Operation Sindoor Debate: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर लोकसभा में जयशंकर का बड़ा बयान, पाकिस्तान को बेनकाब करने के लिए उठाए गए 5 कड़े कदम, सिंधु जल संधि भी तत्काल प्रभाव से स्थगित

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Operation Sindoor Debate: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर लोकसभा में जयशंकर का बड़ा बयान, पाकिस्तान को बेनकाब करने के लिए उठाए गए 5 कड़े कदम, सिंधु जल संधि भी तत्काल प्रभाव से स्थगित

लोकसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर जारी चर्चा के दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने सरकार की रणनीति और कदमों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने दो टूक कहा कि भारत आतंकवाद को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति पर कायम है और इस नीति को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी मजबूती से रखा गया है। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने स्पष्ट रूप से आतंकवाद के खिलाफ अपनी स्थिति रखी, जिसे वैश्विक समर्थन मिला।

डॉ. जयशंकर ने सदन में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य प्रतिक्रिया नहीं थी, बल्कि एक बहु-स्तरीय कूटनीतिक, रणनीतिक और नीतिगत प्रयास था, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान की आतंकी साजिशों को वैश्विक मंचों पर उजागर करना था। उन्होंने कहा कि विशेषकर पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत को कड़ा संदेश देना अनिवार्य हो गया था।

उन्होंने बताया कि इस हमले के ठीक बाद 23 अप्रैल को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की आपात बैठक हुई, जिसमें पाकिस्तान के खिलाफ पांच बड़े फैसले लिए गए:

  1. 1960 की सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया गया, जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद का समर्थन बंद नहीं करता।
  2. अटारी चेक पोस्ट को बंद करने का निर्णय लिया गया, ताकि द्विपक्षीय आवाजाही पर नियंत्रण कसा जा सके।
  3. एसएआरसी वीजा छूट योजना के तहत पाकिस्तानियों को अब भारत में यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी।
  4. पाकिस्तानी हाई कमीशन में तैनात रक्षा, नौसेना और वायु सलाहकारों को “अवांछित व्यक्ति” घोषित किया जाएगा।
  5. हाई कमीशन स्टाफ की संख्या 55 से घटाकर 30 की जाएगी, ताकि पाकिस्तान के राजनयिक नेटवर्क को सीमित किया जा सके।

विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि यह संदेश दुनिया को देना जरूरी था कि भारत अब आतंकवाद पर केवल बयानबाजी नहीं करेगा, बल्कि ठोस नीतिगत फैसलों से जवाब देगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की प्रतिक्रिया केवल घरेलू स्तर पर सीमित नहीं रही, बल्कि कूटनीतिक मोर्चे पर भी सक्रिय रही। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान द्वारा लंबे समय से आतंकवाद को एक नीति के रूप में इस्तेमाल करने के प्रमाण दिए।

जयशंकर ने सदन में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच किसी तरह के सीजफायर प्रयासों का हवाला दिया था। विदेश मंत्री ने साफ किया कि भारत ने अपने स्तर पर जो भी कदम उठाए, वे पूर्णत: स्वतंत्र और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए लिए गए।

उन्होंने बताया कि इस हमले का उद्देश्य न केवल सुरक्षा को चोट पहुंचाना था, बल्कि जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था को कमजोर करना और भारत में सांप्रदायिक तनाव पैदा करना भी था। इस षड्यंत्र को बेनकाब करने के लिए विदेश मंत्रालय ने हर वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की भूमिका उजागर की।

जयशंकर ने अंत में कहा कि भारत की नीति अब स्पष्ट है – जो भी आतंकवाद को बढ़ावा देगा, उसे न केवल रणनीतिक, बल्कि कूटनीतिक और राजनीतिक मोर्चों पर भी जवाब दिया जाएगा। यह नई भारत की विदेश नीति की दृढ़ता का प्रतीक है, जो अब केवल प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि सक्रिय प्रतिरोध की राह पर है।

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