Kamal Haasan Rajya Sabha: राज्यसभा में कमल हासन की एंट्री: तमिल में ली शपथ, DMK के साथ मजबूत किया सियासी गठबंधन
मशहूर अभिनेता और मक्कल निधि मय्यम (MNM) पार्टी के प्रमुख कमल हासन ने शुक्रवार को राज्यसभा सांसद के तौर पर शपथ ली, और संसद में अपने राजनीतिक करियर की नई शुरुआत की। संसद भवन में आयोजित एक औपचारिक समारोह में उन्होंने तमिल भाषा में पद और गोपनीयता की शपथ ली। यह उनका संसद में पहला आधिकारिक पद है, जो उनके राजनीतिक जीवन के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है।
कमल हासन की राज्यसभा में यह एंट्री न केवल व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि तमिलनाडु की राजनीतिक समीकरणों को भी नया आयाम देती है। उनकी पार्टी MNM ने मार्च 2024 में डीएमके (DMK) के नेतृत्व वाले सेकुलर प्रोग्रेसिव अलायंस (SPA) के साथ गठबंधन किया था, जिसने हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव 2024 में तमिलनाडु की सभी 39 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
राजनीतिक गठबंधन को मिली मजबूती
कमल हासन की राज्यसभा सदस्यता को 2026 में होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के लिए डीएमके-मएनएम गठबंधन की रणनीति के तहत देखा जा रहा है। यह राजनीतिक साझेदारी राज्य की राजनीति में तीसरे विकल्प के तौर पर MNM की स्थिति को मज़बूत कर सकती है। MNM के इस गठबंधन और राज्यसभा में प्रवेश को एक दीर्घकालिक राजनीतिक प्लान के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
शपथ समारोह के अवसर पर DMK के तीन अन्य सांसद — रजति, एस.आर. शिवलिंगम और पी. विल्सन — ने भी तमिल भाषा में शपथ ली। यह भाषाई और सांस्कृतिक गर्व का भी प्रतीक है, जिसे DMK और MNM जैसे क्षेत्रीय दल जोर-शोर से आगे बढ़ा रहे हैं।
शपथ के बाद कमल हासन का भावुक बयान
शपथ लेने के बाद कमल हासन ने मीडिया से कहा, “मैं बहुत गर्वित और सम्मानित महसूस कर रहा हूं। यह अवसर मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है और मैं पूरी ईमानदारी से अपनी ज़िम्मेदारी निभाऊंगा।” उन्होंने संकेत दिया कि वह संसद में न केवल तमिलनाडु के मुद्दे उठाएंगे, बल्कि देशभर की सांस्कृतिक, सामाजिक और तकनीकी नीतियों में भी सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं।
राजनीतिक सफर की झलक
कमल हासन ने 2018 में MNM पार्टी की स्थापना की थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने 4% वोट हासिल किए और 2021 के विधानसभा चुनाव में भी कुछ क्षेत्रों में अच्छी पकड़ दिखाई। हालांकि, कमल हासन कोयंबटूर साउथ सीट से खुद हार गए थे। 2024 के लोकसभा चुनाव में MNM ने सीधे चुनाव नहीं लड़ा, बल्कि DMK के साथ गठबंधन कर सियासी सूझबूझ का परिचय दिया।



