Drishti Project: दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में संपत्ति अधिकारों की प्रक्रिया होगी आसान, 65 करोड़ की परियोजना का डॉ. यूके चौधरी ने किया स्वागत
नई दिल्ली (रविंद्र कुमार)। दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लाखों लोगों को संपत्ति से जुड़े अधिकार दिलाने की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की 65 करोड़ रुपये की ‘दृष्टि’ परियोजना को महत्वपूर्ण पहल बताया गया है। भाजपा के उत्तर-पूर्वी दिल्ली जिला अध्यक्ष डॉ. यूके चौधरी ने इस परियोजना का स्वागत करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक और डिजिटल सर्वेक्षण पर आधारित यह व्यवस्था पीएम-उदय योजना के क्रियान्वयन को गति देने में मदद कर सकती है। उनके अनुसार, इससे संपत्तियों के सर्वेक्षण, मैपिंग और दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी।
डॉ. यूके चौधरी ने कहा कि दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में बड़ी संख्या में परिवार लंबे समय से अपने भूखंडों और मकानों से संबंधित कानूनी अधिकारों को लेकर स्पष्ट और सुविधाजनक प्रक्रिया की अपेक्षा कर रहे हैं। ऐसे में ‘दृष्टि’ परियोजना के तहत सर्वेक्षण और रिकॉर्ड तैयार करने की व्यवस्था को आधुनिक बनाना सकारात्मक कदम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे पात्र लोगों को संपत्ति से जुड़ी प्रक्रियाओं में सुविधा मिलेगी और प्रशासनिक कामकाज को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा।
डॉ. चौधरी के अनुसार, परियोजना की अनुमानित लागत 65 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। इसमें 52 करोड़ रुपये यानी 80 प्रतिशत राशि केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के शहरी विकास निधि से उपलब्ध कराने का प्रावधान है, जबकि शेष 13 करोड़ रुपये यानी 20 प्रतिशत राशि दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग द्वारा दी जाएगी। परियोजना के तहत दिल्ली के सभी 13 जिलों में पीएम-उदय सेल स्थापित करने और मुख्यालय में एक अलग शाखा बनाने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इससे संबंधित कार्यों के समन्वय और निगरानी को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि जीआईएस आधारित सर्वेक्षण और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से संपत्तियों की पहचान, उनकी मैपिंग तथा संबंधित रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकती है। डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से जानकारी को बेहतर ढंग से संकलित करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाने में सहायता मिल सकती है। इससे पात्र लाभार्थियों की पहचान और संपत्ति संबंधी मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया को भी अधिक प्रभावी बनाने की संभावना है।
डॉ. चौधरी ने कहा कि किसी भी जनकल्याणकारी योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसका लाभ जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर पहुंचे और लोगों को अनावश्यक रूप से सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। उनके अनुसार, पीएम-उदय योजना को आधुनिक तकनीक से मजबूती देने का प्रयास इसी दिशा में महत्वपूर्ण है। इससे उन परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो अपनी संपत्ति से जुड़े अधिकारों को स्पष्ट और सुरक्षित बनाने की प्रक्रिया में सुविधा चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार विकास योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने पर जोर दे रही है। डॉ. चौधरी ने विश्वास जताया कि केंद्र और दिल्ली सरकार के समन्वित प्रयासों से राजधानी में विकास कार्यों को गति मिलेगी और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों के जीवन को सरल बनाना, सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए।
डॉ. चौधरी ने ‘दृष्टि’ परियोजना को ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना के अनुरूप बताते हुए कहा कि तकनीक आधारित ऐसी पहल समावेशी विकास को आगे बढ़ाने में सहायक हो सकती है। हालांकि, परियोजना से संपत्ति अधिकारों की प्रक्रिया में मिलने वाली वास्तविक सुविधा उसके क्रियान्वयन, सर्वेक्षण की गुणवत्ता और संबंधित मामलों के समयबद्ध निस्तारण पर निर्भर करेगी।



