देश के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आज लोकसभा में कहा कि राजनीतिक आलोचनाओं का हमेशा स्वागत है, लेकिन हमें अपने जवानों का अपमान नहीं करना चाहिए। एस जयशंकर ने कहा, ‘मैंने सुना है कि विदेश मंत्री के तौर पर मुझे अपनी समझ को और गहरा करने की जरूरत है। गौरतलब है कि जो नेता मुझे यह सलाह दे रहे हैं, उस नेता के सम्मान में मैं नतमस्तक ही हो सकता हूं। माननीय सदस्य हमारी सरकार को चीन के खिलाफ उदासीन कह रहे हैं। अगर ऐसा होता तो बॉर्डर पर सेना को भेजने का फैसला न लिया जाता। हम चीन पर पीछे हटने के लिए दबाव न बनाते। हम खुलेआम कह रहे हैं कि संबंध सामान्य नहीं हैं। जयशंकर ने आगे कहा कि हमें राजनीतिक आलोचना पर कोई आपत्ति नहीं है लेकिन हमें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपने जवानों को क्रिटिसाइज नहीं करना चाहिए। हमारे जवान यांगत्से में 13,000 फीट की ऊंचाई पर तैनात होकर बॉर्डर की रक्षा कर रहे हैं उनके लिए ‘पिटाई’ शब्द का इस्तेमाल शोभा नहीं देता। उनका सम्मान किया जाना चाहिए। उनका इशारा राहुल गांधी की तरफ था।
दरअसल, कुछ दिनों पहले भारत जोड़ो यात्रा के 100 दिन पूरे हो जाने के मौके पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संवाददाता सम्मेलन में तावांग में हुए चीनी और भारतीय सेना के बीच झड़प के मामले पर एस जयशंकर को अपनी समझ और बढ़ाने की बात कही थी। एस जयशंकर ने आगे कहा कि हमारे जवानों के लिए ‘पिटाई’ शब्द का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने लोकसभा में आगे जानकारी दी कि साल 2014 से अब तक श्रीलंका से 2,835 भारतीय मछुआरों को रिहा किया जा चुका है। पीएम मोदी ने तमिल मछुआरों की समस्याओं पर ध्यान दिया है।





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