Barabanki Accident: बाराबंकी के औसानेश्वर महादेव मंदिर में सावन सोमवार पर बड़ा हादसा, 18 से ज्यादा श्रद्धालु घायल, सीएम योगी ने की 5 लाख मुआवजे की घोषणा
सावन के तीसरे सोमवार को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में एक बड़ा हादसा हो गया जिसने धार्मिक श्रद्धा के माहौल को अफरातफरी में बदल दिया। पौराणिक औसानेश्वर महादेव मंदिर में भारी संख्या में शिवभक्त उमड़े हुए थे। मंदिर परिसर में दर्शन के लिए जुटे श्रद्धालुओं की भीड़ में अचानक भगदड़ मच गई, जब ऊपर से गुजर रहा बिजली का तार टूटकर नीचे गिर पड़ा और मंदिर के टीन शेड में करंट उतर गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जैसे ही करंट टीन शेड में फैला, वहां मौजूद श्रद्धालु बदहवास होकर भागने लगे। भगदड़ के दौरान कई लोग जमीन पर गिर पड़े और एक-दूसरे के ऊपर चढ़ते चले गए। चीख-पुकार मच गई और मौके पर अफरातफरी का माहौल बन गया। हादसे में करीब डेढ़ दर्जन (18 से अधिक) श्रद्धालु घायल हो गए, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
हादसे की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और पुलिस के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य में जुट गए। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दुखद घटना का संज्ञान लेते हुए गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने हादसे में मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। साथ ही घायलों के समुचित इलाज के निर्देश भी अधिकारियों को दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने बाराबंकी के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर तत्काल राहत कार्य तेज़ी से चलाने और हादसे के कारणों की जांच करने के आदेश दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए मंदिर प्रबंधन और विद्युत विभाग को जिम्मेदारी तय करनी होगी।
यह हादसा एक दिन पहले ही उत्तराखंड के हरिद्वार में मनसा देवी मंदिर में हुई भगदड़ की घटना के बाद हुआ है, जिससे लोगों में और ज्यादा चिंता और आक्रोश देखा जा रहा है। सावन के पावन महीने में जब श्रद्धालु शिवभक्ति में लीन होते हैं, ऐसे हादसे व्यवस्था की लापरवाही की ओर इशारा करते हैं।
मौके पर मौजूद लोगों ने बिजली विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा कि मंदिर के ऊपर से गुजरते तारों की स्थिति पहले से ही खराब थी लेकिन प्रशासन की ओर से कोई उचित कदम नहीं उठाया गया। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह हादसा प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा था? और क्या आने वाले धार्मिक आयोजनों में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए कोई ठोस व्यवस्था की जाएगी?



