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HD Kumaraswamy Challenge: सिद्धारमैया स्टिंग वीडियो विवाद में कुमारस्वामी की पुलिस को खुली चुनौती, बोले- पहले मुझसे पूछताछ करो

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HD Kumaraswamy Challenge: सिद्धारमैया स्टिंग वीडियो विवाद में कुमारस्वामी की पुलिस को खुली चुनौती, बोले- पहले मुझसे पूछताछ करो

कर्नाटक में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से जुड़े कथित स्टिंग ऑपरेशन वीडियो को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। केंद्रीय मंत्री और जनता दल (सेक्युलर) के नेता एचडी कुमारस्वामी ने कर्नाटक पुलिस को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि अगर जांच करनी है तो सबसे पहले उनसे पूछताछ की जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस कथित स्टिंग ऑपरेशन के पीछे के लोगों का पता लगाने के बजाय जेडीएस के कार्यकर्ताओं, खासकर पार्टी की सोशल मीडिया टीम को निशाना बना रही है। कुमारस्वामी ने इस मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग भी दोहराई है।

यह विवाद उस कथित वीडियो को लेकर है, जिसे हाल के दिनों में सोशल मीडिया और कुछ स्थानीय टेलीविजन चैनलों पर प्रसारित किया गया। वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि इसका संबंध सिद्धारमैया से है। हालांकि, वीडियो की सामग्री और उससे जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। सिद्धारमैया ने इसे अपनी छवि खराब करने की साजिश बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ झूठी और मानहानिकारक सामग्री फैलाई जा रही है।

कुमारस्वामी का आरोप है कि पुलिस इस मामले में जेडीएस के सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं से पूछताछ कर रही है, जबकि कथित स्टिंग ऑपरेशन तैयार करने और उसे प्रसारित करने में शामिल लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के सोशल मीडिया विभाग से जुड़े शंकर को पुलिस ने हिरासत में लिया और एक अन्य कार्यकर्ता मोहन के घर पहुंचकर उसके परिवार को परेशान किया। कुमारस्वामी ने सवाल उठाया कि यदि जांच का उद्देश्य सच्चाई सामने लाना है, तो कार्रवाई सभी संबंधित लोगों के खिलाफ समान रूप से होनी चाहिए।

विवाद के बीच बेंगलुरु की एक अदालत ने सिद्धारमैया से जुड़े कथित वीडियो और मानहानिकारक सामग्री के प्रकाशन तथा प्रसारण पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया था। अदालत का आदेश उन मीडिया संस्थानों और डिजिटल मंचों पर लागू है जिन्हें मामले में पक्षकार बनाया गया है। सिद्धारमैया ने अपनी याचिका में कहा कि वीडियो के जरिए उनके खिलाफ राजनीतिक रूप से प्रेरित अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने पुलिस से भी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने और वीडियो के प्रसार के पीछे जिम्मेदार लोगों की पहचान करने की मांग की है।

कुमारस्वामी ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि कथित स्टिंग ऑपरेशन के पीछे शिवकुमार की भूमिका हो सकती है और इसमें एक कन्नड़ टेलीविजन चैनल के संपादक की संलिप्तता की भी जांच होनी चाहिए। हालांकि, ये आरोप कुमारस्वामी की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। शिवकुमार ने कहा है कि कथित स्टिंग ऑपरेशन से जुड़े मामले की किसी भी जांच में वह आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए तैयार हैं।

इस मामले में कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने राज्य पुलिस की जांच क्षमता पर भरोसा जताते हुए CBI जांच की मांग को खारिज किया है। उनका कहना है कि राज्य पुलिस मामले की जांच करने में सक्षम है और फिलहाल केंद्रीय एजेंसी को सौंपने की जरूरत नहीं है। दूसरी ओर, कुमारस्वामी का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी की जरूरत है। पुलिस कथित वीडियो के प्रसार से जुड़े सोशल मीडिया खातों, आईपी एड्रेस और डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है। मामले में कई लोगों से पूछताछ भी की गई है।

15 अक्टूबर को कुमारस्वामी बेंगलुरु पुलिस आयुक्त के कार्यालय के बाहर धरने पर भी बैठे। उन्होंने जेडीएस कार्यकर्ताओं के साथ कथित व्यवहार पर नाराजगी जताई और निष्पक्ष जांच की मांग की। बाद में पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह की ओर से निष्पक्ष जांच का भरोसा दिए जाने के बाद उन्होंने धरना समाप्त कर दिया। कुमारस्वामी ने कहा कि उनकी पार्टी कार्यकर्ताओं के कथित उत्पीड़न के मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी और जरूरत पड़ने पर कानूनी तथा राजनीतिक स्तर पर कार्रवाई करेगी।

फिलहाल कर्नाटक पुलिस कथित स्टिंग ऑपरेशन वीडियो के निर्माण और प्रसार से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। इस विवाद में सिद्धारमैया की शिकायत, कुमारस्वामी के आरोप और राज्य सरकार का रुख अलग-अलग हैं। जांच पूरी होने तक वीडियो से जुड़े दावों को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर वीडियो के स्रोत और उसे प्रसारित करने वालों की पहचान कर पाती है या नहीं।

 

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