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Bharat Tiwari Encounter: महापंचायत में गूंजे विरोध के स्वर, प्रशांत किशोर ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

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Bharat Tiwari Encounter: महापंचायत में गूंजे विरोध के स्वर, प्रशांत किशोर ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड स्थित बिलौटी गांव में भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर आयोजित महापंचायत में भारी संख्या में लोग जुटे। महापंचायत के दौरान पुलिस प्रशासन और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। प्रदर्शनकारियों ने भरत तिवारी को न्याय दिलाने की मांग करते हुए सरकार से जवाब मांगा। बिहार के साथ-साथ उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम में पहुंचे, जिससे माहौल पूरी तरह विरोध प्रदर्शन में तब्दील हो गया।

महापंचायत में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर भी पहुंचे। उन्होंने भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। प्रशांत किशोर ने कहा कि केवल एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों ही नहीं, बल्कि पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन परिस्थितियों ने भरत तिवारी को उस स्थिति तक पहुंचाया, उनकी भी गहन जांच होनी चाहिए।

प्रशांत किशोर ने कहा कि भरत तिवारी किसी निजी स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि गंगा कटाव से विस्थापित करीब 80 परिवारों की बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं की लड़ाई लड़ रहे थे। उन्होंने मांग की कि एनकाउंटर से जुड़े सभी प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच हो, जिसमें आदेश देने वाले अधिकारी और संबंधित मजिस्ट्रेट भी शामिल हों।

इस बीच भरत तिवारी के मुठभेड़ से पहले का कथित वीडियो सामने आने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। उनकी मां की शिकायत पर एनकाउंटर में शामिल पुलिस टीम के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। कई पुलिसकर्मियों को निलंबित और लाइन हाजिर किया जा चुका है, जबकि आगे और कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

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मामले को लेकर राज्य सरकार भी दबाव में दिखाई दे रही है। मानवाधिकार आयोग ने इस संबंध में जवाब तलब किया है, जबकि मामले की स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में भी याचिका दायर की गई है। मुख्यमंत्री द्वारा न्यायिक जांच की घोषणा किए जाने के बावजूद परिजनों ने उस पर भरोसा जताने से इनकार कर दिया है।

महापंचायत में मौजूद लोगों के बीच भरत तिवारी के समर्थन में लगातार नारे लगाए गए। कार्यक्रम के दौरान सरकार और पुलिस प्रशासन की भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई। फिलहाल यह मामला बिहार की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

 

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