उत्तर पूर्वी दिल्ली के हालात अपने माफिक समझ जे.पी.हुए सक्रिय 18 जनवरी को रखा कार्यकर्ताओं से मिलने का समय
-अश्वनी भारद्वाज –
नई दिल्ली, जी हाँ आप एकदम सही समझे जे.पी.यानी जयप्रकाश अग्रवाल पूर्व सांसद | जे.पी.नाम जहां तक हमें याद है उन्हें स्व.प्रधानमंत्री राजीव गांधी नें दिया था जो बाद में इतना फेमस हो गया कि लोग उन्हें जे.पी.ही कहने लगे | चांदनी चौक हो या उत्तर पूर्वी दिल्ली इन दोनों संसदीय क्षेत्रों से जे.पी.अग्रवाल नें लोकसभा में नुमाइंदगी की है | तीन बार चांदनी चौक से तो एक बार उत्तर पूर्वी दिल्ली से ,जहां तक हमें जानकारी हैं जे.पी.लोकसभा के दस चुनाव लड़ चुके है दिल्ली से तो कोई भी नेता इतने अधिक चुनाव लड़ा नहीं, हो सकता है देशभर से भी गिनती के लोग ही इतने चुनाव लोकसभा के लड़े हों, इसके अलावा जे.पी.एक बार दिल्ली से ही राज्यसभा में जा चुके है रिकार्ड देखकर कोई भी सहज भाव से अंदाज़ा लगा सकता है कि इतने चुनाव लड़ने का मतलब गांधी परिवार से उनकी नजदीकियां कितनी गहरी है |
पिछली बार जब गठ्बन्धन के चलते कांग्रेस के खाते में केवल तीन सीटें ही आई थी तब भी पार्टी नें उन्हें अपना प्रत्याशी बनाया था | समझ गए ना आप सात में तो नम्बर रहता ही है और तीन में भी वे सभी पर भारी पड़े | इतना ही नहीं जब विधानसभा की बारी आई तब भी उनके पुत्र यानी मुदित अग्रवाल को प्रत्याशी बनाया गया | आप यह बिकुल नहीं समझे कि हम जे.पी.अग्रवाल की तारीफों के पुल बांध रहे है बल्कि हम आपको सच्चाई से रूबरू करा रहें हैं जो हमारा काम है | चांदनी चौक से हालांकि जे.पी.अग्रवाल पिछला चुनाव 89 हजार 325 के अन्तराल से हारे थे जबकि उत्तर पूर्वी दिल्ली से कांग्रेस प्रत्याशी कन्हैया कुमार कहीं ज्यादा एक लाख 38 हजार 778 से पीछे रहे थे | अब आप सोच रहे होंगे हार के बड़े मार्जन के बावजूद श्री अग्रवाल उत्तर पूर्वी दिल्ली को एक बार फिर से क्यों अपनी पिच बनाना चाहते हैं ,चुनाव के दौरान और चुनाव के बाद ज्यादातर लोगो को यह कहते सुना गया यदि जे.पी.चुनाव लड़ते तो जीत जाते क्योंकि मनोज तिवारी की मुखालफत बहुत थी लेकिन कन्हैया कुमार की उम्मेदवारी अन्य को तो क्या कांग्रेसी नेताओं को भी पसंद नहीं थी लिहाजा मनोज तिवारी भारी मुखालफत के बाद भी जीत गए |
यह बात अलग है मनोज तिवारी के पसीने कन्हैया ने भी छुडा दिए थे | जे.पी.अग्रवाल के कानों में आज भी जनता की वह आवाज सुनाई देती है | वहीं मनोज तिवारी जीत की हैट्रिक के बाद और भी लापरवाह हो गए हैं यह बात किसी से छिपी नहीं है | हम हमेशा कहते रहे हैं चुनाव ज्यादा समय तक एक ही लहर पर सवार होकर नहीं जीते जा सकते | अब तो समझ गए ना आप आखिर क्यों पिच बदलना चाहते हैं अग्रवाल जी |
जनता और कार्यकर्ताओं की नब्ज भांप ही श्री अग्रवाल खुद तो सक्रिय हो ही गए हैं दूसरे छोर पर उनके साहबजादे मुदित अग्रवाल भी जम गए हैं | इसी कड़ी के तहत उन्होंने रविवार 18 जनवरी को दोपहर 12 बजे बाबरपुर में अनूप सिंह वाटिका में कार्यकर्ताओं से मिलने का समय निर्धारित किया है | हालांकि कुछ छछुन्दरों को इस आयोजन को ले परेशानी हो सकती है लेकिन जे.पी.जो ठान लेते हैं वे कभी परवाह नहीं करते, हाईकमान का हाथ जो उनके सर पर है | आप समझ रहे होंगे ये छछुन्दर कौन है इसकी चर्चा फिर कभी करेंगे आज बस इतना ही …



