Delhi: दिल्ली में सार्वजनिक शौचालयों की बदहाली पर हाई कोर्ट की फटकार, देवेन्द्र यादव बोले – स्वच्छ भारत अभियान पूरी तरह विफल
नई दिल्ली, 4 जुलाई 2025 – राजधानी दिल्ली में सार्वजनिक शौचालयों की बदतर हालत को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट की तीखी टिप्पणी ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। इस मसले पर प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री देवेन्द्र यादव ने मोदी सरकार के बहुचर्चित स्वच्छ भारत अभियान को पूरी तरह असफल करार दिया। उन्होंने कहा कि जब दिल्ली जैसे राष्ट्रीय राजधानी में सार्वजनिक शौचालयों की यह स्थिति है, तो देश के अन्य हिस्सों की दशा की कल्पना करना मुश्किल नहीं है।
श्री यादव ने कहा कि भाजपा और आम आदमी पार्टी दोनों की सरकारें विफल रही हैं। 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आरंभ किए गए स्वच्छ भारत अभियान को 11 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन अभी तक दिल्ली को खुले में शौच मुक्त राज्य घोषित नहीं किया जा सका है। यह न केवल प्रशासनिक विफलता है बल्कि करोड़ों रुपये के बजट के बावजूद जनता को बुनियादी स्वच्छता सुविधाएं न देने की संवेदनहीनता भी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की ट्रिपल इंजन की सरकार – जिसमें मुख्यमंत्री, मेयर और मंत्री शामिल हैं – जनता को मूलभूत सुविधाएं देने के बजाय केवल फोटो खिंचवाने और प्रचार करने में व्यस्त हैं। यही कारण है कि दिल्ली हाई कोर्ट को राजधानी में सार्वजनिक शौचालयों के रख-रखाव की स्थिति पर चिंता जतानी पड़ी और दिल्ली सरकार, डीडीए और नगर निगम को फटकार लगानी पड़ी।
देवेन्द्र यादव ने बताया कि सार्वजनिक शौचालयों की बदहाली केवल स्वच्छता का मसला नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के लिए एक गंभीर सुरक्षा और स्वास्थ्य संकट भी है। महिलाओं को अत्यधिक गंदगी और असुविधा का सामना करना पड़ता है, जिससे उनके लिए खुले में शौच न करना एक चुनौती बन जाता है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली नगर निगम, जो शहरी साफ-सफाई और सार्वजनिक सुविधाओं का जिम्मा संभालती है, भ्रष्टाचार और लापरवाही के चलते बुरी तरह विफल हो चुकी है। उन्होंने विशेष रूप से चांदनी चौक, पहाड़गंज, नेहरू प्लेस, आजाद मार्केट, जनकपुरी, तिलक नगर और राजौरी गार्डन जैसे बड़े व्यावसायिक क्षेत्रों का हवाला देते हुए बताया कि इन इलाकों में शौचालयों की हालत बेहद खराब है, जबकि ये बाजार अरबों रुपये का राजस्व सरकार को देते हैं।
पहाड़गंज के संगत राशन बाजार, अनाज मंडी और जनरल मार्केट में स्थित शौचालयों की तस्वीरे बताते हैं कि दिल्ली के निकाय कितनी लापरवाही से काम कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कूड़े-कचरे का ढेर, जलजमाव, दूषित जल और गंदगी से त्रस्त दिल्ली अब एक ‘कूड़ा राजधानी’ बनती जा रही है।
देवेन्द्र यादव ने कहा कि अगर हाई कोर्ट को खुद हस्तक्षेप करना पड़ रहा है तो यह स्पष्ट संकेत है कि मामला अत्यंत गंभीर और अतिसंवेदनशील है। निकायों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए और व्यवस्था में तुरंत सुधार लाया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि जबकि ग्रामीण भारत के कई राज्य खुले में शौच मुक्त घोषित हो चुके हैं, वहीं दिल्ली अभी तक इस सूची से बाहर है। यह एक राष्ट्रीय शर्म का विषय है कि देश की राजधानी में हजारों लोग आज भी शौच के लिए खुले में जाने को मजबूर हैं।


