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Harsh Firing Case: बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह को 4 साल की जेल, महिला डॉक्टर की मौत के मामले में 25 लाख मुआवजा देने का आदेश

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Harsh Firing Case: बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह को 4 साल की जेल, महिला डॉक्टर की मौत के मामले में 25 लाख मुआवजा देने का आदेश

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने वर्ष 2018 के चर्चित हर्ष फायरिंग मामले में बिहार के साहेबगंज विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक राजू कुमार सिंह को चार वर्ष की सजा सुनाई है। अदालत ने उन्हें गैर इरादतन हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए चार साल की साधारण कैद की सजा दी है। इसके अलावा आर्म्स एक्ट के तहत दो महीने की अतिरिक्त सजा भी सुनाई गई है। कोर्ट ने 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसे मृतक महिला डॉक्टर के परिवार को मुआवजे के रूप में दिया जाएगा।

विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने सजा सुनाते हुए कहा कि राजू कुमार सिंह को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 304 भाग-II के तहत चार वर्ष की साधारण कैद और आर्म्स एक्ट के तहत लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करने के लिए दो महीने की सजा दी जाती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जुर्माने की पूरी राशि पीड़िता के परिवार को मुआवजे के तौर पर प्रदान की जाएगी।

सजा सुनाए जाने से पहले राजू कुमार सिंह ने अदालत से प्रोबेशन पर रिहा किए जाने की मांग की थी। उन्होंने दलील दी कि उनका किसी की जान लेने का इरादा नहीं था और जनप्रतिनिधि के रूप में उनका सार्वजनिक जीवन बेदाग रहा है। हालांकि अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उन्हें दोषी मानते हुए सजा सुनाई।

यह मामला 31 दिसंबर 2018 का है, जब दिल्ली के वसंत कुंज स्थित राजू कुमार सिंह के फार्महाउस पर नववर्ष के स्वागत के लिए एक पार्टी आयोजित की गई थी। आरोप के अनुसार, जश्न के दौरान उन्होंने हर्ष फायरिंग की, जिसमें चली गोली महिला डॉक्टर डॉ. अर्चना गुप्ता को लग गई। गंभीर रूप से घायल डॉ. अर्चना गुप्ता को अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने विस्तृत जांच कर विधायक के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।

इस मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने 6 जून को अपने 97 पन्नों के फैसले में कहा था कि हर्ष फायरिंग देश में एक गंभीर सामाजिक समस्या बन चुकी है, जिसके कारण अक्सर निर्दोष लोगों की जान चली जाती है। अदालत ने कहा कि उत्सव और समारोह के दौरान हथियारों का लापरवाही से इस्तेमाल बेहद खतरनाक है और यह मामला उसी का एक दुखद उदाहरण है। न्यायालय ने गवाहों के बयान और उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर माना कि राजू कुमार सिंह द्वारा चलाई गई गोली से ही डॉ. अर्चना गुप्ता की मृत्यु हुई।

अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा कि इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए कानून का सख्ती से पालन आवश्यक है, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति जश्न के नाम पर हथियारों का गैर-जिम्मेदाराना इस्तेमाल करने का साहस न कर सके। इसी आधार पर अदालत ने दोषी को सजा सुनाते हुए पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने का भी आदेश दिया।

इस फैसले का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रभाव भी पड़ सकता है। चूंकि राजू कुमार सिंह को दो वर्ष से अधिक की सजा सुनाई गई है, इसलिए जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 के प्रावधान लागू हो सकते हैं। इस कानून के अनुसार यदि किसी सांसद या विधायक को किसी आपराधिक मामले में दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होती है, तो उसकी सदस्यता तत्काल प्रभाव से अयोग्य घोषित की जा सकती है। ऐसे में बिहार विधानसभा की उनकी सदस्यता पर भी संकट खड़ा हो सकता है। हालांकि अंतिम स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि उन्हें उच्च न्यायालय से दोषसिद्धि या सजा पर कोई राहत मिलती है या नहीं।

इस फैसले को हर्ष फायरिंग जैसी घटनाओं पर सख्त न्यायिक रुख के रूप में देखा जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय सार्वजनिक समारोहों में हथियारों के लापरवाहीपूर्ण उपयोग के खिलाफ एक कड़ा संदेश देगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

 

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