Home मैं भी रिपोर्टर भीख माँगना गंभीर अपराध फिर भी हर चौराहे पर पनपरहा है धंधा...

भीख माँगना गंभीर अपराध फिर भी हर चौराहे पर पनपरहा है धंधा : डॉ.बसंत गोयल

0
56
डॉ.बसंत गोयल
भीख माँगना गंभीर अपराध फिर भी हर चौराहे पर पनपरहा है धंधा : डॉ.बसंत गोयल

भीख माँगना गंभीर अपराध फिर भी हर चौराहे पर पनपरहा है धंधा : डॉ.बसंत गोयल

    * कौन हैं वे  लोग जो भीख मांगने के धंधे को फलीभूत कर रहें हैं

नई दिल्ली ( सी.पी.एन.न्यूज़ ) : बॉम्बे प्रिवेंशन ऑफ बैगिंग  एक्ट बीपीबीए ( 1959 ) के अनुसार दिल्ली और मुंबई में भीख मांगना गंभीर अपराध है , फिर भी इन्हीं राज्यों में सबसे ज्यादा भीख मांगने का धंधा पनप रहा है या यूं कहें कि धड़ल्ले से जोरों पर जारी है ।  यह कहना है देश के जाने-माने स्वास्थ्य विद एवं समाजसेवी डॉ.बसंत गोयल का |

डॉ.बसंत कहते हैं  इनमें से हजारों भिखारी ऐसे भी हैं जो अपनी मर्जी से इस प्रोफेशन से जुड़े हैं और हजारों ऐसे हैं जिन्हें जबरन उतारा गया है इसके पीछे आतंक, भय , खौफ व दुनिया की सब दलीलें हैं जो यह धड़ल्ले से यह धंधा करा रही हैं। हर चौराहे पर दर्जनों महिलाएं मिल जाएंगी जिनके शरीर पर कपड़े फटे होंगे मगर गोद में एक मासूम बच्चा जरुर होगा । कौन हैं यह लोग और कहां से आते हैं ,यह जानने का प्रयास शायद ही किसी सरकार ने किया हो और हम भी चौराहे से हटते ही भूल जाते हैं कि हमने किसी मासूम की आंखों में कुछ देखा है ।

डॉ.बसंत सवाल उठाते हैं  कौन हैं वे  लोग जो भीख मांगने के धंधे को फलीभूत कर रहें हैं। आंकड़ों की मानें तो हजारों रुपए रोजाना के यह भिखारी कमा लेते हैं शायद एक ग्रेजुएट भी इतना न कमा पाता हो । पिछले कुछ सालों से इन भिखारियों में सात से दस साल तक के बच्चों की संख्या एकाएक बढ़ती दिखाई दे रही है तो सरकार का ध्यान इस तरफ क्यों नहीं जा पा रहा है और यह सोचने का विषय है जबकि इस आधुनिक युग में पहचान करने के अनेकों साधन आ चुके हैं। सरकारी आंकड़ों की बात करें तो 2011 में एक सर्वे के दौरान पाया गया कि चौदह साल से कम आयु के 3 लाख 72 हजार बच्चे पाए गए थे जिनमें 1 लाख 97 हजार लड़के व  1 लाख 74 हजार लड़कियां थीं। दुखद यही रहा कि आंकड़े तो कागजों में दिखा दिए गए मगर यह जानने का प्रयास नहीं किया गया कि बच्चों को भिखारी बनाया किसने, और किसने पढ़ने लिखने की उम्र में इन्हें भिखारी के धंधे में धकेल दिया है ।

भीख मांगने वालों का धंधा इतना जोरों पर है कि इन्होंने अत्यधिक सुरक्षित माने जाने वाले मेट्रो स्टेशन के अंदर और बाहर भी  भीख मांगना जारी रखें हुए हैं । यहां प्रशासन के आला अधिकारियों का कहना है कि अगर इनके पास मेट्रो का  टिकट है तो किस कानून के तहत उन्हें रोका जा सकता है । बात उनकी भी जायज है मगर यह अंदर आकर अगर भीख मांगते हैं तो अब तक कितनों के खिलाफ कार्रवाई हुई है यह आंकड़ा किसी के पास नहीं है ।

डॉ.बसंत गोयल

दिल्ली में किसी भी प्रकार का अवैध धंधा पनप जाए और पुलिस प्रशासन को न पता हो यह एक अनहोनी सी लगती है । हालांकि वर्ष 2016 में मानव तस्करी में सौलह हजार बच्चों को बचाया गया था , इनमें से 4871 बच्चे भीख मांगते थे । दुखद पहलू यह रहा कि इन बच्चों को भीख मांगने के धंधे में धकेला किसने यह तथ्य आजतक सामने नहीं आया।
इन बच्चों ने बताया था कि उन्हें भीख मांगने भेजने से पहले नशीली दवाएं दी जाती थी और उन्हीं के सामने ही मारा पीटा जाता था , हाथ-पैर तोड़ दिए जाते थे । रात दिन सिसकने के अलावा कुछ नहीं बचा रहता , पेटभर खाने के लिए भी गिड़गिड़ाना पड़ता था बदले में खाना तो मिलता था मगर गालियों के साथ।

ऐसे ही हजारों बच्चे अभी भी सड़कों चौराहों पर भीख मांगते देखे जा सकते हैं । सैकड़ों महिलाएं इन चौराहों पर अभी भी भीख मांगती मिल जाएंगी जिनकी गोद में कोई मासूम बच्चा अवश्य मिलेगा । यहां  गौर करने वाली बात है कि इनकी गोद में जो बच्चा होता है वह बीमार अधिक दिखता है या दिखाने का  प्रयास किया जाता है , यह जांच का विषय है। क्या  बच्चों को नशीली दवाएं दी जाती है ताकि सामने वाला इमोशनल होकर ज्यादा भीख दे दें ।‌ वास्तव में यह बच्चा उनका है भी या नहीं इसकी जांच कौन करेगा यह सोचने का विषय है और यह हाल तब है जब इस आधुनिक युग में डीएनए जैसा टेस्ट मौजूद हैं । कुछ ही घंटों में पता चल जाएगा कि इस बच्चे के असली माता पिता कौन है ।

 

डॉ.बसंत गोयल कहते हैं हालांकि दिल्ली सरकार भिखारियों के लिए पुनर्वास की योजना बनाती रहती है मगर यह वास्तव में गरीबी रेखा से नीचे रहकर भीख मांगकर गुजारा कर रहे हैं इसका फैसला कौन करेगा ।

डॉ.बसंत गोयल कहते हैं   दिल्ली की सड़कें हो या देश के अन्य राज्यों की , चौराहों पर अक्सर किन्नर ( हिजड़े) भीख मांगते दिख जाएंगे । पुलिस, आजतक इन तथ्यों को भी उजागर नहीं कर सकी कि इन भीख मांगने वालों में से असली किन्नर कितने हैं। तथ्यों की मानें तो  यह किन्नर भी ग्रुपों में पाए गए हैं । यहां यह महत्वपूर्ण है कि किन्नर समाज को दान देना हिन्दुओं की आस्था से जुड़ा है इसलिए अधिक एतराज की संभावना नहीं हैं मगर सवाल यही उठता है कि भीख ही क्यों -?

जानकारों की मानें तो हजारों बच्चे जो चौराहों पर भीख मांगते मिल रहे हैं उनमें अनेकों ऐसे भी हैं जिन्हें उनके माता-पिता ही भीख मंगवाने के लिए चौराहों आदि पर छोड़ देते हैं । जबकि कानून इसकी इजाजत नहीं देता है तो फिर ऐसा क्यों -? क्या पुलिस व प्रशासन ने इस तरफ ध्यान दिया है  अगर ऐसा है तो संबंधित विभागों के खिलाफ कार्रवाई कौन करेगा और यही अहम मुद्दा है ।

कानून की मानें तो किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 76 के तहत गंभीर अपराध है जिसमें मानव तस्करी के तहत आरोप सिद्ध होते हैं । क्योंकि इसमें अपने स्वार्थ के लिए दूसरे से भीख मंगवाना है जिसके तहत पांच साल की सजा व एक लाख तक का जुर्माना है ।

यहां बात वही कि सरकारें इस दिशा में क्या कार्यवाही कर रही हैं और किस दवाब या कारणवश इस दिशा में चुप्पी साधे हैं ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here