UNHRC Speech Row: कासिम खान के बयान पर पाकिस्तान में सियासी बवाल, सरकार ने बताया देश विरोधी साजिश
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री Imran Khan के बेटे Kasim Khan के संयुक्त राष्ट्र में दिए गए भाषण को लेकर देश में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। पाकिस्तान सरकार ने उनके बयान को देश के आर्थिक हितों के खिलाफ बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को कमजोर करने की कोशिश करार दिया है।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब कासिम खान ने United Nations Human Rights Council के 61वें सत्र में जिनेवा में संबोधन देते हुए अपने पिता इमरान खान की रिहाई की मांग उठाई। उन्होंने परिषद से अपील की कि वह पाकिस्तान सरकार पर दबाव बनाए ताकि इमरान खान के खिलाफ कथित उत्पीड़न को रोका जा सके और उन्हें तुरंत रिहा किया जाए। कासिम ने यह भी कहा कि पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र के वर्किंग ग्रुप की राय का पालन करना चाहिए।
कासिम के इस बयान पर पाकिस्तान सरकार के कई वरिष्ठ मंत्रियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार, पंजाब की सूचना मंत्री अजमा बुखारी और सिंध के सूचना मंत्री शारजील मेमन ने इसे एक सुनियोजित साजिश बताया। उनका आरोप है कि इस भाषण का उद्देश्य पाकिस्तान के लिए बेहद महत्वपूर्ण Generalized Scheme of Preferences Plus (GSP Plus) दर्जे को नुकसान पहुंचाना है, जिससे देश के निर्यात और रोजगार पर गंभीर असर पड़ सकता है।
सरकार का कहना है कि जीएसपी प्लस दर्जा पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है, क्योंकि इसके तहत देश को यूरोपीय संघ में निर्यात पर कम टैरिफ का लाभ मिलता है। मंत्रियों ने दावा किया कि इस दर्जे की वजह से पाकिस्तान के निर्यात में लगभग 40 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है और खासतौर पर टेक्सटाइल सेक्टर को बड़ा फायदा मिला है, जिससे हजारों लोगों को रोजगार मिला है।
पाकिस्तानी मंत्रियों ने यह भी आरोप लगाया कि कासिम खान और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ से जुड़े कुछ नेता अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यहां तक दावा किया कि यह समूह यूरोपीय संघ में कुछ लॉबियों और प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े तत्वों के साथ मिलकर काम कर रहा है, ताकि पाकिस्तान का जीएसपी प्लस दर्जा खत्म कराया जा सके।
हालांकि Pakistan Tehreek-e-Insaf (PTI) ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी के प्रवक्ता शेख वकास अकरम ने कहा कि कासिम खान के भाषण में कहीं भी जीएसपी प्लस के खिलाफ कोई बात नहीं कही गई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भाषण लाइव प्रसारित हुआ था और उसमें केवल मानवाधिकार और इमरान खान की रिहाई का मुद्दा उठाया गया था।
इस पूरे विवाद के बीच यूरोपीय संघ की इस योजना को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। जीएसपी प्लस एक विशेष प्रोत्साहन योजना है, जिसके तहत विकासशील देशों को ‘सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ और बेहतर गवर्नेंस को बढ़ावा देने के बदले उनके दो-तिहाई उत्पादों पर आयात शुल्क में छूट दी जाती है। यही कारण है कि पाकिस्तान के लिए इस दर्जे को बनाए रखना बेहद जरूरी माना जाता है।
इस घटनाक्रम ने पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है, जहां एक ओर सरकार इसे राष्ट्रीय हितों के खिलाफ कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे मानवाधिकार और लोकतंत्र की आवाज उठाने का अधिकार मान रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और ज्यादा तूल पकड़ सकता है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इसकी गूंज सुनाई दे सकती है।



