Naxal Surrender Chhattisgarh: 1 करोड़ का इनामी नक्सली रामधेर मज्जी 11 साथियों सहित आत्मसमर्पण
नक्सलवाद के खिलाफ लंबे समय से जारी युद्ध में भारत के सुरक्षाबलों ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। महाराष्ट्र–मध्यप्रदेश–छत्तीसगढ़ (MMC) ज़ोन को आधिकारिक रूप से नक्सलमुक्त घोषित कर दिया गया है, क्योंकि कुख्यात और मोस्ट वांटेड नक्सली कमांडर रामधेर मज्जी ने अपने 11 हथियारबंद साथियों के साथ छत्तीसगढ़ के बकरकट्टा में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
रामधेर मज्जी जिस पर 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था, नक्सली संगठन की सेंट्रल कमेटी (CCM) का सदस्य था और उसे खूंखार नक्सली नेता हिडमा के बराबर प्रभावशाली माना जाता था। मज्जी का समर्पण नक्सल नेटवर्क के लिए बड़ा झटका है और सुरक्षा बलों के लिए निर्णायक जीत। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आत्मसमर्पण की प्रक्रिया बेहद योजनाबद्ध तरीके से संचालित की गई थी।
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में मज्जी के अलावा तीन डिविजनल वाइस कमांडर (DVCM) और अन्य महत्वपूर्ण कैडर शामिल हैं, जो लंबे समय से सुरक्षाबलों के निशाने पर थे और घने जंगलों में सक्रिय थे। इनके खिलाफ कई बड़ी नक्सली घटनाओं के नेतृत्व करने के गंभीर आरोप हैं।
पुलिस ने बताया कि आत्मसमर्पण के दौरान भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद हुआ, जिसमें AK-47, INSAS राइफल, SLR, .303 राइफल और 30 कार्बाइन गन शामिल हैं। यह पहला मौका है जब किसी रेंज से इतनी भारी मात्रा में घातक हथियार एक साथ सुरक्षा बलों के कब्जे में आए हैं।
सुरक्षाबल अधिकारियों ने कहा कि यह सफलता वर्षों से चल रही इंटेलिजेंस आधारित ऑपरेशन, लगातार दबाव और विकास आधारित नीतियों का परिणाम है। इस आत्मसमर्पण के बाद एमएमसी ज़ोन में नक्सली गतिविधियां पूरी तरह समाप्त मानी जा रही हैं।
स्थानीय नागरिकों और सुरक्षा बलों में खुशी का माहौल है, क्योंकि इस क्षेत्र में नक्सली हिंसा से हजारों लोग प्रभावित रहे हैं। सरकार अब इस क्षेत्र में विकास और पुनर्वास कार्यक्रमों को तेज करने की तैयारी कर रही है।



