कूड़े से आज़ादी तो मिली नहीं अभियान की डेट बढ़ानी पड़ी : परमानन्द शर्मा

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परमानन्द शर्मा
कूड़े से आज़ादी तो मिली नहीं अभियान की डेट बढ़ानी पड़ी : परमानन्द शर्मा

कूड़े से आज़ादी तो मिली नहीं अभियान की डेट बढ़ानी पड़ी : परमानन्द शर्मा

यमुनापार में नहीं दिख रहा अभियान का कोई असर

नई दिल्ली ( सी.पी.एन.न्यूज़ ) : ट्रिपल इंजन सरकार नें दिल्ली को साफ़ सुथरा करने के लिए एक खास अभियं कूड़े से आज़ादी एक अगस्त से 31 अगस्त तक चलाने की घोषणा की थी | पूरे एक महीने तक मुख्यमंत्री के साथ-साथ दिल्ली सरकार के मंत्री,मेयर ,विधायक सांसद तथा सत्ताधारी दल के निगम पार्षद फोटो सेशन करते दिखे जिनमें हाथों में झाड़ू थामे सफाई की नौटंकी करते भी दिखे लेकिन वह अभियान सुपर फिलोप साबित हुआ |

यह कहना है बाबरपुर विधानसभा से कांग्रेस के प्रभारी राम नगर वार्ड से नगर निगम का चुनाव लड़े परमानन्द शर्मा का | परमान्द शर्मा कहते हैं सफाई अभियान के नाम पर करोड़ों रूपये खर्च करने के बावजूद नतीजा वही ढाक के तीन पात रहा | मजबूरी में ट्रिपल इंजन सरकार को कूड़े से आज़ादी नाम अभियान की डेट बढ़ानी पड़ी और कहा गया यह अभियान अब दो अक्टूबर तक चलेगा |

परमानन्द शर्मा कहते हैं पहले ही यदि अभियान को 2 अक्टूबर तक रखा जाता तो सरकार की इतनी किरकरी नहीं होती और जनता के पैसे की बचत भी होती | लेकिन भाजपा सरकार बिना किसी प्लानिग के काम करती है कूड़े के ढ़ेर पर बैठी दिल्ली को साफ करने में भाजपा की रेखा गुप्ता सरकार का विशेष स्वच्छता अभियान भी पिछड़ गया है और अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए भाजपा ने राजधानी को कूड़ा मुक्त बनाने के अभियान को 2 अक्टूबर तक बढ़ा दिया है। यानी सरकार नें खुद माँ लिया है जो अभियान हमने शुरू किया था वह अधूरा रह गया है |

परमानन्द शर्मा कहते हैं दिल्ली नगर निगम में सफाई कर्मचारियों के 62 हजार पद स्वीकृत होने बाद निगम के पास पक्के, कच्चे, एवजीदार कर्मचारियों को मिलाकर लगभग 62 हजार कर्मचारी मौजूदा कार्यरत होने के बावजूद भी गंदगी और बेतहाशा कूड़े के कारण दिल्ली की हालत बदतर हो चुकी है। जबकि दिल्ली सरकार, पीडब्लूडी, डीडीए तथा नई दिल्ली नगर पालिका के अंतर्गत भी हजारों सफाई कर्मचारी कार्यरत है। निगम में भारी भ्रष्टाचार और अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण दिल्ली को कूड़े और गंदगी से कोई राहत नही मिल रही है, जबकि हर महीने करोड़ों रुपये खर्च हो रहे है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की अनाधिकृत कॉलोनियों, पुनर्वास कालोनियों, जे.जे. कलस्टरों और गांव देहात में सफाई का बहुत बुरा हाल है, जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे रहते है, कालोनियों के बाहर मुख्य सड़कों पर कूड़े के अंबार लगे है। कॉलोनियों, बाजारों, औद्योगिक क्षेत्रों, स्कूलों, कॉलेजों, सार्वजनिक शौचालयों और सार्वजनिक स्थलों सफाई के कोई इंतजाम नही है।

दिल्ली सरकार और निगम सफाई करने के साथ-साथ कूड़ा उठाने में भी पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। निगम जिसकी जिम्मेदारी शहर को साफ करके स्वच्छ रखने की है, उसमें शासित भाजपा उसमें पूरी तरह विफल साबित हो चुकी है। परमानन्द शर्मा कहते हैं यमुनापार का और भी बुरा हाल है गलियों के नुक्कड़ों पर कूड़े के ढेर पड़े रहते हैं ,कई कई दिनों तक नालियों से निकली गाद भी गलियों में पड़ी रहती है | मुख्य बाजारों तक में प्रोपर रूप से सफाई नहीं हो पा रही |

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