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Digital India:  2,000 से ऊपर UPI भुगतान पर MDR: डिजिटल इंडिया की नीति पर फिर उठे सवाल जयबीर नागर ने छोटे व्यापारियों के हित में मांगी स्पष्टता

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Digital India:  2,000 से ऊपर UPI भुगतान पर MDR: डिजिटल इंडिया की नीति पर फिर उठे सवाल जयबीर नागर ने छोटे व्यापारियों के हित में मांगी स्पष्टता

नई दिल्ली ( हर्ष भारद्वाज ) : देश में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने वाले UPI सिस्टम में 15 अक्टूबर 2026 से महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है। नए ढांचे के तहत ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत (MDR) लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन होगी । यह कहना है कांग्रेस नेता एवं अधिवक्ता जयबीर सिंह नागर का | अधिवक्ता जयबीर सिंह नागर ने श्री नागर कहते हैं हालांकि सरकार और NPCI ने स्पष्ट किया है कि यह शुल्क ग्राहक से नहीं लिया जाएगा। व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI भुगतान पूरी तरह निःशुल्क रहेगा और ₹2,000 तक के निर्धारित व्यापारी भुगतान भी MDR से बाहर रहेंगे। कहा कि UPI भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं में से एक बन चुका है और इसकी सफलता का बड़ा कारण इसकी सरलता, गति और कम लागत रही है।जयबीर सिंह नागर ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि MDR की नई व्यवस्था का अप्रत्यक्ष प्रभाव भी छोटे दुकानदारों और आम ग्राहकों पर न पड़े। उन्होंने कहाUPI ने देश के छोटे दुकानदार से लेकर बड़े कारोबारी तक सभी के लिए भुगतान की प्रक्रिया को आसान बनाया है। आज चाय की दुकान से लेकर अस्पताल, स्कूल, बाजार और ऑनलाइन कारोबार तक UPI रोजमर्राकी अर्थव्यवस्था का हिस्सा है। इसलिए ₹2,000 से अधिक के व्यापारी भुगतानों पर MDR लागू करने से पहले इसके वास्तविक आर्थिक प्रभाव पर लगातार नजर रखना जरूरी है।” उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि MDR ग्राहक पर नहीं डाला जा सकता और इसकी निगरानी भी की जाएगी। सरकार ने कहा है कि 15 अक्टूबर से इस बात पर निगरानी रखी जाएगी कि व्यापारी MDR को ग्राहकों से वसूल न करें। जयबीर सिंह नागर ने कहा मेरा स्पष्ट स्टेंड है कि डिजिटल इंडिया को मजबूत करने वाली किसी भी व्यवस्था में आम नागरिक और छोटे व्यापारी केंद्र में होने चाहिए। UPI की सफलता उसकी simplicity और accessibility की वजह से हुई है। नई MDR व्यवस्था का उद्देश्य यदि payment ecosystem को आर्थिक रूप से sustainable बनाना है, तो सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इसका बोझ अंततः छोटे व्यापारियों या आम उपभोक्ताओं पर न पहुंचे।” “सरकार को तीन बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए—पहला, ग्राहक से किसी भी प्रकार का अतिरिक्त UPI charge न लिया जाए; दूसरा, छोटे व्यापारियों को स्पष्ट रूप से zero-MDR नियमों की जानकारी दी जाए; और तीसरा, नई व्यवस्था लागू होने के बाद इसके प्रभाव की नियमित समीक्षा की जाए। डिजिटल इंडिया तभी मजबूत होगा जब डिजिटल भुगतान व्यापारियों और आम जनता दोनों के लिए भरोसेमंद और पारदर्शी बना रहे।” जयबीर सिंह नागर ने सरकार से मांग की कि MDR व्यवस्था लागू होने के बाद छोटे एवं मध्यम व्यापारियों पर इसके प्रभाव का स्वतंत्र आकलन किया जाए और यदि कहीं व्यावहारिक समस्या सामने आती है तो सरकार, बैंकों, payment companies और व्यापारी संगठनों के बीच संवाद करके उसका समाधान निकाला जाए।व

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