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गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद कंझावला केस में रोहिणी जिले के 11 पुलिसकर्मी सस्पेंड

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कंझावला केस में दिल्ली पुलिस के 11 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है। ये 11 पुलिसकर्मी हादसे के वक्त पीसीआर और पिकेट पर तैनात थे। गुरुवार को गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस पर बड़ा एक्शन लिया था। मंत्रालय ने हादसे के वक्त वहां तैनात पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश दिया था। आज यानी शुक्रवार को दिल्ली पुलिस के कुल 11 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया। दिल्ली पुलिस ने बताया कि कंझावला मौत का मामले में सक्षम प्राधिकारी की ओर से अनुमोदित के रूप में रोहिणी ज़िले के कुल 11 पुलिसकर्मियों को PCR और पिकेट पर तैनात थे उन्हें निलंबित कर दिया गया है। गृह मंत्रालय ने इसके अलावा डीसीपी को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है। डीसीपी हरेंद्र कुमार ने इस मामले को हत्या की बजाय एक हादसा बताया था।

गुरुवार को गृह मंत्रालय ने वारदात वाली रात तीन पीसीआर वैन व दो पिकेट पर तैनात सभी पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश दिए थे। गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त शालिनी सिंह की रिपोर्ट के बाद कार्रवाई के निर्देश दिए। रिपोर्ट में सीनियर पुलिस अधिकारियों के सुपरविजन में भी कमी पाई गई। लापरवाही बरतने के लिए आज दिल्ली पुलिस ने 11 पुलिसवालों को सस्पेंड कर दिया। मंत्रालय ने इस केस को लेकर डीसीपी से भी जवाब तलब किया था। बता दें कि गृह मंत्री अमित शाह के आदेश के बाद गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस से कंझावला केस पर रिपोर्ट मांगी थी।

अंजलि सिंह की स्कूटी को एक कार ने 31 दिसंबर और एक जनवरी की दरमियानी रात को टक्कर मार दी थी, जिसमें वह कार के नीचे फंस गईं और वाहन के साथ सड़क पर करीब 14 किलोमीटर तक घसीटे जाने के कारण उसकी मौत हो गई। पुलिस जांच में यह सामने आया कि कई कॉल लगाने के बाद भी पीसीआर वैन से कोई जवाब नहीं आया। पुलिसवालों की इस लापरवाही से कार सवार युवकों ने अंजलि की बॉडी को करीब ढाई घंटे तक घसीटा था।

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