Home विदेश Nepal Flood: नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से भारी तबाही, करीब 100 लोगों...

Nepal Flood: नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से भारी तबाही, करीब 100 लोगों की मौत; 1000 से ज्यादा लापता, 133 भारतीयों का भी पता नहीं

0
3

Nepal Flood: नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से भारी तबाही, करीब 100 लोगों की मौत; 1000 से ज्यादा लापता, 133 भारतीयों का भी पता नहीं

काठमांडू। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बुधवार सुबह अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल के रसुवा जिले और आसपास के इलाकों में भारी तबाही मचा दी। तिब्बत की दिशा से भोटेकोशी नदी में अचानक आए तेज बहाव ने कई बस्तियों, सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे को अपनी चपेट में ले लिया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, करीब 100 लोगों की मौत की खबर है, जबकि 1000 से अधिक लोगों का पता नहीं चल रहा है। लापता लोगों में 133 भारतीयों समेत 300 से अधिक विदेशी पर्यटकों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है।

नेपाल पुलिस के मुताबिक, अब तक 95 लोगों की मौत की सूचना मिली है। वहीं नेपाल के पर्यटन विभाग के अनुसार, 1000 से ज्यादा लोगों का पता नहीं चल रहा है। इनमें 133 भारतीय नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा की ओर जा रहे थे।

बाढ़ बुधवार सुबह करीब नौ बजे आई। बताया जा रहा है कि तिब्बत की दिशा से भोटेकोशी नदी में अचानक पानी का स्तर तेजी से बढ़ा और कुछ ही समय में तेज बहाव ने नदी किनारे स्थित कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। पानी की रफ्तार इतनी तेज थी कि कई स्थानों पर सड़कें, पुल और अन्य ढांचे क्षतिग्रस्त हो गए।

रसुवा जिले के टिमुरे, स्याफ्रुबेसी, हाकुबेसी, मेलुंग, सल्लेटार, शांतिबाजार, पैरेबेसी, खाल्टी बस्ती और बेत्रावती समेत करीब एक दर्जन बस्तियों पर बाढ़ का असर पड़ा है। कई स्थानों पर सड़क संपर्क टूटने के कारण राहत और बचाव कार्य भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।

आपदा का प्रभाव रसुवा तक सीमित नहीं रहा। बाढ़ का पानी नुवाकोट और धादिंग की तरफ बढ़ा तथा इसका असर चितवन तक देखे जाने की जानकारी सामने आई है। धादिंग के गल्छी क्षेत्र तक बाढ़ का पानी पहुंचने के बाद आगे मुग्लिन की दिशा में भी सतर्कता बरतने की चेतावनी दी गई है।

बाढ़ के कारण सड़क संपर्क को भी भारी नुकसान पहुंचा है। बेत्रावती से रसुवागढ़ी-तिब्बत सीमा तक करीब 42 किलोमीटर लंबी सड़क के बड़े हिस्से के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी है। इसके अलावा स्याफ्रुबेसी से सीमा तक लगभग 16 किलोमीटर सड़क को भी नुकसान पहुंचा है।

बाढ़ की वास्तविक वजह का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक और प्रशासनिक स्तर पर जांच की जा रही है। शुरुआती आकलन में आशंका जताई गई है कि ल्हेंदे नदी में बर्फ और चट्टानों का एक बड़ा हिस्सा गिरने से नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो गया था। इसके पीछे बड़ी मात्रा में पानी जमा होता गया और बाद में यह प्राकृतिक अवरोध अचानक टूट गया।

अवरोध टूटने के बाद जमा पानी तेज गति से निचले क्षेत्रों की ओर आया और फ्लैश फ्लड जैसी स्थिति पैदा हो गई। वैज्ञानिक ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) की संभावना की भी जांच कर रहे हैं। घटना के समय रसुवा क्षेत्र में तेज बारिश नहीं होने के कारण अचानक आए इतने बड़े जलप्रवाह के पीछे अन्य प्राकृतिक कारणों की भी पड़ताल की जा रही है।

बाढ़ और भूकंप के संभावित संबंध को लेकर भी जांच की जा रही है। जानकारी के मुताबिक, बुधवार सुबह करीब 8:37 बजे क्षेत्र में 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। इसके आसपास के समय में ही बाढ़ आने की बात सामने आई है। अधिकारी यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या भूकंप के कारण पहाड़ से बर्फ और चट्टानें गिरने तथा नदी का रास्ता बाधित होने जैसी स्थिति बनी थी।

नेपाली अधिकारियों ने एक और संभावित खतरे को लेकर चेतावनी दी है। अधिकारियों के मुताबिक, प्रभावित क्षेत्र में अभी भी करीब सात मीटर ऊंचा पानी का प्राकृतिक बांध मौजूद होने की जानकारी है। यदि यह टूटता है तो एक बार फिर तेज बाढ़ आने का खतरा पैदा हो सकता है।

इस आशंका को देखते हुए नदी के निचले हिस्सों और प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा गया है। प्रशासन संभावित खतरे वाले क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।

लापता भारतीय नागरिकों को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, 133 भारतीय नागरिकों का पता नहीं चल रहा है। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा की ओर जा रहे यात्रियों के शामिल होने की बात कही गई है। विदेशी पर्यटकों समेत अन्य लापता लोगों की तलाश के लिए खोज और बचाव अभियान चलाया जा रहा है।

फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है। प्रशासन की प्राथमिकता लापता लोगों का पता लगाने, प्रभावित नागरिकों को सुरक्षित निकालने और संभावित दूसरी बाढ़ से होने वाले नुकसान को रोकने पर है। वहीं वैज्ञानिक इस विनाशकारी बाढ़ के वास्तविक कारणों का पता लगाने में जुटे हुए हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here