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भागवत में श्री कृष्ण बाल लीला ,चीर हरण व गिरिराज पूजन का व्याख्यान राजीव साहनी नें लगाया प्रभु को छप्पन भोग का भोग

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श्री कृष्ण बाल लीला
भागवत में श्री कृष्ण बाल लीला ,चीर हरण व गिरिराज पूजन का व्याख्यान राजीव साहनी नें लगाया प्रभु को छप्पन भोग का भोग

भागवत में श्री कृष्ण बाल लीला ,चीर हरण व गिरिराज पूजन का व्याख्यान राजीव साहनी नें लगाया प्रभु को छप्पन भोग का भोग

नई दिल्ली ( सी.पी.एन.न्यूज़ ) : श्री सनातन धर्म मन्दिर नेहरु नगर में भागवत कथा के तहत श्री कृष्ण बाल लीला,चीर हरण तथा श्री गिरिराज जी पूजन का वर्नण किया गया भागवत का गुणगान कथावाचक पंडित अशोक दीक्षित नें अपनी मधुर वाणी से किया जिसे सुन श्रोता भाव विभोर हो गए | पंडित अशोक दीक्षित नें भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का रोचक और भावपूर्ण वर्णन किया |

कथा के दौरान उन्होंने कान्हा की माखन चोरी की प्रसंग को विस्तार से प्रस्तुत किया. श्रीकृष्ण ने अपने मित्रों-सुदामा, सुभल, मंगल, सुमंगल और तोसन के साथ मिलकर एक टोली बनाई | एक दिन योजना के अनुसार कन्हैया गोपी के घर पहुंचे . उन्होंने अपने साथियों को छिपा दिया और स्वयं दरवाजे पर पहुंचकर खटखटाने लगे . जब गोपी ने दरवाजा खोला तो कन्हैया ने मासूमियत से कहा, “मैया ने भेजा है माखन लेने, संत आए हैं घर पर .बदले में दो मटकी लौटा देंगे. गोपी ने प्रेमवश माखन की मटकी के साथ मिश्री भी दे दी और कहा ,कह देना मैया से, लौटाने की जरूरत नहीं. श्रद्धालुओं ने इस लीला का खूब आनंद लिया .पूरे परिसर में “राधे-राधे ” और “कृष्ण कन्हैया लाल की जय ” के जयघोष गूंजते रहे। भागवत में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए |

नेहरु नगर मन्दिर के प्रधान प्रसिद्ध समाजसेवी विश्व हिन्दू परिषद के प्रान्त उपाध्यक्ष राजीव साहनी मन्दिर के कार्यकारी मंत्री तथा विश्व हिन्दू परिषद के जिला अध्यक्ष लाजपत नगर कर्ण कपूर नें बताया भागवत सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग मन्दिर प्रांगण में पधार रहे हैं | श्रद्धालु प्रभु की भक्ति में इतने लीन हो जाते हैं कि कथा सुनते सुनते भाव विहोर हो भजनों पर झूमने लगते है | एक अन्य प्रसंग का वर्नण करते हुए पंडित अशोक दीक्षित नें बताया यमुना में स्नान करने के लिए आई, सभी गोपीयां अपने अपने वस्त्रों को यमुना तट पर खोलकर निर्वस्त्र होकर यमुना में स्नान करने के लिए चली जाती है।

पीछे से भगवान श्री कृष्ण ने सभी गोपियों के वस्त्र को चुराकर वट वृक्ष के ऊपर ले जा कर रख देते हैं। जब गोपियों स्नान करके बाहर देखने लगी,जब वस्त्र तट पर नहीं दिखाई दिए। विचार करने लगी कि हमारे वस्त्र कौन ले गया। फिर देखा कि नंदलाल कन्हैया हम सब गोपियों के वस्त्र चुराकर वट वृक्ष के ऊपर बैठे है। तब गोपियों ने हाथ जोड कर कहा कि कान्हा हमारे वस्त्र दे दो, भगवान श्री कृष्ण कहने लगे नहीं गोपियों मैं तुम्हें तुम्हारे वस्त्र नहीं दूंगा। तब गोपिया कहने लगी अगर तुम हमारे वस्त्र नहीं दोगे तो हम बाबा नंद यशोदा मैया से तुम्हारी शिकायत करेंगे। पंडित जी नें श्रीमद भागवत कथा का संक्षेप प्रस्तुत करके अवगत करवाया, वहीं गिरीराज पूजन और छप्पन भोग के बारें में जानकारी दी और महत्तता को भी बताया। और राजीव साहनी नें प्रभु को साथियों सहित छपन्न भोग का भोग लगाया |

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