सर्दियों में बढ़ जाता है अल्जाइमर का दुष्प्रभाव 70 से अधिक उम्र के लोगों में देखा जाता है
नई दिल्ली (रविंद्र कुमार): सर्दियों का मौसम जहां ठंड और कोहरे के साथ आता है, वहीं यह बुजुर्गों की सेहत के लिए कई गंभीर चुनौतियां भी खड़ी कर देता है। खासतौर पर अल्जाइमर जैसी मानसिक बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए यह समय और अधिक कठिन साबित होता है।
चुंकि ठंड के मौसम में शरीर की सक्रियता कम हो जाती है, जिससे याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता और व्यवहार पर नकारात्मक असर पड़ता है। यही वजह है कि सर्दियों में अल्जाइमर के लक्षण अधिक उभरकर सामने आते हैं। जागरूकता की कमी के कारण लोग इसके शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं। जनवरी माह में अल्जाइमर अवेयरनेस पर जोर दिए जाने का मकसद भी यही है कि लोग समय रहते इस बीमारी को पहचानें और सही इलाज व देखभाल से मरीजों की जिंदगी को बेहतर बनाया जा सके। अल्जाइमर रोग, डिमेंशिया का सबसे मुख्य प्रभाव है। डिमेंशिया के शिकार करीब 50 प्रतिशत लोग अल्जाइमर रोग से पीड़ित होते हैं। इसके साथ चिंता और अन्य मानसिक कारणों की परेशानियां होती हैं। अल्जाइमर ज्यादातर 70 से अधिक उम्र के लोगों में देखा जाता है।
सर्दियों में इसका प्रभाव बढ़ जाता है। डॉक्टरों के अनुसार जनवरी माह को अल्जाइमर अवेयरनेस माह के रूप में मनाया जा रहा है। सगदार्जुग अस्पताल के मनुरोग चिकित्सक डॉक्टर नोवील ने बताया कि बुजुर्गों में भूलने की मानसिक बीमारी का होना आम बात हो गई है। डॉक्टर राय में अल्जाइमर रोग एक प्रगतिशील और असाध्य बीमारी है, जिसकी संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। अल्जाइमर रोगी में भूलने की बीमारी, सोचने-समझने में दिक्कत, व्यवहार में बदलाव और याददाश्त कमजोर हो जाती है। इसकी पूरी तरह से रोकथाम संभव नहीं है। अल्जाइमर रोग लगभग 99 प्रतिशत जेनेटिक स्थिति में पाया जाता है।
यदि एक फैमिली में यह जेनेटिक होता है तो 45 के करीब उम्र के लोगों में यह समस्या हो सकती है। जब सर्दियां पड़ती हैं तो शरीर की कार्यप्रणाली धीमी हो जाती है और परेशानियां बढ़ जाती हैं। इस मौसम में अल्जाइमर बढ़ सकता है। इसलिए ऐसे लक्षणों के बढ़ते ही तुरंत डॉक्टर की सलाह जरूर लें। इस बीमारी के मुख्य कारण बढ़ती उम्र, तनाव, अव्यवस्थित शारीरिक गतिविधि, उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल एवं मधुमेह जैसी बीमारियां हैं। इसके अलावा सिर में चोट लगने की संभावना भी रहती है। बोलने संबंधी समस्याएं, फैसले लेने में कठिनाई, समय और स्थान की पहचान में परेशानी इसके प्रमुख लक्षण हैं। ऐसे में परिवार के सदस्यों को चाहिए कि वे मरीज का विशेष ध्यान रखें और समय-समय पर डॉक्टर से संपर्क में रहें।



