Women Reservation Bill 2026: महिला आरक्षण विधेयक पर देश में सियासत तेज, राजकुमार बल्लन ने विपक्ष पर साधा निशाना
नई दिल्ली (रविंद्र कुमार): लोकसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक, 2026 को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण पारित नहीं किया जा सका। सदन में हुए मत विभाजन के दौरान विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जबकि इसे पारित कराने के लिए 352 मतों की आवश्यकता थी। इस मुद्दे पर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। सत्ता पक्ष ने इसे महिलाओं के अधिकारों की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया, वहीं विपक्ष ने विधेयक का विरोध करते हुए इसे संविधान के खिलाफ करार दिया। वरिष्ठ भाजपा नेता दिल्ली प्रदेश भाजपा किसान मोर्चा के संयोजक राजकुमार बल्लन नें सरकार का खुलकर समर्थन करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए लगातार ऐतिहासिक फैसले ले रही है, लेकिन कुछ राजनीतिक दल केवल अपने स्वार्थ के चलते इस तरह के महत्वपूर्ण विधेयकों का विरोध कर रहे हैं।
श्री बल्लन कहते हैं लोकसभा में देश की माताओं, बहनों और बेटियों के साथ जो हुआ, वह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। 2023 में विपक्षी दलों ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का समर्थन किया था, लेकिन आज जब उसे लागू करने का समय आया तो इन्हीं दलों ने संविधान संशोधन विधेयक को पारित नहीं होने दिया। देश की आधी आबादी के अधिकार को संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ की भेंट चढ़ा दिया गया, यह सोच न महिलाओं के हित में है और न देश के। राजकुमार बल्लन ने कहा, “महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी को उनका हक दिलाने की दिशा में बड़ा कदम है।
लेकिन विपक्ष ने इस पर राजनीति करते हुए इसे रोकने की कोशिश की, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।” उन्होंने आगे कहा कि जो लोग महिलाओं के अधिकारों के रास्ते में बाधा बन रहे हैं, उन्हें जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। “देश की महिलाएं अब जागरूक हैं और वे ऐसे नेताओं को जवाब देना जानती हैं, जो उनके हक के खिलाफ खड़े होते हैं ” राजकुमार बल्लन ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है और आने वाले समय में महिला आरक्षण को लागू करने की दिशा में हर संभव प्रयास किए जाएंगे। वहीं गृहमंत्री अमित शाह ने भी सदन में चर्चा के दौरान विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि महिलाओं को उनका अधिकार देने में जानबूझकर बाधा डाली जा रही है। विधेयक के पारित न होने के बाद इससे जुड़े अन्य प्रस्ताव परिसीमन विधेयक, 2026 और संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका।



