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Delhi Budget criticism: जुमलों का पुलिंदा है रेखा सरकार का नया बजट : विपिन शर्मा

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Delhi Budget criticism: जुमलों का पुलिंदा है रेखा सरकार का नया बजट : विपिन शर्मा
‘ग्रीन बजट’ का दावा महज़ एक जुमला

नई दिल्ली ( शिवा कौशिक ) : दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार नें गत दिनों दिल्ली के लिए जो नया बजट पेश किया है वह जुमलों का पुलिंदा है | यह सब जानते हैं भारतीय जनता पार्टी जुमलों की पार्टी है | जिस तरह से हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और होते हैं उसी तरह भाजपा की कथनी और करनी में जमीन आसमान का फर्क होता है | यह कहना है रोहताश नगर के पूर्व विधायक तथा चांदनी चौक जिले के प्रभारी विपिन शर्मा का | विपिन शर्मा कहते हैं दिल्ली का नया वार्षिक बजट महज झूठे वादों का एक पुलिंदा है और कुछ नहीं, रेखा गुप्ता की सरकार ने अभी तक अपने पिछले वादे ही पूरे नहीं किए। विपिन शर्मा ने कहा कि भाजपा सिर्फ कोरी घोषणाएं ही करती है और कुछ नहीं, काम के नाम पर रेखा गुप्ता की सरकार निल बटे सन्नाटा है। विपिन शर्मा ने कहा कि भाजपा के पिछले वादे अभी भी पूरे होने बाकी है, ना तो यमुना जी की सफाई हुई, ना ही महिलाओं को अभी तक 2500 रुपए प्रति महीना मिले, ना ही त्योहारों पर लोगों को मुफ्त सिलेंडर मिला, ना ही युवाओं को रोजगार मिला, ना ही बुजुर्गों को पेंशन मिली। विपिन शर्मा ने आगे कहा कि और भी ऐसे कई वादे किए थे भाजपा ने जो अब जुमले बन गए है। विपिन शर्मा ने कहा कि ठीक इसी तरह रेखा गुप्ता की सरकार का नया वार्षिक बजट भी जुमलों का एक पुलिंदा ही है और कुछ नहीं। विपिन शर्मा ने आगे कहा कि पिछले एक वर्ष से दिल्ली में रेखा गुप्ता की सरकार झूठ ही बोल रही है और दिल्ली की जनता को मूर्ख बना रही है। विपिन शर्मा ने कहा कि मैं रेखा गुप्ता की सरकार को यह सलाह देता हूं कि झूठे वादे करने के बजाय दिल्ली की जनता के लिए काम करना शुरू करे दे नहीं तो सरकार बदलते देर नहीं लगती।
विपिन शर्मा नें कहा शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, सामाजिक सुरक्षा, सड़क एवं पुल, जल आपूर्ति एवं स्वच्छता, ऊर्जा तथा ब्याज भुगतान जैसे लगभग हर महत्वपूर्ण क्षेत्र के बजट में कटौती की गई है। ऐसे में 21 प्रतिशत ‘ग्रीन बजट’ का दावा महज़ एक जुमला प्रतीत होता है, क्योंकि अधिकांश मदों में वास्तविक आवंटन घटाया गया है। दिल्ली सरकार को चाहिए कि इस कथित 21 प्रतिशत ग्रीन बजट का स्पष्ट और विस्तृत विवरण सार्वजनिक करे, ताकि जनता को पारदर्शिता के साथ जानकारी मिल सके और भविष्य में इस पर जवाबदेही भी तय की जा सके। विपिन शर्मा कहते हैं कि दिल्ली जल बोर्ड के बजट में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है, जिससे साफ है कि दिल्ली एक बार फिर टैंकर निर्भरता की ओर धकेली जा रही है। जल बोर्ड को कर्जमुक्त करने के लिए सरकार की ओर से कोई ठोस योजना सामने नहीं आई है। दिल्ली जल बोर्ड की वित्तीय स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। जल बोर्ड पर 75,000 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया ऋण है। वर्ष 2025-26 में जल बोर्ड को दिए गए ऋण की राशि बजट अनुमान 3,608 करोड़ रुपये से बढ़कर संशोधित अनुमान में 5,397 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो वित्तीय कुप्रबंधन का संकेत है। इस वर्ष के बजट में दिल्ली जल बोर्ड अपने खर्च के लिए 6100 करोड़ रूपये कर्ज से जुटाएगी।

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