Indore Water Contamination: इंदौर में जहरीले पानी से मौतों का संकट, भागीरथपुरा में दूषित जल सप्लाई पर हड़कंप, अफसरों पर गिरी गाज
देश के सबसे स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर से इस समय एक गंभीर और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। भागीरथपुरा इलाका दूषित पानी से फैली जल त्रासदी का केंद्र बन गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जहरीला पानी पीने से अब तक आठ लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि प्रशासनिक रिकॉर्ड में फिलहाल केवल तीन मौतों की आधिकारिक पुष्टि की गई है। इस विरोधाभास ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं और पूरे इलाके में भय और आक्रोश का माहौल है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में भागीरथपुरा क्षेत्र में उल्टी-दस्त और पेट संबंधी गंभीर बीमारियों के चलते छह महिलाओं समेत आठ लोगों की जान चली गई। लोगों का कहना है कि लंबे समय से क्षेत्र में बदबूदार और गंदा पानी सप्लाई हो रहा था, जिसकी शिकायतें कई बार की गईं, लेकिन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। वहीं, बुधवार को इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने सात मौतों की बात स्वीकार कर मामले को और गंभीर बना दिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सख्त रुख अपनाया है। प्रारंभिक जांच में लापरवाही सामने आने पर नगर निगम के एक जोनल अधिकारी और भागीरथपुरा क्षेत्र के एक असिस्टेंट इंजीनियर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि एक इंचार्ज सब-इंजीनियर को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
नगर आयुक्त दिलीप कुमार यादव ने जानकारी दी कि जांच के दौरान मुख्य जल आपूर्ति पाइपलाइन में एक गंभीर लीकेज पाया गया है। इस लीकेज के ऊपर ही एक शौचालय बना हुआ था, जिससे गंदगी सीधे पाइपलाइन में जाने की आशंका है। इसी कारण पीने का पानी दूषित हुआ और लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक आईएएस अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है, जो मौतों के वास्तविक आंकड़ों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच करेगी।
फिलहाल इलाके में पानी की आपूर्ति को रोककर वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है, वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर मरीजों की जांच कर रही हैं। भागीरथपुरा की यह घटना न सिर्फ नगर निगम की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि स्वच्छता के दावों पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है। अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सके कि इस जल त्रासदी के पीछे कौन जिम्मेदार है और पीड़ित परिवारों को कब न्याय मिलेगा।



