महिलाओं को मिलती है कम दिहाड़ी : नीलम चौधरी
काम ज्यादा मेहनताना कम
नई दिल्ली ( सी.पी.एन.न्यूज़ ) : राजधानी दिल्ली में पुरुषों की तुलना में महिला कामगरों को कम दिहाड़ी मिलती है जबकि काम करने का जहां तक सवाल है काम महिलाएं ही ज्यादा करती है | यह कहना है विभिन्न संगठनों से जुडी नीलम चौधरी का | नीलम चौधरी कहती है यह हालत तो तब है जब दिल्ली की मुख्यमंत्री एक महिला है और राजधानी में ट्रिपल इंजन की सरकार है |
नीलम चौधरी कहती हैं कि राजधानी दिल्ली में महिला कामगारों में हो रही वृद्धि का बड़ा कारण अनियंत्रित महंगाई है क्योंकि एक पुरुष की कमाई से परिवार का खर्चा पूरा न पड़ने के कारण महिलाओं को घर से बाहर निकल कर काम करना पड़ रहा है। दिल्ली राज्य फ्रेमवर्क इंडिकेटर की रिपोर्ट ने खुलासा किया है राजधानी में महिला कामगारों की हिस्सेदारी बढ़ी है लेकिन पुरुषों के मुकाबले उनको मजदूरी कम दी जा रही है।
जब देश भर में न्यूनतम वेतन सरकार द्वारा निर्धारित है फिर महिला और पुरुषों की मजदूरी में अंतर क्यो है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है | नीलम चौधरी कहती हैं दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता फ्रेमवर्क इंडिकेटर की रिपोर्ट में हुए खुलासे महिलाओं और पुरुषों की मजूदरी में अंतर का कारण जानने के उपाय तलाशने होंगे ताकि दिल्ली की महिलाओं को पुरुषों के बराबर मजदूरी देने का रास्ता साफ हो।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने महिलाओं की सहानुभूति लेने के लिए महिला मुख्यमंत्री तो बना दी लेकिन महिलाओं के हितो और उनके सरंक्षण में पूरी तरह विरोधाभास विचारधारा रखती है यही कारण रहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिल्ली की महिलाओं को 2500 रुपये मासिक देने के वादे के साथ 7 महीनों के शासन में अभी तक कोई घोषणा नहीं की है। चुनाव के समय वायदा कर भूलने की आदत है भाजपा को |
नीलम कहती है फ्रेमवर्क इंडिकेटर की रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं और पुरुषों में श्रम बल की हिस्सेदारी का अनुपात जहां 2017-18 में 0.19 था, 2023-24 में बढ़कर 0.28 हो गया। यह वृद्धि सकारात्मक है लेकिन लैंगिक असमानता को भी दर्शाती है। 2017-18 में महिला श्रम बल की भागीदारी 11.2 प्रतिशत थी जो 23-24 में बढ़कर 14.5 प्रतिशत हो गई। 2017-18 अप्रैल में पुरुषों 400 रुपये और महिलाओं को 376 रुपये प्रतिदिन, 2023-24 में पुरुषों 556 रुपये और महिलाओं को 500 रुपये प्रतिदिन मिल रहे थे। आंकड़ों में साफ दर्शाया गया है कि पुरुष और महिला मजदूरी में भारी अंतर है। उन्होंने यही नही पेशेवर महिलाओं की संख्या में भी गिरावट आई है। 2020-21 में महिलाओं को अनुपात 28.5 प्रतिशत था जो 2022-23 में 21.3 प्रतिशत रह गया।



