Dr KS Bhardwaj writer: चहुमुखी प्रतिभा के धनी है डॉ.के.एस.भारद्वाज,युवक युवतियों का मार्गदर्शन भी करते हैं
– हर्ष भारद्वाज –
नई दिल्ली ,सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डॉ.के.एस.भारद्वाज डॉ भारद्वाज चहुमुखी प्रतिभा के धनी है | अनेक पुस्तकें ,उपन्यास ,कहानियाँ, कवितायेँ, नाटक और शैक्षिक पुस्तकें लिख चुके डॉ.भारद्वाज की रचनाओं में नारी को जो सम्मान दिखाई देता है वह अनुपम है जो भारतीय संस्कृति, ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, तत्र रमन्ते देवता,’ और सनातन के मूल्य चरितार्थ करता दिखाई देता है | उन्होंने एक अनूठी पुस्तक लिखी है, ‘सोसाइटी, डू व्ही नो वाट इट इज’ जिसमे विश्व के विद्वानों के विचारों को उद्धृत करते हुए प्रत्येक अध्याय के अंत में वे पूछते हैं कि जिन गुणों का ज़िक्र इस अध्याय में हुआ है, किस संस्कृति में मिलते हैं?

ईमानदार प्रतिक्रिया हो तो उत्तर होगा सनातन में. नाटक ‘1857: झाँसी की वीरांगनयें,’ में डॉ.भारद्नवाज नें ना केवल वीरांगनाओं को श्रद्धा सुमन पेश किए हैं बल्कि देशभक्त तवायफों और पिछड़े वर्ग की महिलाओं तक को आदर दिया है. ‘द अनसंग मारटायर्ड तवायफ्स’ में शहीद तवायफों को नमन किया है तो ‘तहजीब रक्षक कोठेवालियाँ’ के द्वारा समाज को बताया है वे कुशल शिक्षक थी जो नई पीढ़ियों को तहजीब की शिक्षा दिया करती थी. ‘नहीं, नहीं, अब और अहिल्या नहीं,’ ‘इश्क-ए-जिंदगी,’ ‘हीरामंडी,’ 1947: कुछ कही, कुछ अनकही, मगर मरना मना है,’ ‘हीरा दे की कुर्बानी,’ राजकुमारी रूपमति की आत्मकथा,’ ‘वीरांगना झलकारीबाई,’ आदि रचनाओं में समाज उपेक्षित नारी को जो सम्मान दिया है, वह अतुलनीय है. डॉ.भारद्वाज नें अपनी सभी रचनाओं में नारी शक्ति को नमन किया है और रानी लक्ष्मी बाई, झलकारी बाई, अजीजुन बाई, मीरा बाई आदि का उदाहरण देते हुए बताया है कि नारी पुरुष से किसी भी सूरत में कम नहीं |
डॉ भारद्वाज अपनी रचनाओं, ‘राह से भटकता पुरुष नारी विमर्श,’ और ‘वीमेन इमेंसीपेशन डीरेल्ड,’ की मार्फत उन आधुनिक युवक युवतियों का मार्गदर्शन भी करते हैं जो पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित होकर भटक रहे हैं. आपकी साहित्य साधना जारी है. वीर अर्जुन परिवार कामना करता हैं कि आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे और समाज को राह दिखाती रहे |



