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Chhagan Bhujbal: छगन भुजबल ने ली फडणवीस मंत्रिमंडल में मंत्री पद की शपथ, बोले– विभाग तय करना मुख्यमंत्री का अधिकार

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Chhagan Bhujbal: छगन भुजबल ने ली फडणवीस मंत्रिमंडल में मंत्री पद की शपथ, बोले– विभाग तय करना मुख्यमंत्री का अधिकार

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल ने देवेंद्र फडणवीस मंत्रिमंडल में मंत्री पद की शपथ ली। मंगलवार सुबह 10 बजे मुंबई स्थित राजभवन में राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और एनसीपी नेता अजित पवार भी मौजूद रहे।

77 वर्षीय भुजबल महाराष्ट्र की राजनीति में ओबीसी समुदाय के सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते हैं। वे पहले भी राज्य के उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं और कई महत्वपूर्ण विभागों को संभाल चुके हैं। सोमवार देर रात भुजबल ने पुष्टि की थी कि उन्हें शपथ ग्रहण को लेकर जानकारी दे दी गई है।

शपथ लेने के बाद मीडिया से बातचीत में छगन भुजबल ने मंत्रालय को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा, “यह तय करना मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है कि किसे कौन-सा विभाग दिया जाए। मुझे जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी, मैं पूरी निष्ठा से निभाऊंगा।”

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस मौके पर उन्हें बधाई देते हुए कहा, “छगन भुजबल जी एक अनुभवी और वरिष्ठ नेता हैं। उन्होंने पहले भी कई विभागों की जिम्मेदारी संभाली है। उनके अनुभव से निश्चित ही राज्य सरकार को लाभ होगा।”

छगन भुजबल की इस वापसी को महाराष्ट्र की राजनीति में ओबीसी समुदाय को फिर से मजबूत प्रतिनिधित्व देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। उनके शपथ ग्रहण के साथ ही चर्चा यह भी तेज हो गई है कि उन्हें पूर्व मंत्री धनंजय मुंडे की जगह खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की जिम्मेदारी दी जा सकती है। मुंडे ने मार्च में स्वास्थ्य कारणों के चलते इस्तीफा दे दिया था, लेकिन उनके इस्तीफे के पीछे बीड में एक महिला सरपंच की हत्या के मामले में उनके करीबी सहयोगी का नाम सामने आना भी वजह माना गया।

इस घटनाक्रम से यह साफ है कि एनसीपी नेतृत्व के भीतर छगन भुजबल की राजनीतिक पकड़ और अनुभव को एक बार फिर से अहमियत दी जा रही है। नई जिम्मेदारी के साथ भुजबल की वापसी न केवल राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश है, बल्कि यह भी संकेत है कि महाराष्ट्र में ओबीसी राजनीति अब और मुखर होने वाली है।

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