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कुत्तों की आबादी नियंत्रण रखने में नाकाम साबित रही है भाजपा और आम आदमी पार्टी सरकार : परमानन्द शर्मा

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परमानन्द शर्मा
कुत्तों की आबादी नियंत्रण रखने में नाकाम साबित रही है भाजपा और आम आदमी पार्टी सरकार : परमानन्द शर्मा

कुत्तों की आबादी नियंत्रण रखने में नाकाम साबित रही है भाजपा और आम आदमी पार्टी सरकार : परमानन्द शर्मा

नई दिल्ली ( सी.पी.एन.न्यूज़ ) : आवारा कुत्तों को ले पूरे देश में आजकल हल्ला मचा हुआ है | यहाँ तक कि सुप्रीम कोर्ट तक को मामले में आदेश जारी करने पड़ रहे है | इस मामले को ले समाज में भी कई राय कायम हो रही हैं एक पक्ष कुत्तों का पक्षधर बना है तो दूसरा उनके खिलाफ खड़ा है | यह कहना है आर.डब्लू.ए. मानसरोवर पार्क के अध्यक्ष तथा वरिष्ठ कांग्रेस नेता परमानन्द शर्मा का |

परमानन्द शर्मा कहते हैं यह समस्या इसलिए विकराल हुई की नगर निगम में एक लम्बे समय तक सत्ता में रही भारतीय जनता पार्टी तथा आम आदमी पार्टी की सरकारों नें इनकी आबादी को नियंत्रित करने के प्रयास नहीं किये और इनकी तादाद इतनी ज्यादा बढ़ गई कि कुत्ते हर क्षेत्र में समस्या बन गए गए | लोगो को काटने के अलावा आवारा कुते क्षेत्रों में गंदगी भी फैलाते हैं जो फसाद की वजह भी बनते हैं | परमानन्द शर्मा कहते हैं आवारा कुत्ते ही नहीं बल्कि पालतू कुत्ते भी गंदगी फैलाते है जिन्हें रोकना उनके मालिको का काम है |

परमानन्द शर्मा कहते हैं आवारा कुत्तो को राहत देकर इन्हें शैल्टर होम से रिहा करने के सुप्रीम कोर्ट का नया आदेश मानवीय आधार पर लिया गया फैसला है | कोर्ट के आदेश के बाद सिर्फ बीमार और आक्रामक खतरनाक कुत्तों को शैल्टर होम में रखा जाएगा, बाकि की नसबंदी कराकर उन्हें छोड़ दिया जाएगा और सार्वजनिक स्थानों पर खाना खिलाने पर प्रतिबंध लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रश्न यह उठता है कि राजधानी में इतनी बड़ी संख्या में कुत्तों की संख्या कैसे बढ़ गई कि आज 10 लाख से भी अधिक आवारा कुत्ते है जिन पर निगम और संबधित विभागों का कोई नियंत्रण नही है। परमानन्द शर्मा कहते हैं राजधानी में डॉग बाईट और रेबीज से होने वाली मौतों के बढ़ते मामले तथा आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर कभी भी दिल्ली की सरकार और दिल्ली नगर निगम नें गौर ही नही किया। 2013 में जहां दिल्ली में जहां एक लाख से भी कम आवारा कुत्तें थे, 2025 में उनकी संख्या बढ़कर 10 लाख हो गई, जो पूरी तरह दिल्ली नगर निगम की विफलताओं का प्रमाण है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है आवारा कुत्तों के टीकाकरण तथा नसबंदी जैसे उपाय बरतने में ढील बरती गई और कुत्ते अपनी आबादी बे-रोक टोक बढ़ते गए | और उनकी ब्द्थी आबादी लोगो की समस्या बन गई |

परमानन्द शर्मा कहते हैं अब नगर निगम को जहां आवारा कुत्तों की आबादी पर नियन्त्रण रखना होगा वहीं बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन के साथ-साथ सामूहिक टीकाकरण और नसबंदी कार्यक्रम चलाने होंगे |

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