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चिकित्सक का विकल्प नहीं हो सकती एआई : डॉ ग्लैडविन त्यागी

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डॉ ग्लैडविन त्यागी
चिकित्सक का विकल्प नहीं हो सकती एआई : डॉ ग्लैडविन त्यागी

चिकित्सक का विकल्प नहीं हो सकती एआई : डॉ ग्लैडविन त्यागी

एआइ चिकित्सा क्षेत्र में एक शक्तिशाली उपकरण है नई दिल्ली ( सी.पी.एन.न्यूज़ ) : दिल्ली में एआई का महाकुंभ चल रहा है देश और दुनिया के विशेषज्ञ इसकी उपयोगिता और भविष्य की संभावनाओं पर चिंतन कर रहे हैं ,अन्य क्षेत्रों की भांति चिकित्सा क्षेत्र में भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने अपनी पकड़ बना ली है । एआई आधारित सॉफ्टवेयर एक्स-रे, सीटी स्कैन और एमआरआई की रिपोर्ट पढ़ने, रोगों की प्रारंभिक पहचान करने और दवाओं के संभावित प्रभावों का विश्लेषण करने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं लेकिन मरीज को इलाज करने में असफल हैं । यह स्पष्ट है कि एआइ चिकित्सक का विकल्प नहीं बन सकती, बल्कि यह केवल एक सहयोगी उपकरण है । यह कहना है स्वामी दयानंद अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. ग्लैडविन त्यागी का |

डॉ.ग्लैडविन कहते हैं चिकित्सा केवल विज्ञान नहीं, बल्कि संवेदनशील मानवीय सेवा है , एक चिकित्सक केवल रिपोर्ट नहीं पढ़ता, वह मरीज की शारीरिक भाषा, मानसिक स्थिति, पारिवारिक पृष्ठभूमि और सामाजिक परिस्थितियों को भी समझता है और उसके बाद उपचार का निर्णय लेता है , उदाहरण के लिए किसी मरीज को गंभीर बीमारी की सूचना देना केवल बीमारी से अवगत कराना नहीं है बल्कि संवेदनशील संवाद के साथ उसकी मनोदशा को नियंत्रित करते हुए सच्चाई बताना है। एआई जानकारी दे सकती है, परंतु सहानुभूति, करुणा और नैतिक निर्णय की क्षमता केवल एक मानव चिकित्सक में ही संभव है। एआइ की सीमाएँ उसके प्रशिक्षण डेटा पर निर्भर करती हैं।

यदि सीमित या पक्षपातपूर्ण डेटा पर प्रशिक्षित किया गया है तो उसका परिणाम न केवल घातक बल्कि मानव शरीर के लिए जानलेवा सिद्ध हो सकता है । डॉ.ग्लैडविन कहते हैं जटिल और आपातकालीन स्थितियों में त्वरित एवं समग्र निर्णय की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए, दुर्घटना में घायल मरीज के उपचार के दौरान कई अंगों की स्थिति, रक्तचाप, मानसिक प्रतिक्रिया और परिजनों से प्राप्त जानकारी को एक साथ ध्यान में रखना पड़ता है। ऐसी परिस्थिति में अनुभवी चिकित्सक अपने अनुभव, अंतर्ज्ञान और तत्काल निर्णय क्षमता से जीवन बचाता है। AI पूर्वनिर्धारित आंकड़ों पर काम करती है, जबकि वास्तविक जीवन की परिस्थितियाँ अक्सर अप्रत्याशित होती हैं। चिकित्सा में नैतिकता और उत्तरदायित्व का प्रश्न भी महत्वपूर्ण है। यदि एआइ द्वारा दिया गया सुझाव गलत सिद्ध हो जाए तो जिम्मेदारी किसकी होगी |

अंततः निर्णय और उत्तरदायित्व चिकित्सक पर ही आता है। इसलिए एआइ केवल परामर्शदाता की भूमिका निभा सकती है, निर्णायक की नहीं। डॉ.ग्लैडविन कहते हैं यही कहा जा सकता है कि एआइ अर्थात कृत्रिम बुद्धिमत्ता चिकित्सा क्षेत्र में एक शक्तिशाली उपकरण है, परंतु वह मानवीय संवेदना, नैतिक विवेक और अनुभव का विकल्प नहीं बन सकती। मरीज केवल इलाज नहीं चाहता, वह विश्वास, सहारा और आश्वासन भी चाहता है और यह केवल एक समर्पित चिकित्सक ही दे सकता है ।

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