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दिल्ली के हर जिले में महिला थाना समय की जरूरत : नीलम चौधरी

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नीलम चौधरी
दिल्ली के हर जिले में महिला थाना समय की जरूरत : नीलम चौधरी

दिल्ली के हर जिले में महिला थाना समय की जरूरत : नीलम चौधरी

* बढ़ रहे हैं महिलाओं के प्रति अपराध

नई दिल्ली ( सी.पी.एन.न्यूज़ ) : राजधानी दिल्ली में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों को देखते हुए हर जिले में एक महिला थाना खोलने पर गम्भीरता से विचार किया जा रहा है | यह पुलिस आयुक्त सतीश गोलचा का अच्छा सुझाव है जिसके बारे में वे गहन मंथन कर रहे है यह कहना है वरिष्ठ सामजिक कार्यकर्ता आर.डब्लू.ए.समस्त रोहताश नगर की महासचिव नीलम चौधरी का |

नीलम चौधरी कहती हैं महिलाओं के साथ लगातार अपराध बढ़ रहे है | बड़ी संख्या में महिलाएं घरेलू हिंसा का शिकार हो रही हैं महिला ठाणे होने से वे अपनों शिकायते बे-झिझक थानों में पहुंच कर कर सकेगीं क्योंकि वहां महिला पुलिस कर्मी मौजूद रहेगीं | महिला अपराध की रोकथाम के लिए पुलिस अब हर जिले में एक महिला थाना खोलने पर विचार कर रही है। सीपी सतीश गोलचा ने सभी 15 जिलों से इसे लेकर रिपोर्ट तलब की है। इसके आने के बाद मंत्रालय को इसका प्रस्ताव भेजा जाएगा, जहां से हरी झंडी मिलने के बाद राजधानी में 15 महिला थाने बन सकेंगे। इसकी कमान भी महिला इंस्पेक्टर को दी जाएगी। इससे पहले साइबर फ्रॉड बढ़ने पर हर जिले में एक साइबर पुलिस स्टेशन खोले गए थे।

हर जिले में पहले से क्राइम अगेंस्ट विमिन सेल चल रहे हैं। नीलम चौधरी कहती हैं दिल्ली देश की राजधानी है और यहां महिला सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं. बावजूद इसके, राजधानी में एक भी महिला थाना नहीं है जो महिला सुरक्षा पर एक बड़ा प्रश्न चिन्ह लगाता है. दिल्ली से सटे हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों में महिला सुरक्षा को मजबूत करने के लिए हर जिले में महिला पुलिस थाने स्थापित किए गए हैं |

यह स्थिति तब है जब राजधानी में रोजाना सैकड़ों शिकायतें महिलाओं के उत्पीड़न व अपराधों से जुड़ी दर्ज होती हैं. इतना ही नहीं, तीसरी बार दिल्ली में महिला मुख्यमंत्री हैं. तब भी महिला थाने अभी तक नहीं बन पाए हैं. नीलम चौधरी कहती हैं अभी फिलहाल दिल्ली में महिलाओं को अपनी शिकायतें सामान्य थानों में ही दर्ज करानी पड़ती हैं. कई पीड़िताओं के लिए यह प्रक्रिया बेहद असहज हो जाती है, क्योंकि उन्हें पुरुष पुलिसकर्मियों के सामने अपने साथ हुई घटनाओं का ब्योरा देना होता है.

महिला संगठनों व सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि महिला थाना बनने से पीड़िताओं को न सिर्फ सुरक्षा मिलेगी, बल्कि उनमें भरोसा भी बढ़ेगा. महिलाओं के लिए समर्पित थाने होने से उन्हें यह महसूस होगा कि उनकी बात गंभीरता से सुनी जाएगी. साथ ही उनकी निजता का सम्मान किया जाएगा. ऐसे में महिलाएं अपने साथ हुए अपराध को गहराई से महिला जांच अधिकारी को बता पाएंगी | नीलम चौधरी कहती है पुलिस आयुक्त सतीश गोलचा की इस सोच को सलाम है आखिर उन्होंने इस तरफ कदम बढाये | ऐसा होने से महिलाओं को उनके घरो के नजदीक है महिला पुलिस सहायता उपलब्ध हो सकेगी |

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