
देवेन्द्र यादव की जमीनी मेहनत लाने लगी रंग ,दिखने लगी सड़कों पर रैली में दिल्ली की भागीदारी की हो रही है तारीफ़
– अश्वनी भारद्वाज –
नई दिल्ली ,हैडलाइन में जो आप पढ़ रहे हैं एकदम ठीक है मेहनत करने वाला इन्सान कभी नाकाम नहीं होता चाहे स्कूली छात्र हो या व्यवसायी अथवा किसान ,जो फसल बोकर उसकी अच्छे से देखभाल करता है उसे ही अच्छी फसल काटने को मिलती है | जी हाँ हम दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेन्द्र यादव की बात कर रहे हैं जब उन्हें दिल्ली कांग्रेस की बागडौर मिली थी पार्टी करीब चार फीसदी वोटो के आंकड़े पर थी लेकिन साल भर की कड़ी मेहनत के बाद यह आंकड़ा 14 फीसदी के आसपास पहुंच गया है और एक लम्बे समय के बाद पार्टी का उप चुनाव में खाता भी खुल गया है |
समझ गए ना आप दिल्ली में कांग्रेस अब खड़ी होने लगी है और यदि इसी तरह मेहनत होती रही तो निश्चित रूप से पार्टी अपने पुराने असितत्व को हांसिल कर सकती है इस सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता | रविवार को रामलीला मैदान में आयोजित रैली में उमड़े जनसैलाब नें यह साबित भी कर दिया कि पार्टी मजबूती के साथ वापसी की राह पर बढ़ चुकी है | रैली में दिल्ली की एतिहासिक भागीदारी तो तब रही जब देवेन्द्र यादव के निर्देश थे रैली में केवल पार्टी के सक्रिय कार्कोयकर्ताओं को ही लाना है, उन्हें किराये की भीड़ नहीं चाहिए |

उनका साफ़ तौर से कहना था किसी भी नेता को थोक में बसें नहीं दी जायेगी जो बस भी दी जायेगी केवल ब्लाक अध्यक्ष को और वह और वह भी केवल एक | जबकि अनेक ब्लाक अध्यक्षों नें कई-कई बसे मांगी थी एक जिला अध्यक्ष नें तो सौ बसों तक की मांग की थी लेकिन देवेन्द्र यादव ने उन्हें अनुमति नहीं दी | इसी तरह नई दिल्ली के एक निगम पार्षद नें चालीस बसों की मांग की थी उसे भी नहीं माना गया |
देवेन्द्र यादव का मानना था हर वार्ड में पार्टी के इतने सक्रिय कार्यकर्ता हैं जहां से कई कई बसें भरी जा सकती है इसी सोच के चलते उन्होंने साल भर की अपनी मेहनत का करंट चैक करने के लिए इतना बड़ा दावं खेला जिसमें वे बेहद अच्छे नम्बरों से पास हुए |
अब आप सोच रहे होंगे आखिर जिस रैली में पार्टी का शीर्ष नेत्रत्व भाग ले रहा था उसमे इतना बड़ा रिस्क उन्होंने क्यों लिया देवेन्द्र को यह पूरा भरोषा था जिस परीक्षा की तैयारी वे साल भर से कर रहे हैं उसमें निश्चित रूप से पास होंगे और उन्होंने पार्टी हाई कमान को भी पहले से अपनी रणनीति समझा रखी थी यदि इस रैली में सभी को उनकी मर्जी की बसें दी जाती तो नजारा ही कुछ और होता | दरअसल देवेन्द्र यादव नें करीब एक हजार सक्रिय कार्यकर्ताओ और नेताओं को सीधे अपनी टीम बनाया हुआ है ,कांग्रेस में मासिक बैठकें शुरू करना विधानसभा स्तर पर अपने भरोसे के लोगो को पर्यवेक्षक नियुक्त करना उनसे जमीनी जानकरी लेना और टिप्स देना कांग्रेस में एक नई शुरुवात के रूप में देखा जा रहा है |
हालांकि दिल्ली कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं को यह रणनीति रास नहीं आ रही लेकिन देवेन्द्र यादव की इन सब बातों की परवाह भी नहीं है और पार्टी की बेहतरी के लिए वे कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहते हैं | रैली के लिए प्रदेश स्तर से लेकर विधानसभा प्रभारियों से कार्यकर्ताओं से रैली में बस के ही माध्यम से आने का आग्रह कराने और सभी नेताओं तथा प्रभारियों से कार्यकर्ताओं के साथ बसों में बैठकर आने का फैंसला भी काफी सराहा गया | अब तो आप समझ ही गए होंगे कितनी मेहनत कर कार्यकर्ताओं एकजुट करने में लगे हैं देवेन्द्र यादव | आज बस इतना ही …


