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  • Tata Chemicals Kenya: केन्या में टाटा केमिकल्स पर बड़ा एक्शन, राष्ट्रपति रुटो बोले- अब कारोबार समेटने का वक्त

    Tata Chemicals Kenya: केन्या में टाटा केमिकल्स पर बड़ा एक्शन, राष्ट्रपति रुटो बोले- अब कारोबार समेटने का वक्त

    Tata Chemicals Kenya: केन्या में टाटा केमिकल्स पर बड़ा एक्शन, राष्ट्रपति रुटो बोले- अब कारोबार समेटने का वक्त

    केन्या में करीब एक सदी से कारोबार कर रही टाटा समूह से जुड़ी कंपनी टाटा केमिकल्स मगाडी के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। राष्ट्रपति विलियम रुटो ने कंपनी के कामकाज पर नाराजगी जाहिर करते हुए उसे अपना संचालन समेटने के लिए कहे जाने की बात कही है। रुटो का आरोप है कि लेक मगाडी क्षेत्र में लंबे समय तक खनन और उत्पादन गतिविधियां चलाने के बावजूद कंपनी ने उस स्तर का निवेश नहीं किया, जिसकी देश को उम्मीद थी। अब केन्या सरकार इस क्षेत्र में नए निवेशकों को मौका देने की तैयारी कर रही है।

    टाटा केमिकल्स मगाडी और केन्या सरकार के बीच विवाद अचानक सामने नहीं आया है। इससे पहले 28 जुलाई को कंपनी की खनन गतिविधियों को निलंबित कर दिया गया था। अधिकारियों की ओर से इसके पीछे खनन से जुड़े नियमों के कथित उल्लंघन का मुद्दा उठाया गया। वहीं कंपनी ने इन आरोपों के बीच अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि अधिकारियों द्वारा मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराए जा चुके हैं और उसकी ओर से जरूरी नियमों का पालन किया गया है।

    अब राष्ट्रपति विलियम रुटो के बयान के बाद मामला और गंभीर हो गया है। काजियाडो काउंटी में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने लेक मगाडी में चल रहे टाटा केमिकल्स के संचालन का जिक्र किया। उनका कहना था कि किसी कंपनी को इतने लंबे समय तक किसी देश के प्राकृतिक संसाधनों के साथ काम करने का अवसर मिलने पर वहां बड़े स्तर पर निवेश और स्थानीय विकास दिखाई देना चाहिए।

    रुटो ने कंपनी के करीब 100 वर्षों के संचालन पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस अवधि में अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए। उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह भी बताया कि कंपनी को अपना संचालन समेटने के लिए कहा जा चुका है। उनके बयान से संकेत मिलता है कि केन्या सरकार अब लेक मगाडी में खनन और सोडा ऐश उत्पादन की मौजूदा व्यवस्था को बड़े स्तर पर बदलने की तैयारी में है।

    केन्या सरकार का जोर केवल कंपनी बदलने पर नहीं, बल्कि पूरे कारोबारी मॉडल को नए तरीके से विकसित करने पर है। सरकार चाहती है कि देश में मौजूद खनिज संसाधनों का अधिक आर्थिक लाभ केन्या और वहां रहने वाले लोगों को मिले। इसके लिए खनन के साथ-साथ खनिजों की प्रोसेसिंग और उनसे तैयार होने वाले उत्पादों पर भी देश के भीतर अधिक काम करने की योजना है।

    राष्ट्रपति के मुताबिक सरकार ने टाटा केमिकल्स मगाडी की जगह संभावित रूप से काम करने वाले नए निवेशकों की पहचान की है। लेक मगाडी क्षेत्र में दो नई कंपनियों को लाने की योजना पर काम किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि प्रतिस्पर्धा और नए निवेश से क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ाई जा सकती हैं।

    नई व्यवस्था में स्थानीय रोजगार को भी प्रमुखता दिए जाने की बात कही गई है। सरकार चाहती है कि खनिज संसाधनों से होने वाली कमाई का प्रभाव आसपास रहने वाले लोगों के जीवन और रोजगार पर भी दिखाई दे। इसके लिए नए निवेशकों से अधिक पूंजी लगाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करने की अपेक्षा की जा रही है।

    लेक मगाडी केन्या के लिए औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इलाका है। यहां प्राकृतिक रूप से मिलने वाले सोडा ऐश का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। टाटा केमिकल्स मगाडी का प्लांट राजधानी नैरोबी से करीब 120 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है और लंबे समय से इस क्षेत्र की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों में शामिल रहा है।

    कंपनी का वार्षिक सोडा ऐश उत्पादन 3.5 लाख टन से अधिक बताया जाता है। उत्पादन का बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। भारत के अलावा दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीकी देशों में भी लेक मगाडी से तैयार सोडा ऐश भेजा जाता है। इस कारण कंपनी का संचालन केवल केन्या ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।

    सोडा ऐश कई उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण कच्चा माल है। इसका उपयोग कांच बनाने से लेकर डिटर्जेंट और दूसरे रासायनिक उत्पादों तक में होता है। यही वजह है कि लेक मगाडी के संसाधनों को लेकर केन्या सरकार अब अधिक आर्थिक मूल्य हासिल करने पर जोर दे रही है।

    राष्ट्रपति रुटो का रुख यह संकेत देता है कि सरकार केवल खनिज निकालकर उसे बाहर भेजने वाले मॉडल से संतुष्ट नहीं है। उसकी कोशिश खनिजों की प्रोसेसिंग और मूल्यवर्धन का बड़ा हिस्सा देश के भीतर करने की है। ऐसा होने पर सरकार को उम्मीद है कि नए उद्योग विकसित होंगे और अतिरिक्त रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकेंगे।

    हालांकि पूरे विवाद में टाटा केमिकल्स का पक्ष सरकार से अलग है। कंपनी ने नियमों का उल्लंघन किए जाने के आरोपों के बीच कहा है कि आवश्यक दस्तावेज संबंधित अधिकारियों को सौंपे जा चुके हैं। कंपनी का दावा है कि उसने लागू नियमों और नियामकीय प्रक्रियाओं का पालन किया है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकारी कार्रवाई और कंपनी की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।

    मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू टाटा केमिकल्स मगाडी का केन्या में बेहद लंबा कारोबारी इतिहास भी है। लगभग एक सदी पुराने संचालन में अचानक बड़े बदलाव की स्थिति बनने से कंपनी के कर्मचारियों, स्थानीय अर्थव्यवस्था और सोडा ऐश के निर्यात पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं।

    अगर सरकार मौजूदा कंपनी की जगह दो नए निवेशकों को लाने की योजना पर आगे बढ़ती है तो उसे उत्पादन व्यवस्था के हस्तांतरण से लेकर कर्मचारियों और खनन अधिकारों तक कई पहलुओं पर निर्णय लेना होगा। साथ ही यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण होगा कि बदलाव के दौरान लेक मगाडी में औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित न हों।

    राष्ट्रपति रुटो ने अपने बयान के जरिए यह साफ करने की कोशिश की है कि उनकी सरकार देश के प्राकृतिक संसाधनों से मिलने वाले आर्थिक लाभ को बढ़ाना चाहती है। उनका जोर विदेशी निवेश के साथ स्थानीय प्रसंस्करण, रोजगार और क्षेत्रीय विकास पर है। इसी नीति के तहत लेक मगाडी के संचालन में बदलाव की तैयारी को देखा जा रहा है।

    फिलहाल टाटा केमिकल्स मगाडी के भविष्य को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है। एक तरफ राष्ट्रपति कंपनी को संचालन समेटने के लिए कहे जाने की बात सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं, जबकि दूसरी तरफ कंपनी नियमों का पालन करने का दावा कर रही है। अब आगे की सरकारी और कानूनी प्रक्रिया से तय होगा कि केन्या में टाटा समूह से जुड़ी इस करीब 100 साल पुरानी कारोबारी मौजूदगी का भविष्य क्या होगा।

     

  • PM Modi Tashkent Visit: ताशकंद में पीएम मोदी ने यांगी उज्बेकिस्तान पार्क में अर्पित की पुष्पांजलि, राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव भी रहे साथ

    PM Modi Tashkent Visit: ताशकंद में पीएम मोदी ने यांगी उज्बेकिस्तान पार्क में अर्पित की पुष्पांजलि, राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव भी रहे साथ

    PM Modi Tashkent Visit: ताशकंद में पीएम मोदी ने यांगी उज्बेकिस्तान पार्क में अर्पित की पुष्पांजलि, राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव भी रहे साथ

    ताशकंद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उज्बेकिस्तान की राजकीय यात्रा पर राजधानी ताशकंद पहुंच गए हैं। एयरपोर्ट पर उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेताओं की मुलाकात के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच लगातार मजबूत हो रहे द्विपक्षीय संबंधों की झलक देखने को मिली। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी, व्यापार, निवेश, रक्षा और डिजिटल कनेक्टिविटी समेत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होनी है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ताशकंद स्थित यांगी उज्बेकिस्तान पार्क पहुंचकर पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव भी उनके साथ मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने पार्क में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री मोदी की राजकीय यात्रा के शुरुआती कार्यक्रमों में इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    यांगी उज्बेकिस्तान पार्क उज्बेकिस्तान के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों में शामिल है। इसका उद्घाटन 31 अगस्त 2021 को देश की स्वतंत्रता की 30वीं वर्षगांठ के अवसर पर किया गया था। यह पार्क आधुनिक उज्बेकिस्तान और देश की विकास यात्रा को प्रदर्शित करने वाले प्रमुख स्थलों में गिना जाता है।

    प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के बीच इस यात्रा के दौरान प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता भी प्रस्तावित है। बैठक में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे और भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों के विभिन्न पहलुओं की विस्तार से समीक्षा की जाएगी।

    दोनों नेताओं के बीच होने वाली वार्ता में व्यापार और निवेश प्रमुख मुद्दों में शामिल रहेगा। भारत और उज्बेकिस्तान के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने, दोनों देशों की कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा करने तथा निवेश को बढ़ावा देने के संभावित क्षेत्रों पर विचार किया जाएगा।

    रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर भी दोनों पक्ष चर्चा करेंगे। भारत और उज्बेकिस्तान मध्य एशिया में सुरक्षा और स्थिरता से जुड़े कई मुद्दों पर सहयोग करते रहे हैं। प्रस्तावित बातचीत में मौजूदा सहयोग की समीक्षा के साथ भविष्य में इसे और मजबूत बनाने के तरीकों पर विचार किए जाने की संभावना है।

    डिजिटल कनेक्टिविटी भी दोनों देशों के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बनकर उभरी है। भारत की डिजिटल तकनीक और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े अनुभव को देखते हुए उज्बेकिस्तान के साथ इस क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी। तकनीक आधारित सेवाओं और डिजिटल संपर्क को बढ़ाने के अवसरों पर भी दोनों पक्ष विचार करेंगे।

    ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को विस्तार देना भी बातचीत के एजेंडे में शामिल है। दोनों देशों के बीच पारंपरिक और नए ऊर्जा क्षेत्रों में साझेदारी की संभावनाओं की समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में भी द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर बातचीत होने की उम्मीद है।

    भारत और उज्बेकिस्तान के लोगों के बीच संपर्क को मजबूत करना दोनों देशों के रिश्तों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों की लंबी परंपरा है। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान पर्यटन, शिक्षा, संस्कृति और लोगों के बीच सीधे संपर्क को बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा होगी।

    प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक साझेदारी को अधिक व्यापक और मजबूत बनाना है। दोनों नेता विभिन्न क्षेत्रों में अब तक हुई प्रगति की समीक्षा करने के साथ आने वाले वर्षों के लिए प्राथमिकताएं और साझा एजेंडा तय करने पर विचार करेंगे।

    प्रधानमंत्री मोदी की ताशकंद यात्रा से पहले उज्बेकिस्तान के युवा छात्रों का एक वीडियो भी चर्चा में रहा। प्रधानमंत्री ने शनिवार को अपनी यात्रा के लिए रवाना होने से पहले सोशल मीडिया पर यह वीडियो साझा किया, जिसमें ताशकंद के कई छात्र हिंदी भाषा में उनका स्वागत करते नजर आए।

    वीडियो में उज्बेकिस्तान के छात्रों ने प्रधानमंत्री मोदी की ताशकंद यात्रा को लेकर उत्साह जाहिर किया। प्रधानमंत्री ने छात्रों के हिंदी बोलने और उनके स्वागत के अंदाज की सराहना की। उन्होंने कहा कि उज्बेकिस्तान के युवा मित्रों की ओर से मिले उत्साहपूर्ण स्वागत ने उन्हें खुशी दी है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर वीडियो साझा करते हुए छात्रों के संदेश का उल्लेख किया। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर प्रसन्नता जताई कि उज्बेकिस्तान के विद्यार्थियों ने हिंदी में अपना संदेश दिया और उसे बेहद उत्साह के साथ प्रस्तुत किया।

    वीडियो में ताशकंद के कई छात्र बारी-बारी से प्रधानमंत्री मोदी के लिए अपना संदेश देते नजर आए। उन्होंने भारत की संस्कृति में अपनी रुचि और भारत-उज्बेकिस्तान के पुराने संबंधों का उल्लेख किया। छात्रों के हिंदी में दिए गए संदेश ने दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव को भी सामने रखा।

    एक छात्र ने अपना परिचय समंदर के रूप में देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ताशकंद में स्वागत किया। छात्र ने कहा कि ताशकंद के विद्यार्थी प्रधानमंत्री की यात्रा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। दूसरे छात्रों ने भी इसी तरह प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर अपना उत्साह व्यक्त किया।

    छात्रों ने अपने संदेशों में कहा कि वे प्रधानमंत्री मोदी के ताशकंद आने को लेकर उत्साहित हैं और उनके स्वागत के लिए तैयार हैं। कुछ छात्रों ने भारत और उज्बेकिस्तान के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक रिश्तों का भी उल्लेख किया।

    प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत की मध्य एशिया के देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने की नीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उज्बेकिस्तान मध्य एशिया में भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार है और दोनों देश रणनीतिक साझेदारी के तहत कई क्षेत्रों में सहयोग कर रहे हैं।

    इस यात्रा के दौरान होने वाली उच्चस्तरीय बातचीत में मौजूदा सहयोग की समीक्षा के साथ नई संभावनाओं की पहचान किए जाने की उम्मीद है। व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, डिजिटल तकनीक और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाकर दोनों देश अपनी रणनीतिक साझेदारी को नया विस्तार देने की दिशा में काम करेंगे।

    ताशकंद पहुंचने पर राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव की ओर से प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत और इसके बाद यांगी उज्बेकिस्तान पार्क में दोनों नेताओं की मौजूदगी ने यात्रा की औपचारिक शुरुआत को रेखांकित किया। अब नजर दोनों नेताओं की प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता और उसमें तय होने वाले भविष्य के साझा एजेंडे पर रहेगी।

  • Mohan Bhagwat US Visit: न्यूयॉर्क कार्यक्रम से पहले आयोजक AHEAD Forum का X अकाउंट सस्पेंड, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उठे सवाल

    Mohan Bhagwat US Visit: न्यूयॉर्क कार्यक्रम से पहले आयोजक AHEAD Forum का X अकाउंट सस्पेंड, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उठे सवाल

    Mohan Bhagwat US Visit: न्यूयॉर्क कार्यक्रम से पहले आयोजक AHEAD Forum का X अकाउंट सस्पेंड, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उठे सवाल

    नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क में भारतीय समुदाय को संबोधित करने से कुछ दिन पहले कार्यक्रम के आयोजक ‘American Hindus for Engagement and Dialogue’ (AHEAD Forum) का X अकाउंट सस्पेंड कर दिया गया है। AHEAD Forum ने अकाउंट बहाल करने की अपील की है। संगठन का कहना है कि उसके सोशल मीडिया पोस्ट शांति, एकता, सद्भाव और विभिन्न समुदायों के बीच संवाद पर केंद्रित थे। फिलहाल अकाउंट सस्पेंड किए जाने की वजह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हुई है।

    AHEAD Forum न्यूयॉर्क में 29 अगस्त को होने वाले ‘Universal Oneness Celebration’ कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है। इस कार्यक्रम में RSS प्रमुख मोहन भागवत के संबोधन का कार्यक्रम है। आयोजन मैडिसन स्क्वायर गार्डन के इन्फोसिस थिएटर में होना है और इसे भारतीय तथा हिंदू-अमेरिकी समुदाय के एक बड़े कार्यक्रम के तौर पर पेश किया जा रहा है।

    कार्यक्रम से ठीक पहले आयोजक संगठन का X अकाउंट सस्पेंड होने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, अकाउंट किस खास पोस्ट या गतिविधि के कारण सस्पेंड हुआ, इसे लेकर X की तरफ से सार्वजनिक तौर पर कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है।

    अकाउंट सस्पेंड होने के बाद AHEAD Forum ने इसे बहाल करने की मांग की है। संगठन का दावा है कि उसके द्वारा किया गया कम्युनिकेशन X की नीतियों के अनुरूप था और उसके पोस्ट में ऐसी सामग्री नहीं थी, जिसे नियमों का उल्लंघन माना जाए।

    AHEAD Forum ने न्यूयॉर्क में होने वाले कार्यक्रम को एकता, आपसी समझ, सद्भाव और अलग-अलग धर्मों तथा समुदायों के बीच संवाद पर केंद्रित रक्षाबंधन उत्सव के रूप में पेश किया है। संगठन का कहना है कि कार्यक्रम का उद्देश्य अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों को एक मंच पर लाना है।

    AHEAD के अनुसार, 200 से ज्यादा हिंदू-अमेरिकी संगठन इस बहु-सांस्कृतिक और अंतर-धार्मिक आयोजन का समर्थन कर रहे हैं। संगठन का कहना है कि उसके सोशल मीडिया संदेशों का मुख्य विषय सार्वभौमिक शांति, एकता और सद्भाव रहा है।

    हालांकि AHEAD Forum के अकाउंट का सस्पेंशन ऐसे समय हुआ है, जब मोहन भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विवाद भी सामने आया है। कार्यक्रम का विरोध करने वाले कुछ समूह RSS और मोहन भागवत को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

    आयोजक के X अकाउंट के सस्पेंशन और कार्यक्रम को लेकर चल रहे विरोध के बीच किसी सीधे संबंध की फिलहाल पुष्टि नहीं हुई है। सार्वजनिक रूप से ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है, जिससे यह स्थापित हो कि कार्यक्रम से जुड़े विवाद के कारण ही AHEAD Forum का अकाउंट सस्पेंड किया गया।

    इस बीच हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) ने कार्यक्रम से पहले सुरक्षा एडवाइजरी भी जारी की है। संगठन ने कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों से सतर्क रहने, आसपास के हालात पर नजर रखने और किसी भी बातचीत या विरोध की स्थिति में शालीनता बनाए रखने की अपील की है।

    HAF ने न्यूयॉर्क प्रशासन से कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों की सुरक्षा और उनके नागरिक अधिकार सुनिश्चित करने की मांग भी की है। संगठन ने आशंका जताई है कि शनिवार को मैडिसन स्क्वायर गार्डन स्थित इन्फोसिस थिएटर में होने वाले ‘Universal Oneness Celebration’ कार्यक्रम को बाधित करने या इसे रद्द कराने की कोशिश की जा सकती है।

    मोहन भागवत के अमेरिकी दौरे को लेकर विवाद केवल कार्यक्रम के आयोजन तक सीमित नहीं है। धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर अमेरिकी सरकार को सलाह देने वाली अमेरिकी कांग्रेस द्वारा स्थापित संस्था United States Commission on International Religious Freedom (USCIRF) की ओर से भी भागवत की यात्रा पर आपत्ति जताई गई है।

    USCIRF ने ट्रंप प्रशासन से मोहन भागवत को जारी अमेरिकी वीजा रद्द करने की मांग की है। आयोग ने एक बयान में भागवत की अमेरिका यात्रा को लेकर चिंता जताई और RSS से जुड़े संगठनों पर धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा से संबंधित आरोप लगाए हैं। ये आयोग की ओर से लगाए गए आरोप हैं।

    USCIRF के अध्यक्ष आसिफ महमूद ने अमेरिकी सरकार से धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघन के लिए जिम्मेदार माने जाने वाले लोगों के खिलाफ लक्षित प्रतिबंधों पर विचार करने का आग्रह किया है। आयोग की ओर से भागवत का वीजा रद्द करने की मांग को भी इसी संदर्भ में रखा गया है।

    RSS प्रमुख मोहन भागवत तीन देशों की यात्रा के तहत अमेरिका पहुंचे हैं। न्यूयॉर्क में उनका कार्यक्रम ऐसे समय हो रहा है जब RSS को लेकर अमेरिका में समर्थक और आलोचक दोनों सक्रिय हैं। एक तरफ आयोजक इसे विभिन्न समुदायों के बीच संवाद और एकता से जोड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ समूह कार्यक्रम और भागवत की यात्रा का विरोध कर रहे हैं।

    इसी माहौल के बीच AHEAD Forum का X अकाउंट सस्पेंड होने से नया विवाद पैदा हो गया है। आयोजक संगठन ने अकाउंट बहाल करने की मांग की है और दावा किया है कि उसके संदेश X की नीतियों के अनुरूप थे।

    फिलहाल यह स्पष्ट होना बाकी है कि AHEAD Forum का अकाउंट किस वजह से सस्पेंड किया गया और क्या X की ओर से संगठन की अपील पर इसे बहाल किया जाएगा। दूसरी ओर 29 अगस्त को प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर आयोजकों और सुरक्षा से जुड़े संगठनों की तैयारियां जारी हैं।

  • Nepal Flood: नेपाल बाढ़ में 359 की मौत, 285 भारतीयों से संपर्क नहीं; भारतीय नागरिकों की मदद के लिए सरकार ने बनाया कंट्रोल रूम

    Nepal Flood: नेपाल बाढ़ में 359 की मौत, 285 भारतीयों से संपर्क नहीं; भारतीय नागरिकों की मदद के लिए सरकार ने बनाया कंट्रोल रूम

    Nepal Flood: नेपाल बाढ़ में 359 की मौत, 285 भारतीयों से संपर्क नहीं; भारतीय नागरिकों की मदद के लिए सरकार ने बनाया कंट्रोल रूम

    नई दिल्ली। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हालात गंभीर बने हुए हैं। गुरुवार तक बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 359 हो गई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल में फंसे और प्रभावित भारतीय नागरिकों की मदद के लिए भारत के विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में 24 घंटे काम करने वाला कंट्रोल रूम स्थापित किया है। 27 अगस्त शाम 6:45 बजे तक 285 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पाने की जानकारी सामने आई है।

    विदेश मंत्रालय की ओर से नेपाल में मौजूद भारतीय नागरिकों और उनके परिजनों की सहायता के लिए फोन, व्हाट्सऐप और ईमेल के माध्यम से संपर्क की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा काठमांडू और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावासों में भी 24 घंटे काम करने वाली हेल्पलाइन शुरू की गई हैं। इन व्यवस्थाओं के जरिए प्रभावित भारतीयों के बारे में जानकारी जुटाने और जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

    नेपाल में आई बाढ़ के बाद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। प्रभावित इलाकों में संचार और सड़क संपर्क बाधित होने के कारण कई लोगों से संपर्क स्थापित करने में परेशानी आ रही है। ऐसे में जिन भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है, उनके बारे में स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की मदद से जानकारी जुटाई जा रही है।

    इस बीच राहत एवं बचाव अभियान के दौरान कुछ भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने में सफलता मिली है। जानकारी के मुताबिक, त्रिशूली-1 परियोजना से जुड़े 33 कर्मचारियों को बचाया गया है। इसके अलावा तमिलनाडु के 21 लोगों को भी सुरक्षित निकाल लिया गया है। इन लोगों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

    भारत सरकार की ओर से स्थापित कंट्रोल रूम नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों, उनके परिवारों और संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करने का काम कर रहा है। जिन परिवारों का अपने परिजनों से संपर्क नहीं हो पा रहा है, उनसे उपलब्ध जानकारी साझा करने को कहा गया है, ताकि उनकी तलाश में मदद मिल सके।

    नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ से कई जिलों में बड़े पैमाने पर तबाही हुई है। गुरुवार तक मृतकों की संख्या बढ़कर 359 हो गई। पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में लगातार खोज और बचाव अभियान चला रही हैं। मलबे और बाढ़ प्रभावित इलाकों में लापता लोगों की तलाश की जा रही है।

    सबसे अधिक शव चितवन और नवलपरासी ईस्ट से बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन इलाकों में बाढ़ के कारण कई स्थानों पर भारी नुकसान हुआ है। प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों को सुरक्षित निकालने और राहत सामग्री उपलब्ध कराने में जुटी हुई हैं।

    नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने गुरुवार को बाढ़ प्रभावित नुवाकोट जिले का दौरा किया। उन्होंने वहां चल रहे खोज और बचाव अभियान की समीक्षा की तथा अधिकारियों से मौजूदा हालात के बारे में जानकारी ली। प्रधानमंत्री ने राहत कार्यों की प्रगति और प्रभावित लोगों के लिए की जा रही व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया।

    नुवाकोट पहुंचने के बाद बालेन शाह ने बट्टार बाजार स्थित सेना प्रशिक्षण केंद्र में अधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा की। उन्हें बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों, लापता लोगों की तलाश, बचाव अभियान और राहत कार्यों के बारे में जानकारी दी गई।

    नुवाकोट जिले के देवीघाट इलाके में बाढ़ से बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। कई सड़कें और मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं। बाढ़ के कारण कुछ परिवारों के घर पूरी तरह तबाह हो जाने से उनके सामने रहने और भोजन की समस्या खड़ी हो गई है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में अब भी कुछ लोगों का पता नहीं चल पाया है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां उनकी तलाश में अभियान चला रही हैं। प्रभावित इलाकों में बुनियादी सुविधाओं को बहाल करने और बेघर हुए लोगों के लिए अस्थायी व्यवस्था करने की कोशिश भी की जा रही है।

    देवीघाट के निवासी जनक बहादुर नेपाली ने बताया कि बाढ़ में उनका घर पूरी तरह तबाह हो गया। उनके मुताबिक, आपदा के बाद प्रभावित परिवारों को भोजन और रहने की व्यवस्था में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ से घर और जरूरी सामान गंवा चुके लोगों को तत्काल राहत की आवश्यकता है।

    कई स्थानों पर सड़क संपर्क प्रभावित होने के कारण राहत एवं बचाव दलों के सामने भी चुनौतियां हैं। बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे के कारण कुछ इलाकों तक पहुंचने में समय लग रहा है। इसके बावजूद पुलिस, सेना और राहत एजेंसियों की टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चला रही हैं।

    नेपाल में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भारत सरकार के लिए भी बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है। विदेश मंत्रालय की ओर से नई दिल्ली में कंट्रोल रूम स्थापित करने के साथ काठमांडू और बीजिंग स्थित भारतीय मिशनों को भी सक्रिय किया गया है। भारतीय नागरिकों से संपर्क स्थापित करने और उनके बारे में जानकारी जुटाने का काम जारी है।

    फिलहाल 285 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पाने की जानकारी है। हालांकि संपर्क न हो पाने का अर्थ उनके हताहत होने की पुष्टि नहीं है। प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क, बिजली और सड़क संपर्क बाधित होने जैसी परिस्थितियों के कारण भी लोगों से संपर्क स्थापित करने में परेशानी हो सकती है। अधिकारियों की ओर से उनकी स्थिति का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

    नेपाल में बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। मृतकों की संख्या 359 तक पहुंचने और बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के बीच नेपाल सरकार के सामने प्रभावित लोगों तक जल्द से जल्द राहत पहुंचाने की बड़ी चुनौती है। वहीं भारत सरकार अपने नागरिकों की जानकारी जुटाने, उन्हें सुरक्षित निकालने और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए नेपाल के अधिकारियों के साथ समन्वय कर रही है।

  • India Nepal Relations: भारत से मदद का हाथ पाकर भावुक हुए नेपाली PM बालेन शाह, प्रधानमंत्री मोदी का जताया आभार

    India Nepal Relations: भारत से मदद का हाथ पाकर भावुक हुए नेपाली PM बालेन शाह, प्रधानमंत्री मोदी का जताया आभार

    India Nepal Relations: भारत से मदद का हाथ पाकर भावुक हुए नेपाली PM बालेन शाह, प्रधानमंत्री मोदी का जताया आभार

    काठमांडू। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बीच भारत ने पड़ोसी देश की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बातचीत कर बाढ़ से हुई जान-माल की हानि पर गहरी संवेदना व्यक्त की और संकट की इस घड़ी में हर संभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। भारत की ओर से मिले समर्थन पर नेपाली प्रधानमंत्री बालेन शाह ने प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताते हुए दोनों देशों के बीच मजबूत दोस्ती का उल्लेख किया है।

    नेपाल में अचानक आई बाढ़ के कारण बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है। इस प्राकृतिक आपदा के बाद भारत ने नेपाल के साथ एकजुटता व्यक्त की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाली प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बातचीत के दौरान कहा कि भारत के लोग इस मुश्किल समय में नेपाल के अपने भाई-बहनों के साथ मजबूती से खड़े हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल को आवश्यकता के अनुसार हर संभव मानवीय सहायता देने की भारत की प्रतिबद्धता भी दोहराई। उन्होंने बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और प्रभावित लोगों के लिए भारत की ओर से सहयोग का भरोसा दिया।

    प्रधानमंत्री मोदी की बातचीत और सहायता की पेशकश पर नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने उनका धन्यवाद किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी के संदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए फोन कॉल, संवेदनाओं और नेपाल के प्रति दिखाई गई एकजुटता के लिए आभार जताया।

    बालेन शाह ने अपने संदेश में कहा कि नेपाल इस मुश्किल समय में भारत की ओर से मिले एकजुटता के शब्दों और मदद की उदार पेशकश की सराहना करता है। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में दिखाई गई एकता दोनों देशों के बीच दोस्ती के मजबूत रिश्तों को दर्शाती है और नेपाल इन संबंधों को बहुत महत्व देता है।

    भारत की ओर से नेपाल के लिए राहत सामग्री भेजने की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। बाढ़ से बड़े पैमाने पर हुई तबाही को देखते हुए भारत ने बुधवार रात सैन्य परिवहन विमान के जरिए राहत सामग्री की पहली खेप नेपाल भेजी। यह सहायता दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच हुई बातचीत के कुछ घंटे बाद भेजी गई।

    नेपाल में राहत एवं बचाव अभियान के बीच भारत की ओर से तत्काल सहायता की पेशकश पर वहां की सत्ताधारी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। पार्टी के प्रवक्ता जगदीश खरेल ने भारत की चिंता और सहयोग की भावना के लिए आभार जताया।

    खरेल ने कहा कि नेपाल और सत्तारूढ़ RSP की ओर से भारत के लोगों, भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बाढ़ की स्थिति पर सहानुभूति व्यक्त करने के लिए धन्यवाद दिया जाता है। उन्होंने भारत की ओर से सामने आई मदद की इच्छा को दोनों देशों के बीच करीबी संबंधों का उदाहरण बताया।

    हालांकि नेपाल सरकार अभी इस बात का आकलन कर रही है कि मौजूदा आपदा से निपटने के लिए कितनी अंतरराष्ट्रीय सहायता की आवश्यकता होगी। खरेल के मुताबिक, नेपाल का विदेश मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय और सत्तारूढ़ पार्टी का कार्यालय शुरुआती स्तर पर स्थिति का आकलन कर रहे हैं।

    इस आकलन के जरिए यह तय किया जाएगा कि नेपाल को अंतरराष्ट्रीय सहायता की आवश्यकता है या नहीं और यदि है तो किस प्रकार तथा कितनी मात्रा में सहायता की जरूरत होगी। नेपाल सरकार की ओर से इस संबंध में जल्द निर्णय लिए जाने की उम्मीद है।

    जगदीश खरेल ने यह भी कहा कि भारत और अन्य पड़ोसी देशों की ओर से मिलने वाला सहयोग नेपाल के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने वर्ष 2015 में नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी पड़ोसी देशों की सहायता का महत्व सामने आया था।

    नेपाल में आई मौजूदा बाढ़ ने कई क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई है। तिब्बत से लगी सीमा के पास अचानक आई बाढ़ में कम से कम 100 लोगों की मौत की खबर सामने आई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। बाढ़ के कारण सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है।

    आपदा के बाद राहत और बचाव अभियान जारी है। प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने और लापता लोगों का पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। कई क्षेत्रों में सड़क संपर्क प्रभावित होने के कारण राहत कार्यों में भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

    ऐसे समय में भारत की ओर से राहत सामग्री की पहली खेप भेजे जाने को दोनों देशों के पुराने मानवीय और रणनीतिक संबंधों से जोड़कर देखा जा रहा है। भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा के साथ ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध रहे हैं। प्राकृतिक आपदाओं के समय दोनों देश पहले भी एक-दूसरे को सहयोग देते रहे हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी की ओर से हर संभव सहायता का भरोसा दिए जाने और नेपाली प्रधानमंत्री बालेन शाह की ओर से सार्वजनिक रूप से आभार जताए जाने के बाद दोनों देशों के बीच सहयोग का संदेश सामने आया है। नेपाल सरकार अब आपदा से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन कर रही है, जिसके आधार पर आगे आवश्यक अंतरराष्ट्रीय सहायता को लेकर फैसला लिया जाएगा।

    फिलहाल भारत ने राहत सामग्री भेजकर नेपाल के लिए मानवीय सहायता की शुरुआत कर दी है। नेपाल में बचाव और राहत अभियान जारी रहने के बीच दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई बातचीत ने यह संदेश दिया है कि गंभीर प्राकृतिक आपदा की इस घड़ी में भारत नेपाल के साथ खड़ा है।

  • Nepal Flood: नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से भारी तबाही, करीब 100 लोगों की मौत; 1000 से ज्यादा लापता, 133 भारतीयों का भी पता नहीं

    Nepal Flood: नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से भारी तबाही, करीब 100 लोगों की मौत; 1000 से ज्यादा लापता, 133 भारतीयों का भी पता नहीं

    Nepal Flood: नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से भारी तबाही, करीब 100 लोगों की मौत; 1000 से ज्यादा लापता, 133 भारतीयों का भी पता नहीं

    काठमांडू। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बुधवार सुबह अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल के रसुवा जिले और आसपास के इलाकों में भारी तबाही मचा दी। तिब्बत की दिशा से भोटेकोशी नदी में अचानक आए तेज बहाव ने कई बस्तियों, सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे को अपनी चपेट में ले लिया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, करीब 100 लोगों की मौत की खबर है, जबकि 1000 से अधिक लोगों का पता नहीं चल रहा है। लापता लोगों में 133 भारतीयों समेत 300 से अधिक विदेशी पर्यटकों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है।

    नेपाल पुलिस के मुताबिक, अब तक 95 लोगों की मौत की सूचना मिली है। वहीं नेपाल के पर्यटन विभाग के अनुसार, 1000 से ज्यादा लोगों का पता नहीं चल रहा है। इनमें 133 भारतीय नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा की ओर जा रहे थे।

    बाढ़ बुधवार सुबह करीब नौ बजे आई। बताया जा रहा है कि तिब्बत की दिशा से भोटेकोशी नदी में अचानक पानी का स्तर तेजी से बढ़ा और कुछ ही समय में तेज बहाव ने नदी किनारे स्थित कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। पानी की रफ्तार इतनी तेज थी कि कई स्थानों पर सड़कें, पुल और अन्य ढांचे क्षतिग्रस्त हो गए।

    रसुवा जिले के टिमुरे, स्याफ्रुबेसी, हाकुबेसी, मेलुंग, सल्लेटार, शांतिबाजार, पैरेबेसी, खाल्टी बस्ती और बेत्रावती समेत करीब एक दर्जन बस्तियों पर बाढ़ का असर पड़ा है। कई स्थानों पर सड़क संपर्क टूटने के कारण राहत और बचाव कार्य भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।

    आपदा का प्रभाव रसुवा तक सीमित नहीं रहा। बाढ़ का पानी नुवाकोट और धादिंग की तरफ बढ़ा तथा इसका असर चितवन तक देखे जाने की जानकारी सामने आई है। धादिंग के गल्छी क्षेत्र तक बाढ़ का पानी पहुंचने के बाद आगे मुग्लिन की दिशा में भी सतर्कता बरतने की चेतावनी दी गई है।

    बाढ़ के कारण सड़क संपर्क को भी भारी नुकसान पहुंचा है। बेत्रावती से रसुवागढ़ी-तिब्बत सीमा तक करीब 42 किलोमीटर लंबी सड़क के बड़े हिस्से के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी है। इसके अलावा स्याफ्रुबेसी से सीमा तक लगभग 16 किलोमीटर सड़क को भी नुकसान पहुंचा है।

    बाढ़ की वास्तविक वजह का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक और प्रशासनिक स्तर पर जांच की जा रही है। शुरुआती आकलन में आशंका जताई गई है कि ल्हेंदे नदी में बर्फ और चट्टानों का एक बड़ा हिस्सा गिरने से नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो गया था। इसके पीछे बड़ी मात्रा में पानी जमा होता गया और बाद में यह प्राकृतिक अवरोध अचानक टूट गया।

    अवरोध टूटने के बाद जमा पानी तेज गति से निचले क्षेत्रों की ओर आया और फ्लैश फ्लड जैसी स्थिति पैदा हो गई। वैज्ञानिक ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) की संभावना की भी जांच कर रहे हैं। घटना के समय रसुवा क्षेत्र में तेज बारिश नहीं होने के कारण अचानक आए इतने बड़े जलप्रवाह के पीछे अन्य प्राकृतिक कारणों की भी पड़ताल की जा रही है।

    बाढ़ और भूकंप के संभावित संबंध को लेकर भी जांच की जा रही है। जानकारी के मुताबिक, बुधवार सुबह करीब 8:37 बजे क्षेत्र में 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। इसके आसपास के समय में ही बाढ़ आने की बात सामने आई है। अधिकारी यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या भूकंप के कारण पहाड़ से बर्फ और चट्टानें गिरने तथा नदी का रास्ता बाधित होने जैसी स्थिति बनी थी।

    नेपाली अधिकारियों ने एक और संभावित खतरे को लेकर चेतावनी दी है। अधिकारियों के मुताबिक, प्रभावित क्षेत्र में अभी भी करीब सात मीटर ऊंचा पानी का प्राकृतिक बांध मौजूद होने की जानकारी है। यदि यह टूटता है तो एक बार फिर तेज बाढ़ आने का खतरा पैदा हो सकता है।

    इस आशंका को देखते हुए नदी के निचले हिस्सों और प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा गया है। प्रशासन संभावित खतरे वाले क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।

    लापता भारतीय नागरिकों को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, 133 भारतीय नागरिकों का पता नहीं चल रहा है। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा की ओर जा रहे यात्रियों के शामिल होने की बात कही गई है। विदेशी पर्यटकों समेत अन्य लापता लोगों की तलाश के लिए खोज और बचाव अभियान चलाया जा रहा है।

    फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है। प्रशासन की प्राथमिकता लापता लोगों का पता लगाने, प्रभावित नागरिकों को सुरक्षित निकालने और संभावित दूसरी बाढ़ से होने वाले नुकसान को रोकने पर है। वहीं वैज्ञानिक इस विनाशकारी बाढ़ के वास्तविक कारणों का पता लगाने में जुटे हुए हैं।

  • India-Russia Relations: पीएम मोदी की वजह से भारत-रूस व्यापार में बढ़ोतरी, पुतिन ने की तारीफ; जल्द मुलाकात की जताई उम्मीद

    India-Russia Relations: पीएम मोदी की वजह से भारत-रूस व्यापार में बढ़ोतरी, पुतिन ने की तारीफ; जल्द मुलाकात की जताई उम्मीद

    India-Russia Relations: पीएम मोदी की वजह से भारत-रूस व्यापार में बढ़ोतरी, पुतिन ने की तारीफ; जल्द मुलाकात की जताई उम्मीद

    मॉस्को। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत और रूस के बीच बढ़ते व्यापार और मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की है। पुतिन ने कहा कि इस साल दोनों देशों के बीच व्यापार में बढ़ोतरी हुई है और इसके पीछे प्रधानमंत्री मोदी द्वारा भारत-रूस संबंधों के विकास पर दिया जा रहा व्यक्तिगत ध्यान एक महत्वपूर्ण कारण है।

    राष्ट्रपति पुतिन ने सोमवार को मॉस्को में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात के दौरान दोनों देशों के संबंधों पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने भारत और रूस की रणनीतिक साझेदारी की मजबूती का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों का सहयोग केवल व्यापार तक सीमित नहीं है।

    पुतिन के मुताबिक, भारत और रूस सरकार, संसद, व्यापार, अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, कृषि और तकनीक समेत कई स्तरों पर मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष द्विपक्षीय व्यापार में कुछ गिरावट देखने को मिली थी, लेकिन इस वर्ष एक बार फिर इसमें बढ़ोतरी हो रही है।

    पुतिन ने इस बढ़ोतरी का श्रेय काफी हद तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी रूस और भारत के बीच संबंधों को विकसित करने पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान दे रहे हैं और इसका असर दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों पर भी दिखाई दे रहा है।

    रूसी राष्ट्रपति ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से प्रधानमंत्री मोदी को अपनी शुभकामनाएं पहुंचाने के लिए भी कहा। इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही उनकी प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात होगी।

    पुतिन ने संकेत दिया कि दोनों नेताओं की अगली मुलाकात शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO के आगामी शिखर सम्मेलन के दौरान हो सकती है। उन्होंने कहा कि पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक वह SCO के ढांचे के तहत प्रधानमंत्री मोदी से मिलने की उम्मीद कर रहे हैं।

    इसके अलावा रूसी राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि वर्ष के दौरान दोनों नेताओं के बीच एक और मुलाकात की संभावना भी बन सकती है। पुतिन ने कहा कि दोनों देशों के कार्यक्रम को देखते हुए इस साल प्रधानमंत्री मोदी के साथ एक और बैठक संभव हो सकती है।

    भारत और रूस के बीच लंबे समय से रणनीतिक साझेदारी रही है। बदलते वैश्विक और आर्थिक माहौल के बीच दोनों देश ऊर्जा, रक्षा, व्यापार, कृषि, परमाणु ऊर्जा और तकनीक समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ा रहे हैं।

    जयशंकर के साथ बातचीत के दौरान पुतिन ने रूस के उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव के काम का भी उल्लेख किया। मंटुरोव व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग से संबंधित भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग में रूसी पक्ष का नेतृत्व करते हैं।

    पुतिन ने विदेश मंत्री जयशंकर और डेनिस मंटुरोव द्वारा दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर लगातार काम कर रहे हैं।

    रूस और भारत के बीच ऊर्जा सहयोग भी बातचीत के प्रमुख विषयों में शामिल रहा। पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र दोनों देशों के आर्थिक संबंधों का महत्वपूर्ण आधार बनकर सामने आया है। पुतिन ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा ऊर्जा से कहीं आगे तक फैला हुआ है।

    रूसी राष्ट्रपति ने विशेष रूप से फर्टिलाइजर यानी उर्वरकों की आपूर्ति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि रूस भारतीय किसानों और कृषि क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भारत को उर्वरकों की आपूर्ति बढ़ा रहा है।

    पुतिन ने कहा कि रूस भविष्य में भारत को फर्टिलाइजर की सप्लाई और बढ़ाने के लिए तैयार है। उन्होंने भारतीय कृषि क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने में सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।

    भारत दुनिया के बड़े कृषि उत्पादक देशों में शामिल है और उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता कृषि उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में रूस की ओर से फर्टिलाइजर की आपूर्ति बढ़ाने की पेशकश दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में कृषि क्षेत्र के बढ़ते महत्व को दर्शाती है।

    ऊर्जा और कृषि के अलावा परमाणु ऊर्जा भी भारत-रूस सहयोग का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। पुतिन ने कहा कि दोनों देश न्यूक्लियर एनर्जी से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर मिलकर काम कर रहे हैं और इस क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रगति हो रही है।

    रूसी राष्ट्रपति ने हाई-टेक सेक्टर में भी भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की बात कही। दोनों देशों के एजेंडे में आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक सहयोग से जुड़े कई मुद्दे शामिल हैं।

    जयशंकर की मॉस्को यात्रा ऐसे समय हुई है जब भारत और रूस अपनी पुरानी रणनीतिक साझेदारी को बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच उच्च स्तर पर लगातार बातचीत भी इस साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।

    पुतिन की ओर से प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा और जल्द मुलाकात की उम्मीद जताया जाना दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच जारी संवाद को दर्शाता है। अब निगाहें आगामी SCO शिखर सम्मेलन और दोनों नेताओं की संभावित मुलाकात पर रहेंगी।

  • Hafiz Saeed: हाफिज सईद पर भारत का कानूनी शिकंजा, लाहौर पहुंचेगा NIA कोर्ट का समन; पहलगाम हमले में आगे बढ़ेगी कार्रवाई

    Hafiz Saeed: हाफिज सईद पर भारत का कानूनी शिकंजा, लाहौर पहुंचेगा NIA कोर्ट का समन; पहलगाम हमले में आगे बढ़ेगी कार्रवाई

    Hafiz Saeed: हाफिज सईद पर भारत का कानूनी शिकंजा, लाहौर पहुंचेगा NIA कोर्ट का समन; पहलगाम हमले में आगे बढ़ेगी कार्रवाई

    नई दिल्ली। लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज मोहम्मद सईद के खिलाफ भारत ने कानूनी कार्रवाई तेज कर दी है। वर्ष 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के मामले में आरोपी बनाए गए हाफिज सईद को भारतीय अदालत के समक्ष लाने की कानूनी प्रक्रिया के तहत राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अब लाहौर में समन तामील कराने की दिशा में आगे बढ़ रही है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, विशेष NIA अदालत की ओर से जारी प्रक्रिया को विदेश मंत्रालय (MEA) के माध्यम से पाकिस्तान भेजा जाएगा।

    हाफिज सईद पाकिस्तान में मौजूद है और भारत लंबे समय से उसे विभिन्न आतंकी हमलों और भारत विरोधी गतिविधियों के मामलों में वांछित बताता रहा है। अब पहलगाम आतंकी हमले की जांच में भी उसका नाम सामने आने के बाद NIA ने उसके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई है।

    NIA ने जुलाई 2026 में दाखिल अपने पूरक आरोपपत्र में हाफिज सईद को पहलगाम आतंकी हमले की कथित साजिश से जोड़ते हुए आरोपी बनाया था। एजेंसी ने उसे व्यक्तिगत तौर पर आरोपी बनाने के साथ लश्कर-ए-तैयबा और द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) के नेतृत्व से जोड़ते हुए भी आरोप लगाए हैं।

    आरोपपत्र में हाफिज सईद पर भारत के खिलाफ साजिश रचने और युद्ध छेड़ने से संबंधित गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि ये आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं और अदालत में इनका परीक्षण होना बाकी है।

    पूरक आरोपपत्र दाखिल किए जाने के बाद जम्मू की विशेष NIA अदालत ने जुलाई में हाफिज सईद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। इसके बाद अब अदालत के समन को पाकिस्तान में उसके पते तक आधिकारिक रूप से पहुंचाने की प्रक्रिया को महत्वपूर्ण कानूनी कदम माना जा रहा है।

    सरकारी सूत्रों के मुताबिक, समन को सीधे भेजने के बजाय निर्धारित कूटनीतिक प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाएगा। विदेश मंत्रालय के माध्यम से इसे पाकिस्तान भेजे जाने की तैयारी है, ताकि इस पूरी कार्रवाई का औपचारिक और न्यायिक रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।

    इस प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य यह दर्ज करना भी है कि हाफिज सईद को भारतीय अदालत के सामने पेश होकर अपना पक्ष रखने का औपचारिक अवसर दिया गया। यदि समन की तामील के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद वह अदालत के सामने उपस्थित नहीं होता है तो भारतीय कानून के तहत आगे की कार्रवाई का रास्ता तैयार हो सकता है।

    इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू आरोपी की अनुपस्थिति में मुकदमे की संभावित प्रक्रिया है। भारत के नए आपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) में कुछ परिस्थितियों में घोषित अपराधी के खिलाफ उसकी गैरमौजूदगी में भी न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ाने का प्रावधान किया गया है।

    BNSS की धारा 356 के तहत निर्धारित शर्तें पूरी होने पर घोषित अपराधी के खिलाफ उसकी अनुपस्थिति में जांच, सुनवाई और निर्णय से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। हालांकि इसके लिए कानून में निर्धारित कई औपचारिकताओं और शर्तों को पूरा करना जरूरी होता है।

    यही वजह है कि भारतीय एजेंसियां हाफिज सईद के मामले में हर कानूनी कदम को औपचारिक तरीके से पूरा करने पर जोर दे रही हैं। लाहौर में समन की तामील कराने का प्रयास इसी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

    यदि समन की प्रक्रिया पूरी हो जाती है और इसके बावजूद हाफिज सईद भारतीय अदालत में उपस्थित नहीं होता है तो जांच एजेंसियों के पास यह आधिकारिक रिकॉर्ड होगा कि आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर देने के लिए उपलब्ध कानूनी और कूटनीतिक माध्यमों का इस्तेमाल किया गया था।

    इसके बाद अदालत कानून के प्रावधानों और मामले की परिस्थितियों के आधार पर आगे की प्रक्रिया पर निर्णय ले सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि केवल समन भेजे जाने से हाफिज सईद को पाकिस्तान से तत्काल भारत लाया जा सकेगा। गिरफ्तारी, प्रत्यर्पण और अदालत में पेशी की प्रक्रिया अलग कानूनी तथा कूटनीतिक व्यवस्थाओं पर निर्भर करेगी।

    भारत और पाकिस्तान के बीच हाफिज सईद को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है। भारतीय एजेंसियां उसे कई आतंकवादी गतिविधियों और भारत विरोधी साजिशों से जोड़ती रही हैं। दूसरी ओर पाकिस्तान का कहना रहा है कि हाफिज सईद आतंकवाद के वित्तपोषण से जुड़े मामलों में दोषसिद्धि के बाद हिरासत में है।

    पहलगाम आतंकी हमले के मामले में उसके खिलाफ तैयार किए जा रहे न्यायिक रिकॉर्ड का असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत आतंकवाद और आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ अपनी कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूती से रखने के लिए इस तरह के कानूनी रिकॉर्ड को महत्वपूर्ण मानता है।

    विशेष रूप से टेरर फाइनेंसिंग और फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) से संबंधित अंतरराष्ट्रीय विमर्श में आतंकवाद के आरोपियों के खिलाफ की गई कानूनी कार्रवाई और उससे जुड़े दस्तावेज महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

    भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर उसकी जमीन पर मौजूद भारत-विरोधी आतंकी संगठनों और उनके नेतृत्व के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाता रहा है। ऐसे में हाफिज सईद के खिलाफ पहलगाम मामले में शुरू हुई नई कानूनी प्रक्रिया केवल एक आपराधिक मुकदमे तक सीमित न रहकर भारत की आतंकवाद विरोधी कूटनीतिक रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    NIA की कोशिश अब पहलगाम हमले से जुड़े पूरे कथित नेटवर्क और साजिश की कड़ियों को न्यायिक रिकॉर्ड पर लाने की है। हाफिज सईद के खिलाफ लगाए गए आरोपों को भी इसी व्यापक जांच का हिस्सा बताया जा रहा है।

    सरकारी सूत्रों के अनुसार, मौजूदा प्रक्रिया का एक उद्देश्य उन कानूनी बाधाओं को दूर करना भी है जिनका लाभ ऐसे आरोपी उठा सकते हैं जो भारत से बाहर रहकर भारतीय न्यायिक प्रक्रिया से बचते हैं। नए आपराधिक कानूनों में अनुपस्थिति में सुनवाई से जुड़े प्रावधान ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

    फिलहाल हाफिज सईद को पाकिस्तान से भारत लाया जाना प्रत्यर्पण और दोनों देशों के बीच कानूनी-कूटनीतिक सहयोग जैसे कई पहलुओं पर निर्भर करेगा। तत्काल कदम उसके खिलाफ जारी न्यायिक प्रक्रिया और समन को औपचारिक रूप से तामील कराने से जुड़ा है।

    लाहौर में समन पहुंचाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अदालत के सामने उसकी अनुपस्थिति की स्थिति में आगे क्या कदम उठाया जाएगा, यह कानून में निर्धारित प्रक्रिया और विशेष NIA अदालत के आदेश पर निर्भर करेगा। भारत की कोशिश है कि पहलगाम आतंकी हमले से जुड़े मामले में हाफिज सईद के खिलाफ प्रत्येक आवश्यक कानूनी कदम विधिवत रिकॉर्ड पर लाया जाए।

  • Air India Flight: बैंकॉक एयरपोर्ट पर 28 घंटे से फंसे 200 भारतीय, तकनीकी खराबी के बाद उड़ान में देरी

    Air India Flight: बैंकॉक एयरपोर्ट पर 28 घंटे से फंसे 200 भारतीय, तकनीकी खराबी के बाद उड़ान में देरी

    Air India Flight: बैंकॉक एयरपोर्ट पर 28 घंटे से फंसे 200 भारतीय, तकनीकी खराबी के बाद उड़ान में देरी

    थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक के एयरपोर्ट पर एअर इंडिया की फ्लाइट में तकनीकी खराबी के चलते करीब 200 भारतीय यात्री लंबे समय से फंसे हुए हैं। यात्रियों के मुताबिक, गुरुवार शाम भारत लौटने के लिए फ्लाइट में सवार होने के बाद विमान रनवे तक पहुंचा, लेकिन तकनीकी समस्या के कारण उसे वापस लाया गया। इसके बाद यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा।

    यात्रियों ने बताया कि वे गुरुवार शाम करीब 4 बजे बैंकॉक एयरपोर्ट पहुंच गए थे। बैंकॉक से नई दिल्ली के लिए एअर इंडिया की फ्लाइट शाम करीब 5:30 बजे निर्धारित थी। करीब 6 बजे बोर्डिंग हुई और 6:15 बजे विमान रनवे पर पहुंच गया। यात्री उड़ान भरने का इंतजार कर रहे थे, तभी विमान को वापस रनवे पर लाया गया।

    यात्रियों के मुताबिक, केबिन की लाइट चालू होने के बाद उन्होंने क्रू मेंबर्स से विमान को वापस लाने का कारण पूछा। इस पर तकनीकी खराबी का हवाला दिया गया। यात्रियों को विमान में ही रात करीब 8:30 बजे तक बैठाकर रखा गया। इसके बाद उन्हें बताया गया कि फ्लाइट रात 11:15 बजे उड़ान भर सकती है।

    हालांकि, कुछ समय बाद यात्रियों को बताया गया कि उड़ान अगले दिन तक के लिए टाल दी गई है। इसके बाद एअर इंडिया की ओर से यात्रियों के लिए होटल की व्यवस्था की गई और वे रात करीब 12 बजे होटल पहुंचे।

    शुक्रवार को यात्रियों को दोबारा एयरपोर्ट आने के लिए कहा गया। यात्रियों के अनुसार, वे दोपहर करीब 1:30 बजे एयरपोर्ट पहुंच गए और कई घंटे तक उड़ान का इंतजार करते रहे। बाद में उन्हें शाम 7:15 बजे फ्लाइट रवाना होने की जानकारी दी गई, लेकिन 7:15 बजे तक विमान ने उड़ान नहीं भरी। रात करीब 8 बजे बोर्डिंग शुरू होने की बात सामने आई।

    यात्रियों में मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों के लोग शामिल हैं। इंदौर की यात्री दिव्या माहेश्वरी ने बताया कि वह थाईलैंड घूमने गई थीं और बैंकॉक से दिल्ली लौटना था। उन्होंने बताया कि विमान रनवे पर पहुंचने के बाद वापस लौट आया और यात्रियों को तकनीकी खराबी की जानकारी दी गई।

    यात्रियों का आरोप है कि करीब 28 घंटे से वे लगातार इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस दौरान उन्हें बार-बार चेक-इन और चेक-आउट की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। यात्रियों में छोटे बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं। कुछ यात्रियों ने यह भी शिकायत की कि उन्हें एअर इंडिया की ओर से पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई और किसी अन्य फ्लाइट की व्यवस्था नहीं की गई।

    हालांकि, एअर इंडिया की ओर से यात्रियों को भेजे गए ई-मेल में बैंकॉक से नई दिल्ली जाने वाली फ्लाइट AI4335 के शेड्यूल में बदलाव का कारण ‘ऑपरेशनल कारण’ बताया गया है। ई-मेल में तकनीकी खराबी का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया।

    इस बीच कुछ यात्री दूसरी उड़ानों के जरिए भारत लौट चुके हैं। बाकी यात्रियों को फ्लाइट के रवाना होने का इंतजार है। लंबे समय तक एयरपोर्ट पर फंसे रहने के कारण यात्रियों में नाराजगी देखी जा रही है और वे जल्द से जल्द अपने गंतव्य तक पहुंचने की मांग कर रहे हैं।

  • Colombia Earthquake: कोलंबिया में 7.4 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप से भारी तबाही, 47 लोगों की मौत; मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी

    Colombia Earthquake: कोलंबिया में 7.4 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप से भारी तबाही, 47 लोगों की मौत; मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी

    Colombia Earthquake: कोलंबिया में 7.4 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप से भारी तबाही, 47 लोगों की मौत; मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी

    कोलंबिया में आए शक्तिशाली भूकंप ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। यूरोपीय-भूमध्यसागरीय भूकंप विज्ञान केंद्र (EMSC) के अनुसार भूकंप की शुरुआती तीव्रता 7.4 दर्ज की गई और इसका केंद्र जमीन के करीब 115 किलोमीटर की गहराई में था। भूकंप के तेज झटके राजधानी बोगोटा समेत देश के कई हिस्सों में महसूस किए गए। पड़ोसी देश इक्वाडोर तक भी इसके झटके महसूस किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    भूकंप के बाद कई इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। लोग घबराकर अपने घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। पश्चिमी और मध्य कोलंबिया के कई शहरों में इमारतों को नुकसान पहुंचा है। ताजा जानकारी के मुताबिक हादसे में कम से कम 47 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका है। राहत और बचाव दल प्रभावित इलाकों में लगातार अभियान चला रहे हैं।

    पेरेइरा शहर में भारी नुकसान की खबर है। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार यहां 18 लोगों की मौत हुई है। कई इमारतों के ढहने के बाद स्थानीय लोग और बचावकर्मी मलबा हटाकर उसके नीचे फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं।

    मनीजालेस में भी भूकंप ने भारी तबाही मचाई। अधिकारियों के अनुसार यहां दो लोगों की मौत हुई है। शहर में स्थित एक नियो-गॉथिक कैथेड्रल के टावर का हिस्सा ढहकर मुख्य प्रार्थना कक्ष पर गिर गया। शहर के मेयर जॉर्ज एडुआर्डो रोजास ने लोगों से संभावित आफ्टरशॉक्स को देखते हुए सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।

    कोलंबिया के तीसरे सबसे बड़े शहर कैली में भी भूकंप का व्यापक असर देखने को मिला। कई इलाकों में धूल के गुबार उठते दिखाई दिए और कई इमारतों को नुकसान पहुंचा। कैली के मेयर अलेजांद्रो एदेर के अनुसार, शहर में कम से कम 19 ढही हुई इमारतों में लोगों के फंसे होने की सूचना मिली थी। बचाव दल मलबे के नीचे दबे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए अभियान चला रहे हैं।

    कैली के 64 वर्षीय टैक्सी चालक जॉर्ज मोंकायो ने बताया कि उन्होंने पहाड़ी इलाके से शहर में कई इमारतों को गिरते देखा। उनके मुताबिक उनका पूरा घर हिल गया और उन्होंने इससे पहले इतना शक्तिशाली भूकंप महसूस नहीं किया था।

    चोको क्षेत्र में भी भूकंप से नुकसान की खबर सामने आई है। चोको की गवर्नर नुबिया कॉर्डोबा ने बताया कि क्षेत्रीय राजधानी क्विब्दो में कई लोग घायल हुए हैं और कई इमारतों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। हालांकि, उन्होंने अभी घायलों और नुकसान की सटीक संख्या साझा नहीं की है।

    स्थानीय मीडिया में सामने आए वीडियो में पेरेइरा, कैली और क्विब्दो में घरों और छोटी इमारतों को ढहते हुए देखा गया। कई स्थानों पर लोग मलबे को हटाने में जुटे नजर आए। प्रशासन ने संभावित आफ्टरशॉक्स को देखते हुए लोगों को क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहने की सलाह दी है।

    कोलंबिया के मध्य और पश्चिमी हिस्सों में छोटे भूकंप आम हैं, जिन्हें स्थानीय तौर पर ‘टेम्बलोरेस’ कहा जाता है। हालांकि, 6.0 से अधिक तीव्रता वाले भूकंप अपेक्षाकृत कम आते हैं। इससे पहले वर्ष 1999 में आर्मेनिया शहर के पास 6.2 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी और उसमें 1,100 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।

    भूकंप के बाद सरकार ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। कोलंबिया के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति एबेलार्डो दे ला एस्प्रिएला ने कहा कि उन्होंने सैन जोस डेल पालमार में भूकंप के बाद सरकार की आपात प्रतिक्रिया की व्यक्तिगत रूप से कमान संभाल ली है। उन्होंने प्रभावित लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार राहत और बचाव के लिए मौके पर मौजूद है।

    फिलहाल बचाव दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है, क्योंकि कई प्रभावित इलाकों में राहत दल अभी पूरी तरह नहीं पहुंच पाए हैं। अधिकारियों की प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित निकालना और भूकंप के बाद उत्पन्न अन्य खतरों से लोगों को बचाना है।