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Bhojshala Verdict: धार भोजशाला को हाईकोर्ट ने वाग्देवी मंदिर माना, हिंदुओं को पूजा का अधिकार, नमाज पर रोक

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Bhojshala Verdict: धार भोजशाला को हाईकोर्ट ने वाग्देवी मंदिर माना, हिंदुओं को पूजा का अधिकार, नमाज पर रोक
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने धार स्थित भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद विवाद मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना है। अदालत ने अपने फैसले में हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार देते हुए कहा कि यह स्थल राजा भोज के समय शिक्षा और संस्कृति का प्रमुख केंद्र रहा होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि यहां देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित की जा सकती हैं। हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग यानी ASI की सर्वे रिपोर्ट, ऐतिहासिक दस्तावेजों, स्थापत्य अवशेषों और अन्य साक्ष्यों का विस्तार से अध्ययन करने के बाद यह फैसला सुनाया। अदालत ने मुस्लिम पक्ष को नमाज की अनुमति देने वाले ASI के पुराने आदेश को भी निरस्त कर दिया। इस फैसले के बाद पूरे मध्यप्रदेश में राजनीतिक और धार्मिक हलचल तेज हो गई है।

फैसला सुनाने से पहले हाईकोर्ट ने कहा कि सभी पक्षों ने सुनवाई के दौरान सहयोगात्मक रवैया अपनाया, जिसकी अदालत सराहना करती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार का संवैधानिक दायित्व है कि वह केवल प्राचीन स्मारकों ही नहीं बल्कि सभी धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले स्थलों की पवित्रता और संरचना को सुरक्षित रखे। अदालत ने कहा कि तीर्थयात्रियों और श्रद्धालुओं को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना, व्यवस्थाओं को व्यवस्थित रखना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी शासन की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी धार्मिक स्थल की गरिमा और वहां स्थापित देव स्वरूप के संरक्षण को बनाए रखना बेहद जरूरी है।

यह मामला लंबे समय से विवादों में रहा है और साल 2022 में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने और हिंदू समाज को पूर्ण पूजा अधिकार देने की मांग की गई थी। इसके बाद अदालत के आदेश पर ASI ने वर्ष 2024 में करीब 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वे किया था। सर्वे रिपोर्ट अदालत में पेश की गई, जिसके आधार पर दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने पांच याचिकाओं और तीन इंटरवेंशन आवेदनों पर विस्तृत सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे अब सार्वजनिक किया गया है। फैसले से पहले धार और इंदौर समेत संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था और सोशल मीडिया पर विशेष निगरानी रखी जा रही थी ताकि किसी भी तरह की अफवाह फैलने से रोका जा सके।

फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। शहर काजी वकार सादिक ने कहा कि वे हाईकोर्ट के आदेश का अध्ययन करने के बाद इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। उन्होंने ASI की सर्वे रिपोर्ट और उसकी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। हालांकि कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा है कि सभी उपलब्ध ऐतिहासिक और पुरातात्विक साक्ष्यों पर विचार करने के बाद ही यह निर्णय लिया गया है। अब इस फैसले के बाद भोजशाला विवाद एक नए कानूनी और राजनीतिक चरण में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है।

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