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Shankaracharya statement: माघ मेला छोड़ते समय योगी सरकार पर बरसे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बोले– सरकारी रेवड़ी देकर हमें जाल में फंसाना चाहते हैं

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Shankaracharya statement: माघ मेला छोड़ते समय योगी सरकार पर बरसे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद
बोले– सरकारी रेवड़ी देकर हमें जाल में फंसाना चाहते हैं

प्रयागराज। मौनी अमावस्या के दिन संगम स्नान के लिए जाते समय पालकी रोके जाने और बटुक शिष्यों के साथ कथित दुर्व्यवहार के विरोध में पिछले दस दिनों से माघ मेला क्षेत्र में धरने पर बैठे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बुधवार को माघ मेला छोड़ दिया और काशी के लिए प्रस्थान किया। रवाना होने से पहले उन्होंने योगी सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला और स्पष्ट कहा कि सरकार अपनी गलती स्वीकार करने या पछतावा जताने को तैयार नहीं है।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उन्हें महसूस हुआ कि अब वहां बैठना उचित नहीं है क्योंकि प्रशासन की नीयत साफ नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल सुविधाएं और सरकारी रेवड़ी बांटकर उन्हें अपने जाल में फंसाना चाहती है, जबकि असली मुद्दे पर बात करने से बच रही है। इसी कारण उन्होंने तत्काल वहां से निकलने का निर्णय लिया।

उन्होंने कहा कि प्रशासन ने उन्हें मनाने के लिए कुछ प्रस्ताव भेजे थे, लेकिन वे सभी प्रस्ताव उन्होंने सिरे से खारिज कर दिए। शंकराचार्य ने सवाल उठाया कि जब पालकी में ले जाना ही गलत था तो अब वही गलती दोहराने की पेशकश क्यों की जा रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि चारों शंकराचार्यों के लिए एसओपी बनाने की बात अब की जा रही है, जबकि यह पहले क्यों नहीं किया गया। सबसे गंभीर बात यह है कि बटुकों के साथ हुई मारपीट और अपमान पर प्रशासन ने एक शब्द भी नहीं कहा।

शंकराचार्य ने कहा कि यह उनके जीवन का सबसे बड़ा दुख है। उन्होंने कहा कि प्रयागराज की पवित्र धरती पर योगी सरकार के कार्यकाल में सनातन धर्मियों को जो पीड़ा मिली है, वह अब तक का सबसे बड़ा आघात है। इसकी भरपाई कौन करेगा और कैसे होगी, यह समय ही बताएगा। उन्होंने यह भी कहा कि हार-जीत का फैसला अभी नहीं हुआ है, यह निर्णय सनातन धर्म की जनता को करना है और जब वह निर्णय लेगी, तभी स्पष्ट होगा कि किसकी जीत हुई और किसकी हार।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन लोभ और लालच देकर उनकी पीड़ा को कमजोर करना चाहता है और सनातन धर्मियों के साथ हुए अन्याय से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में वहां रुकना उनकी अंतरात्मा को स्वीकार नहीं था, इसलिए उन्होंने माघ मेला तुरंत छोड़ने का फैसला किया।

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