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Delhi MCD: ‘जब सफाई का सौदा होगा तो दिल्ली साफ कैसे होगी’, पूर्व मेयर श्याम सुंदर अग्रवाल ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप

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Delhi MCD: ‘जब सफाई का सौदा होगा तो दिल्ली साफ कैसे होगी’, पूर्व मेयर श्याम सुंदर अग्रवाल ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप

नई दिल्ली। दिल्ली की सफाई व्यवस्था और नगर निगम में कथित भ्रष्टाचार को लेकर पूर्व मेयर श्याम सुंदर अग्रवाल ने निगम प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के कथित गठजोड़ के कारण सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है। अग्रवाल ने दावा किया कि कुछ निगम पार्षदों द्वारा सैनिटरी इंस्पेक्टरों के माध्यम से हर महीने लाखों रुपये की कथित अवैध वसूली की जा रही है। उन्होंने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

श्याम सुंदर अग्रवाल ने कहा कि सफाई व्यवस्था का उद्देश्य राजधानी की सड़कों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखना है, लेकिन यदि इस व्यवस्था से जुड़े पदों और जिम्मेदारियों का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया जाएगा तो इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सफाई व्यवस्था में ही कथित भ्रष्टाचार होगा, तो दिल्ली को साफ रखने का लक्ष्य कैसे पूरा किया जा सकेगा।

पूर्व मेयर ने आरोप लगाया कि कुछ पार्षद जनता की समस्याओं का समाधान करने के बजाय कथित आर्थिक लाभ पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि जिम्मेदार लोगों का ध्यान सफाई व्यवस्था सुधारने के बजाय कथित वसूली पर केंद्रित रहेगा, तो कूड़े की समस्या बनी रहेगी और नागरिकों को परेशानी झेलनी पड़ेगी। हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं हुई है।

अग्रवाल ने बताया कि वह हाल ही में देवी की कथा में शामिल हुए थे। वहां उन्होंने देवी माता के चरणों में प्रार्थना की कि दिल्ली की सफाई व्यवस्था को कथित रूप से नुकसान पहुंचाने और भ्रष्टाचार में शामिल लोगों को उनके कर्मों का जवाब मिले। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने जनता के अधिकारों और राजधानी की स्वच्छता व्यवस्था के साथ खिलवाड़ किया है, तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए।

इस दौरान उन्होंने अपने कार्यकाल का भी जिक्र किया। अग्रवाल ने कहा कि यदि उनके पांच वर्ष के कार्यकाल के दौरान उन्होंने भी ऐसा कोई गलत या भ्रष्ट काम किया हो, जैसा आरोप वह अन्य पार्षदों पर लगा रहे हैं, तो उन्हें भी वैसी ही सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने इसे सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही और नैतिक जिम्मेदारी से जोड़ते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपने ऊपर भी वही कसौटी लागू करने के लिए तैयार रहना चाहिए, जिसकी मांग वे दूसरों से करते हैं।

पूर्व मेयर ने नगर निगम में कथित भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के आरोपों को गंभीर बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों और अधिकारियों के कामकाज की निगरानी के साथ उन लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए, जिनके संरक्षण में कथित अवैध वसूली किए जाने का आरोप है। उनके मुताबिक, जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और किसी भी व्यक्ति को उसके पद या प्रभाव के आधार पर राहत नहीं मिलनी चाहिए।

अग्रवाल ने कहा कि दिल्ली के नागरिक नगर निगम को टैक्स देते हैं और बदले में उन्हें साफ सड़कें, स्वच्छ गलियां तथा बेहतर नागरिक सुविधाएं मिलनी चाहिए। यदि सफाई व्यवस्था के लिए उपलब्ध संसाधनों का लाभ जनता तक पहुंचने के बजाय कथित भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता है, तो इससे आम लोगों का भरोसा प्रभावित होता है। उन्होंने निगम प्रशासन से शिकायतों की गंभीरता से जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की।

 

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