Home राज्यनामा उचित मुआवजे की माँग को लेकर गैस पीड़ीतो का अनिश्चितकालीन अनशन शुरू

उचित मुआवजे की माँग को लेकर गैस पीड़ीतो का अनिश्चितकालीन अनशन शुरू

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भोपाल में 1984 की यूनियन कार्बाइड गैस हादसे से पीड़ित 10 महिलाओं ने हादसे से हुई मौतों और चोटों के लिए उचित अतिरिक्त मुआवजे की माँग लेकर शुक्रवार से बिना पानी के अपना अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया। सत्याग्रह का नेतृत्व कर रहे पीड़ितों के पाँच संगठनों के नेताओं ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि यदि केंद्र व राज्य सरकारें जल्द ही सुनी जाने वाली सुधार याचिका में मौतों और चोटों के आंकड़ों में संशोधन नहीं करती हैं तो भोपाल के पीडि़तों को एक बार फिर यूनियन कार्बाइड और उसके मालिक डाव केमिकल से उचित मुआवजे लेने से वंचित कर दिया जाएगा। भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्ष रशीदा बी ने कहा कि आज बिन पानी अनशन शुरू करने वाली हमारी दस बहादुर बहनें निम्न जाति के हिंदू और मुस्लिम तथा गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों से हैं। ये सभी लंबे समय से गैस जनित लंबी बीमारियों से पीड़ित हैं और हादसे के कारण अधिकांश ने अपने परिवार के सदस्यों को खो दिया है। कुछ के बच्चे और पोते जन्मजात विकृतियों वाले हैं। फिर भी 93 प्रभावित आबादी की तरह उन्हें आपदा के कारण हुई चोटों के लिए केवल 25 हजार रुपये का मुआवज़ा दिया गया है। भोपाल गैस पीड़ित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव ने कहा कि 1997 में मनमाने ढंग से मृत्यु के दावों के पंजीकरण को रोकने के बाद सरकार सर्वोच्च न्यायालय को बता रही है कि आपदा के कारण केवल 5295 लोग मारे गए। आधिकारिक रिकॉर्ड स्पष्ट रूप से बताते हैं कि 1997 के बाद से आपदा के कारण होने वाली बीमारियों से हजारों लोग मरते रहे हैं और मृत्यु का वास्तविक आंकड़ा 25 हजार के करीब है। राज्य और केंद्र सरकारों पर शासन करने वाली पार्टी जो मौत के आंकड़ों को कम कर रही है डाव केमिकल के करीब है जिसे पार्टी के अभियान कोष में योगदान देने के लिए जाना जाता है। पीड़ित महिलाओं के निर्जल उपवास पर बोलते हुए भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना ढींगरा ने कहा कि हमारा सत्याग्रह यह सुनिश्चित करने के लिए है कि 10 जनवरी को सुधार याचिका की सुनवाई करने वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच को अमेरिकी कम्पनियों द्वारा ढाहे गए नुकसान का सही अन्दाज लग सके। सरकार दुनिया की सबसे खराब औद्योगिक हादसे  के बारे में हमारे देश की शीर्ष अदालत को गुमराह करने की पूरी कोशिश कर रही है और इसके खिलाफ बोलने के लिए हमें पुलिस कार्रवाई की धमकी दी जा रही है।

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