Engineer Rashid terror funding case: टेरर फंडिंग केस में इंजीनियर राशिद को बड़ा झटका, दिल्ली हाई कोर्ट ने आरोपों को चुनौती देने वाली याचिका की खारिज
टेरर फंडिंग मामले में जम्मू-कश्मीर के बारामूला से सांसद शेख अब्दुल राशिद उर्फ इंजीनियर राशिद को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ तय किए गए आरोपों को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि इंजीनियर राशिद को अब इस मामले में ट्रायल का सामना करना ही होगा और उनके खिलाफ मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस मधु जैन की पीठ ने ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर अपील को सुनवाई योग्य नहीं मानते हुए खारिज कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह याचिका बनाए रखने लायक नहीं है, इसलिए इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। हाई कोर्ट के इस फैसले से इंजीनियर राशिद को कोई राहत नहीं मिली है और उनके खिलाफ तय आरोप बरकरार रहेंगे।
इंजीनियर राशिद साल 2019 से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं। उन्हें नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने साल 2017 के टेरर फंडिंग मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया था। एनआईए की जांच में आरोप लगाया गया है कि इंजीनियर राशिद की भूमिका जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी तत्वों और आतंकी संगठनों को फंडिंग उपलब्ध कराने में रही है।
एनआईए के अनुसार, कारोबारी और सह-आरोपी जहूर वटाली से पूछताछ के दौरान इंजीनियर राशिद की संलिप्तता सामने आई थी। जांच एजेंसी का दावा है कि टेरर फंडिंग के जरिए घाटी में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने की साजिश रची गई थी। इस मामले में अक्टूबर 2019 में चार्जशीट दाखिल की गई थी, जिसके बाद मार्च 2022 में विशेष एनआईए कोर्ट ने इंजीनियर राशिद और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे।
इंजीनियर राशिद और सह-आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 120B, 121, 124A और यूएपीए के तहत आतंकवादी गतिविधियों और टेरर फंडिंग से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इन धाराओं के तहत सजा बेहद सख्त मानी जाती है और मामलों की सुनवाई लंबी चलती है।
गौरतलब है कि इंजीनियर राशिद ने साल 2024 के लोकसभा चुनावों में पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को हराकर जीत दर्ज की थी। जेल में रहते हुए चुनाव जीतने के बाद वह एक बार फिर सुर्खियों में आए थे। इसी बीच एक दिल्ली की अदालत ने उन्हें संसद के बजट सत्र में शामिल होने की अनुमति भी दी है, हालांकि टेरर फंडिंग केस से जुड़ी कानूनी कार्रवाई उनके खिलाफ जारी रहेगी।



