दिल्ली के स्कूलों में आरएसएस का इतिहास पढ़ाने का रेखा गुप्ता सरकार का कदम खतरनाक : देवेंद्र यादव
नई दिल्ली ( सी.पी.एन.न्यूज़ ) : दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने कहा कि भाजपा अपने एजेंडे को राष्ट्रनीति शिक्षा योजना के नाम पर दिल्ली के स्कूलों में कक्षा 1 से 12 तक के छात्रों पर थोपने की तैयारी कर रही है जिसमें स्वतंत्रता संग्राम की आड़ में आरएसएस के उन समर्थकों की जीवनी और इतिहास को तोड़ मरोड़ कर पढ़ाया जाएगा, जिन्होंने आजादी की लड़ाई में कभी अहम भूमिका रही नही।
आजादी से 22 वर्ष पहले 1925 में जिस आरएसएस की नींव रखी गई उसका इतिहास कितना सशक्त है यह सब देशवासी पहले से ही जानते है, जबकि शिक्षा विशेषज्ञ भाजपा की दिल्ली सरकार की भविष्य बर्बाद करने वाली कार्यवाही से नाखुश है। देवेन्द्र यादव ने कहा कि क्या आरएसएस को शामिल करके छात्रों को सामाजिक जिम्मेदारियां और देश के लिए आरएसएस के मौलिक कर्तव्यों के प्रति जागरुक करके उनमें देश के प्रति सम्मान बढ़ेगा या छात्रों के लिए डिजाईन किए कार्यक्रम के तहत उन्हें एक सीमित सोच में बांधने की तैयारी है।
क्या भाजपा द्वारा आरएसएस के 22 वर्ष के इतिहास को भारत के पुराने इतिहास और लगभग 300 वर्ष के स्वतंत्रता संग्राम का संघर्ष पर हावी नही किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 18 सितम्बर, 2025 को भारत मंडपम में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा राष्ट्रनीति शिक्षा नीति को नमो विद्या उत्सव के तहत छात्रों को लोकतंत्र, शासन और बेहतर नागरिकता की व्यवहारिक जानकारी देने के लिए अगर शुरु किया गया, तो क्या संविधान के अंतर्गत विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में जो शक्तियां अलग-अलग भूमिकाएं निभाने के लिए दी गई है वह परिपक्व और संतुलित नही है |
देवेन्द्र यादव ने कहा कि शिक्षा विशेषज्ञ और इतिहासकारों ने कभी भी स्वतंत्रता संग्राम में आरएसएस की भूमिका को महत्व नही दिया, शायद आजादी मिलने से 22 वर्ष के दौरान इन्होंने अंग्रेजों और सामंती लोगों के हित साधने के लिए काम किया, यह कारण भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक देश में समानता और सामाजिकता को खत्म करके देश को धार्मिक स्वरुप देकर चलाना चाहता है जिसके कारण आरएसएस के झूठ को सच बताकर देश का भविष्य छात्रों को पढ़ाने की शुरुआत की जा रही है। देवेन्द्र यादव ने कहा कि रेखा गुप्ता सरकार का आरएसएस का इतिहास पढ़ाने का कदम दिल्ली में स्कूली बच्चों के भविष्य और दिल्ली के स्कूलों की प्रतिष्ठा को बर्बाद कर देगा, जिसके बाद वे संकीर्ण मानसिकता और सीमित सोच के तहत जीवन को देखेंगे, जिससे भविष्य में राष्ट्र का विकास रुकने का भी खतरा होगा। उन्होंने कहा कि युवा मस्तिष्क को उनके प्रारंभिक वर्षों में एक खतरनाक कथा के साथ परोसकर सबसे विनाशकारी रणनीति की नींव रखने की कोशिश है ।



