आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता के चलते ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ यानि पीएफआई और उससे संबद्ध कई अन्य संगठनों पर पांच साल का प्रतिबंध लगा दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से जारी गजट नोटिफिकेशन में पीएफआई को गैर-कानूनी संस्था घोषित कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब पीएफआई किसी प्रकार की गतिवधि को अंजाम नहीं दे सकता है। वह ना कोई कार्यक्रम आयोजित कर सकता है, न तो उसका कोई दफ्तर होगा, न वो कोई सदस्यता अभियान चला सकता है और न ही फंडिंग ले सकता है। केंद्र सरकार की यह कार्रवाई उसकी पिछले दिनों की सख्ती के मुताबिक ही है। अब तक के सबसे बड़े अभियान में पीएफआई के खिलाफ दो बार देशव्यापी छापेमारी हो चुकी है। इन छापेमारियों में संगठन के बड़े-बड़े नेता गिरफ्तार किए गए हैं। देश के 8 राज्यों में मंगलवार को भी पीएफआई के करीब 25 ठिकानों पर छापे पड़े थे और 170 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया था। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि पीएफआई ने समाज के विभिन्न वर्गों जैसे युवाओं, छात्रों, महिलाओं, इमामों, वकीलो या समाज के कमजोर वर्गों के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से अपने सहयोगी संगठनों या सम्बद्ध संस्थाओं या अग्रणी संगठनों की स्थापना की है। इसका एकमात्र उद्देश्य इसकी सदस्यता, प्रभाव और फंड जुटाने की क्षमता बढ़ाना है। इस कड़े प्रतिबंध के बाद सरकार अब PFI व इससे जुड़े अन्य संगठनों पर डिजिटल स्ट्राइक कर रही है। मामले से परिचित लोगों ने कहा कि केंद्र ने इन संगठनों की वेबसाइटों और सोशल मीडिया अकाउंट को ब्लॉक करने के लिए एक “टेकडाउन” ऑर्डर जारी किया है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि पीएफआई जैसे संगठन अपनी गतिविधियों का प्रचार न कर सकें। बैन लगाने से पहले प्रमुख मुस्लिम संगठनों से राय-मशविरा किया था। ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ एक सुन्नी वहाबी संगठन है और इस पर आतंकी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। केंद्र ने इस इस्लामिक संगठन पर कथित रूप से आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता के चलते कड़े आतंकवाद रोधी कानून (UAPA) के तहत पांच साल का प्रतिबंध लगाया है। हालांकि पीएफआई पर केंद्र की प्रस्तावित कार्रवाई से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा योजनाकारों ने प्रमुख मुस्लिम संगठनों को अपने पाले में किया था।



