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Karawal Nagar: महिला आरक्षण बिल की आड़ में गलत ढंग से परिसीमन करना चाहती है सरकार : आदेश भारद्वाज

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Karawal Nagar: महिला आरक्षण बिल की आड़ में गलत ढंग से परिसीमन
करना चाहती है सरकार : आदेश भारद्वाज

नई दिल्ली ( सी.पी.एन.न्यूज़ ) : पिछले एक सप्ताह से संसद के विशेष सत्र में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के गिरने पर सत्ता और विपक्ष में आरोप प्रत्यारोप लग रहे हैं। इस पर करावल नगर कांग्रेस जिलाध्यक्ष आदेश भारद्वाज ने भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि 2023 का नारी शक्ति वंदन अधिनियम विपक्ष की सहमति से ही पास हुआ था। लेकिन सरकार ने जानबूझकर इसे परिसीमन से बांध दिया, जिससे महिलाओं का हक टल गया। आदेश भारद्वाज का मानना है कि असली मुद्दा महिलाओं का सशक्तिकरण नहीं, बल्कि भाजपा की राजनीतिक चाल है।
हम मांग करते हैं कि बिना जनगणना-परिसीमन के आरक्षण लागू हो और जाति जनगणना के साथ ओबीसी सब-कोटा भी शामिल किया जाए। कांग्रेस की यह लड़ाई नई नहीं है। यह महिलाओं के प्रति हमारी भावुक प्रतिबद्धता की निरंतरता है। 1992-93 में कांग्रेस सरकार ने 73वें और 74वें संवैधानिक संशोधन के जरिए पंचायती राज और नगरपालिकाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिलाया। आज देशभर में लाखों महिला सरपंच, प्रधान और महापौर कांग्रेस की इस देन से सशक्त हुई हैं। आदेश ने साफ साफ कहा कि आरएसएस के 100 वर्ष और बीजेपी के 40 वर्ष के काल में एक भी महिला अध्यक्ष का ना बनाया जाना उनकी पोल खोलने के लिए काफी है।
कुलदीप सेंगर, रेवेन्ना, बृजभूषण सिंह, आशाराम और रामरहीम जैसों का समर्थन करना बीजेपी के लिए डूबकर मर जाने की बात है। जबकि इससे इतर कांग्रेस ने 1917 में एनी बेसेंट के बाद से 5 महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष, 5 महिला मुख्यमंत्री, प्रतिभा पाटिल के रूप में देश की पहली महिला राष्ट्रपति और इंदिरा गांधी के रूप में देश की पहली महिला प्रधानमंत्री दी। जिन्होंने ना सिर्फ देश, बल्कि दुनिया को दिखाया कि महिलाएं नेतृत्व भी कर सकती हैं। दिल्ली में शीला दीक्षित के मुख्यमंत्री काल में कांग्रेस ने महिलाओं के लिए ठोस कदम उठाए। स्त्री शक्ति कार्यक्रम के तहत स्व-सहायता समूहों को बढ़ावा, लड़कियों की शिक्षा के लिए लाडली बिटिया योजना और कई अन्य विशेष योजनाएं, स्वास्थ्य शिविर और महिला पुलिस स्टेशन। महात्मा गांधी से लेकर आज तक कांग्रेस का नारा रहा है “नारी शक्ति, राष्ट्र शक्ति”। हमने महिलाओं को सिर्फ वोट नहीं, बल्कि अधिकार दिए। आज भी दिल्ली कांग्रेस महिलाओं को पार्टी में टिकट, पद और नेतृत्व दे रही है।

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