
निजीकरण के एकाधिकार पर राहुल गांधी ने पहले ही चेताया था इंडिगो उसका उदाहरण है : आदेश भारद्वाज
नई दिल्ली ( सी.पी.एन.न्यूज़ ) : इंडिगो एयरलाइंस की लगातार फ्लाइट कैंसिलेशन ने पूरे देश में हवाई यात्रा को अस्त-व्यस्त कर दिया है। अब तक हजारों से अधिक फ्लाइट्स रद्द होने से लाखों यात्री प्रभावित हुए, जिसमें दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे प्रमुख हवाई अड्डों पर अफरा-तफरी मच गई।
दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने इस संकट को निजी कंपनियों के एकाधिकार का नतीजा बताते हुए केंद्र सरकार और नागरिक उड्डयन मंत्री पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस नेता मानते हैं कि यह स्थिति राहुल गांधी की उस चेतावनी की याद दिलाती है, जिसमें उन्होंने मोनोपॉली के खतरे को उजागर किया था। करावल नगर कांग्रेस जिलाध्यक्ष आदेश भारद्वाज का कहना है कि इंडिगो की यह हालत सरकार की नीतियों की विफलता है। इंडिगो का भारतीय एविएशन बाजार में 64 -65 फीसदी हिस्सा होना खुद में एक मोनोपॉली है, जो यात्रियों को बंधक बना रहा है। जब एक कंपनी इतनी बड़ी हो जाती है, तो छोटी गड़बड़ियां भी राष्ट्रीय संकट बन जाती हैं।

उन्होंने 6 नवंबर 2024 को इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित राहुल गांधी के लेख ‘मैच-फिक्सिंग मोनोपॉली वर्सेज फेयरप्ले बिजनेस’ का हवाला दिया, जिसमें राहुल ने निजी कंपनियों के एकाधिकार को अर्थव्यवस्था के लिए घातक बताया था। राहुल ने लिखा था कि मोनोपॉली नौकरियां छीनती हैं, प्रतिस्पर्धा को कुचलती हैं और जो आम आदमी को महंगा पड़ता है। उनका मानना है कि राहुल गांधी की यह दूरदर्शिता आज साबित हो रही है, क्योंकि इंडिगो जैसी कंपनियां सरकार की छत्रछाया में फल-फूल रही हैं, लेकिन यात्रियों की परेशानी पर ध्यान नहीं दे रही। और यह राहुल गांधी की दूरदर्शिता का पहला उदाहरण नहीं है। इससे पहले कि कई बार उन्होंने कई मामलों पर सरकार को आगाह किया था।
आदेश का कहना है कि इस संकट की जड़ में डीजीसीएकी नई फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन पॉलिसी है, जो पायलटों को 48 घंटे का साप्ताहिक आराम और रात में सिर्फ दो लैंडिंग की अनुमति देती है। लेकिन इंडिगो ने इस पॉलिसी का ठीक से पालन नहीं किया, जिसके चलते पायलटों की कमी हो गई और फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ीं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार ने पायलटों की सेफ्टी और आराम के लिए पॉलिसी बनाई, तो इंडिगो इसे नजरअंदाज क्यों कर रही है। क्या सरकार कॉर्पोरेट दबाव में झुक रही है? वहीं कंपनियों की मोनोपली के कारण ही बाकी कंपनियों ने जयपुर जैसे नजदीकी शहर का किराया ही 70 हजार कर दिया। यह लूट करने की छूट सरकार कैसी किसी को दे सकती है? क्या सरकार को इस पर कोई गाइडलाइन या लिमिट तय नहीं करनी चाहिए |





