गया। पुलिस के मुताबिक घायल पुलिसकर्मी का इलाज कराया जा रहा है।

    पुलिस अब मुठभेड़ से संबंधित कानूनी प्रक्रिया भी पूरी कर रही है। घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों और बरामद हथियार को जांच का हिस्सा बनाया गया है। पुलिस की ओर से मुठभेड़ को लेकर दावा किया गया है कि आरोपी द्वारा फायरिंग किए जाने के बाद आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की गई।

    इस पूरे मामले में बच्ची के लापता होने की सूचना मिलने से लेकर आरोपी तक पहुंचने के लिए पांच पुलिस टीमों को लगाया गया था। CCTV फुटेज और अन्य सूचनाओं के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया गया। बच्ची का शव मिलने और पोस्टमार्टम के बाद मामले में दुष्कर्म और हत्या से जुड़े तथ्यों को जांच में शामिल किया गया।

    पुलिस के मुताबिक, बलराज का आपराधिक इतिहास खंगालने पर उसके खिलाफ पहले भी बच्चों से जुड़े गंभीर यौन अपराध और हत्या के मामले सामने आए हैं। पुलिस का दावा है कि वह इससे पहले भी मासूम बच्चों को निशाना बना चुका था और उसके खिलाफ अलग-अलग थाना क्षेत्रों में गंभीर मुकदमे दर्ज रहे थे।

    पुलिस के अनुसार, गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र में भी बलराज के खिलाफ एक बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या का मामला दर्ज हुआ था। पुलिस का कहना है कि उस मामले में आरोपी को सजा भी हुई थी। उसके पुराने मामलों और उनसे जुड़े न्यायिक रिकॉर्ड की भी जानकारी जुटाई जा रही है।

    इसके अलावा गौतमबुद्ध नगर के सूरजपुर थाना क्षेत्र में भी एक बच्चे के साथ यौन अपराध और उसकी हत्या का आरोप बलराज पर लग चुका था। पुलिस के मुताबिक, आरोपी के खिलाफ बच्चों से जुड़े यौन अपराध और हत्या के कई गंभीर मामले दर्ज रहे हैं।

    बलराज का विस्तृत आपराधिक इतिहास सामने आने के बाद पुलिस उसके पुराने मामलों की भी जानकारी जुटा रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि उसके खिलाफ अलग-अलग जिलों और थानों में कितने मुकदमे दर्ज हुए थे और उन मामलों में क्या कार्रवाई हुई थी।

    वहीं स्थानीय ग्रामीणों ने भी आरोपी को आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति बताया है। कुछ ग्रामीणों ने उसके व्यवहार को लेकर कई गंभीर दावे किए हैं। हालांकि ग्रामीणों की ओर से लगाए गए इन अतिरिक्त आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें जांच तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्थापित किया जा सकेगा।

    छह वर्षीय बच्ची के साथ हुई इस घटना से इलाके में आक्रोश और दुख का माहौल है। बच्ची के लापता होने के बाद पुलिस की पांच टीमों को उसकी तलाश में लगाया गया था, लेकिन जांच के दौरान उसके साथ दुष्कर्म और हत्या का मामला सामने आया। इसके बाद आरोपी बलराज को हिरासत में लेकर मामले की आगे की जांच की जा रही थी।

    पुलिस के अनुसार, आरोपी से अवैध हथियार की बरामदगी भी जांच का हिस्सा थी। इसी प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर आरोपी ने पुलिस पर गोली चला दी और जवाबी फायरिंग में घायल होने के बाद उसकी मौत हो गई। इस दौरान एक पुलिसकर्मी भी घायल हुआ है।

    मामले में पुलिस बच्ची के अपहरण से लेकर हत्या तक की पूरी घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने के साथ आरोपी के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी पड़ताल कर रही है। साथ ही मुठभेड़ और हथियार बरामदगी से जुड़ी आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

    फिलहाल पुलिस ने छह वर्षीय बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के आरोपी बलराज के मुठभेड़ में मारे जाने की पुष्टि की है। पुलिस का दावा है कि आरोपी का पहले से गंभीर आपराधिक इतिहास था और गाजियाबाद तथा गौतमबुद्ध नगर में बच्चों से जुड़े यौन अपराध एवं हत्या के मामलों में उसका नाम सामने आ चुका था। मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच और कानूनी कार्रवाई जारी है।