Air Pollution: करोड़ों खर्च के बावजूद दिल्ली की हवा जहरीली, सरकार की कार्यप्रणाली पर महेंद्र भास्कर ने उठाए सवाल
नई दिल्ली। दिल्ली में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निर्माण स्थलों के निरीक्षण, नोटिस जारी करने और सख्त कार्रवाई के दावों के बीच कांग्रेस ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। करोलबाग जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र भास्कर ने आरोप लगाया कि दिल्ली की ट्रिपल इंजन सरकार प्रदूषण के मुद्दे पर बड़े-बड़े दावे और बयान तो दे रही है, लेकिन राजधानी के लोगों को स्वच्छ हवा उपलब्ध कराने के लिए ठोस परिणाम सामने नहीं आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने और हर साल नई योजनाओं की घोषणा के बावजूद दिल्लीवासियों को प्रदूषित हवा से राहत नहीं मिल पा रही है।
महेंद्र भास्कर ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण कोई नई या अचानक पैदा होने वाली समस्या नहीं है। हर साल सर्दियों की शुरुआत के साथ सरकार और संबंधित विभाग सक्रिय दिखाई देने लगते हैं। निर्माण स्थलों का निरीक्षण किया जाता है, नियमों का उल्लंघन मिलने पर नोटिस जारी किए जाते हैं और सख्त कार्रवाई के दावे किए जाते हैं। इसके बावजूद यदि लोगों को प्रदूषित हवा में सांस लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इन प्रयासों का वायु गुणवत्ता पर कितना प्रभाव पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि निर्माण स्थलों पर प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना जरूरी है, लेकिन केवल कुछ परियोजनाओं का निरीक्षण करने और नोटिस जारी करने से राजधानी में वायु प्रदूषण की समस्या का व्यापक समाधान नहीं हो सकता। निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल के अलावा वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक प्रदूषण, खुले में कचरा जलाने और अन्य प्रदूषणकारी गतिविधियों पर भी प्रभावी नियंत्रण जरूरी है। इन सभी स्रोतों को ध्यान में रखकर व्यापक और दीर्घकालिक रणनीति तैयार किए बिना प्रदूषण से स्थायी राहत हासिल करना मुश्किल होगा।
कांग्रेस नेता ने प्रदूषण नियंत्रण पर खर्च किए जा रहे बजट और सरकारी प्रयासों के परिणामों को सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई। उन्होंने सवाल किया कि यदि सरकार लगातार प्रदूषण के खिलाफ अभियान चला रही है, तो जनता को यह जानकारी क्यों नहीं दी जाती कि इस मद में कितना बजट खर्च किया गया, कितने उल्लंघनों पर प्रभावी कार्रवाई हुई और संबंधित क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता में कितना सुधार आया। उनके मुताबिक, योजनाओं की सफलता का आकलन केवल घोषणाओं, बैठकों और निरीक्षणों की संख्या से नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाले बदलावों से किया जाना चाहिए।
महेंद्र भास्कर ने आरोप लगाया कि दिल्ली की ट्रिपल इंजन सरकार प्रदूषण के मुद्दे पर बड़े-बड़े दावे कर रही है, जबकि नागरिकों को राहत देने के लिए जवाबदेह व्यवस्था की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार को प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों की पहचान कर उनके खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही, संबंधित विभागों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए, ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन और उनके नतीजों की नियमित समीक्षा हो सके। उन्होंने जोर दिया कि राजधानी के लोगों को स्वच्छ हवा उपलब्ध कराने के लिए मौसमी अभियानों से आगे बढ़कर लगातार और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।



