Iran Israel War: ईरान-इज़राइल संघर्ष: विदेश मंत्रालय समेत सैन्य ठिकानों पर हमला, 224 की मौत, हालात युद्ध की ओर

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Iran Israel War: ईरान-इज़राइल संघर्ष: विदेश मंत्रालय समेत सैन्य ठिकानों पर हमला, 224 की मौत, हालात युद्ध की ओर

तेहरान/यरुशलम, 15 जून 2025 — ईरान और इज़राइल के बीच जारी टकराव अब भीषण युद्ध का रूप लेता जा रहा है। रविवार को इज़राइल ने ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई प्रमुख सैन्य और सरकारी ठिकानों को निशाना बनाकर भारी हवाई हमले किए, जिनमें ईरान के विदेश मंत्रालय, सैन्य मुख्यालय और शाहरान तेल डिपो शामिल थे। इन हमलों में कम से कम 224 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 1277 से अधिक लोग घायल हुए हैं। हालांकि स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि मृतकों की संख्या 400 के पार जा चुकी है।

ईरान के तेल और गैस स्टोरेज टर्मिनलों पर हमलों के बाद वैश्विक तेल बाजार में तनाव देखा जा रहा है। कई विश्लेषकों ने आगामी दिनों में तेल कीमतों में तीव्र उछाल की आशंका जताई है। इस हमले की जवाबी कार्रवाई में ईरान ने भी पीछे नहीं हटते हुए शुक्रवार से अब तक इज़राइल पर करीब 270 बैलिस्टिक मिसाइलें दाग दी हैं। इनमें से लगभग 22 मिसाइलें इज़राइल के आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम से बचकर रिहायशी इलाकों में जा गिरीं, जिससे भारी जनहानि और संपत्ति को नुकसान हुआ है।

इज़राइल में अब तक 14 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 390 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। मारे गए लोगों में दो बच्चे (एक 9 साल का और एक 10 साल का) भी शामिल हैं, जिनकी मौत रविवार के ईरानी हमले में हुई। इज़राइल के हाइफा शहर में एक तेल रिफाइनरी पर भी हमला किया गया, जिससे पूरे शहर में हड़कंप मच गया।

इज़राइल ने इस हमले को “पूर्व-निर्धारित जवाबी कार्रवाई” करार दिया है और दावा किया है कि उनके हमले में ईरान के कई शीर्ष सैन्य जनरल मारे गए हैं। इनमें ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के खुफिया प्रमुख जनरल मोहम्मद काजमी का नाम भी शामिल है, जिनकी मौत को इज़राइल अपनी बड़ी सैन्य सफलता बता रहा है।

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि इज़राइल ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को निशाना बनाने की योजना बनाई थी। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस योजना को खारिज कर दिया, जिससे इस बात के संकेत मिले हैं कि अमेरिका अब इस संघर्ष में संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन यह प्रयास फिलहाल असफल साबित हो रहे हैं।

वहीं, ईरान में स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण है। राजधानी तेहरान में कई प्रमुख सड़कें बंद कर दी गई हैं, पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं और मस्जिदों व मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी बम शेल्टरों में बदल दिया गया है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि ईंधन की कोई कमी नहीं है, लेकिन आम जनता में डर और अफरा-तफरी का माहौल है।

ईरान और अमेरिका के बीच प्रस्तावित परमाणु समझौते पर बातचीत, जो रविवार को ओमान में होनी थी, फिलहाल स्थगित कर दी गई है। जानकारों का मानना है कि हालात जिस दिशा में जा रहे हैं, उससे यह संघर्ष लंबा और और भी विनाशकारी हो सकता है। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ेगा — विशेषकर तेल आपूर्ति, व्यापार, वैश्विक सुरक्षा और भू-राजनीतिक स्थिरता पर।

इज़राइल और ईरान के बीच ये हमले अब सिर्फ सीमित जवाबी कार्रवाई नहीं रह गए हैं, बल्कि यह टकराव व्यापक युद्ध की ओर बढ़ता नजर आ रहा है, जिसमें न केवल दोनों देशों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए भी गंभीर खतरे पैदा हो गए हैं।

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