Amarnath Yatra 2025: 3 जुलाई से 9 अगस्त तक अमरनाथ यात्रा, पुख्ता सुरक्षा और व्यवस्थाओं के बीच तीर्थयात्रियों में उत्साह
अमरनाथ यात्रा 2025 का शुभारंभ 3 जुलाई से हो रहा है और यह 9 अगस्त तक चलेगी। 38 दिनों तक चलने वाली इस पवित्र यात्रा में श्रद्धालु पारंपरिक पहलगाम (48 किमी) और बालटाल (14 किमी) दोनों मार्गों से भगवान अमरनाथ के दर्शन के लिए जाएंगे। अब तक करीब 3.5 लाख श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं, जबकि ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा जम्मू में सोमवार से शुरू हो चुकी है। इसके लिए विशेष रजिस्ट्रेशन सेंटर बनाए गए हैं।
श्रद्धालुओं का पहला जत्था 2 जुलाई को जम्मू के भगवतीनगर बेस कैंप से रवाना होगा। यात्रा को लेकर पूरे केंद्र शासित प्रदेश में विशेष तैयारी की गई है। पहलगाम हमले के बावजूद श्रद्धालुओं में उत्साह कम नहीं है। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि उन्हें बाबा बर्फानी पर विश्वास है और आतंकियों की धमकियों से कोई डर नहीं।
सुरक्षा व्यवस्था और विशेष इंतजाम
अमरनाथ यात्रा के दौरान सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता पर है। जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे (NH-44) पर मल्टी-लेयर सिक्योरिटी लगाई गई है। CRPF के डॉग स्क्वॉड, FRS सिस्टम (चेहरा पहचानने वाली तकनीक), ट्रैफिक जैमर और लगभग 42,000 से 58,000 जवानों की तैनाती से यात्रा मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित किया गया है।
भारतीय सेना, सीआरपीएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस और एसडीआरएफ ने संयुक्त मॉक ड्रिल के माध्यम से भूस्खलन जैसी आपात स्थितियों से निपटने की रणनीति का अभ्यास किया। 581 सुरक्षा कंपनियां तैनात की जाएंगी और संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाई गई है।
दो यात्रा मार्गों की जानकारी
-
पहलगाम रूट (48 किमी, 3 दिन)
-
आसान और लोकप्रिय मार्ग
-
पहलगाम → चंदनवाड़ी → पिस्सू टॉप → शेषनाग → पंचतरणी → अमरनाथ गुफा
-
बुजुर्गों और परिवारों के लिए बेहतर विकल्प
-
-
बालटाल रूट (14 किमी, एक दिन)
-
तीव्र और कठिन चढ़ाई
-
तेज़ यात्रा लेकिन खतरनाक मोड़ और संकरे रास्ते
-
शारीरिक रूप से सक्षम यात्रियों के लिए उपयुक्त
-
यात्रा में ध्यान रखने योग्य बातें
-
दस्तावेज़ साथ रखें: मेडिकल सर्टिफिकेट, 4 पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड, RFID कार्ड, ट्रैवल फॉर्म
-
फिटनेस: यात्रा से पहले 4–5 किमी पैदल चलने की आदत डालें, प्राणायाम और सांस संबंधित व्यायाम करें
-
सामान: ऊनी कपड़े, रेनकोट, ट्रैकिंग स्टिक, पानी की बोतल, दवाइयों का बैग
अमरनाथ गुफा का महत्व
अमरनाथ गुफा समुद्र तल से 3888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां प्राकृतिक बर्फ से बना शिवलिंग (हिमानी शिवलिंग) स्थापित होता है, जिसे वैज्ञानिक दृष्टि से स्टेलेग्माइट कहा जाता है। उत्तरमुखी गुफा होने के कारण सूरज की सीधी रोशनी बहुत कम पहुंचती है, जिससे बर्फ जमा रहती है और यह पवित्र शिवलिंग आकार लेता है।
सरकार और प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं के लिए हर सुविधा सुनिश्चित की गई है। यात्रा को सफल और सुरक्षित बनाने के लिए सुरक्षा एजेंसियां पूरी मुस्तैदी से जुटी हैं।

