Digital Payments: यूपीआई शुल्क को लेकर कारोबारियों में असमंजस, सरकार स्थिति पूरी तरह स्पष्ट करे : अरुण तोमर
नई दिल्ली ( रविंद्र कुमार ) : डिजिटल भुगतान व्यवस्था में प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को लेकर छोटे दुकानदारों और कारोबारियों के बीच संभावित आर्थिक बोझ को लेकर चर्चा तेज हो गई है। केंद्र सरकार की ओर से 15 सितंबर को किए गए स्पष्टीकरण के मुताबिक व्यक्ति-से-व्यक्ति (पी2पी) यूपीआई भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा, जबकि ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान भी शुल्कमुक्त रहेंगे। निर्धारित श्रेणी में ₹2,000 से अधिक के व्यापारी लेन-देन पर एमडीआर लागू होने की बात कही गई है। सरकार के अनुसार करीब 96 प्रतिशत व्यापारी लेन-देन इस व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे। घोंडा विधानसभा के आम आदमी पार्टी नेता पूर्व संगठन मंत्री अरुण तोमर ने कहा कि यूपीआई आज देश के करोड़ों लोगों और छोटे कारोबारियों के लिए भुगतान का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। ऐसे में शुल्क से संबंधित किसी भी नए प्रावधान को लागू करने से पहले यह देखना जरूरी है कि उसका सीधा या अप्रत्यक्ष प्रभाव छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और स्वरोजगार करने वाले लोगों पर न पड़े। अरुण तोमर ने कहा कि डिजिटल भुगतान ने छोटे व्यापारियों के लिए कारोबार करना आसान बनाया है। ग्राहक बिना नकदी के तत्काल भुगतान कर सकते हैं और दुकानदारों को भी भुगतान प्राप्त करने में सुविधा होती है। इसलिए शुल्क व्यवस्था को लेकर किसी भी तरह की अस्पष्टता व्यापारियों और ग्राहकों के बीच अनावश्यक भ्रम पैदा कर सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार को नए प्रावधानों की जानकारी सरल भाषा में सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि दुकानदार और ग्राहक दोनों यह स्पष्ट रूप से समझ सकें कि किन लेनदेन पर शुल्क लागू होगा और किन पर नहीं। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्पष्ट किया है कि ग्राहकों से एमडीआर वसूलने का प्रावधान नहीं है तथा व्यक्ति-से-व्यक्ति यूपीआई भुगतान निःशुल्क रहेगा। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर व्यापारियों के बीच पैदा होने वाली आशंकाओं को दूर करने के लिए बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और व्यापारिक संगठनों के माध्यम से व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए।अरुण तोमर ने कहा कि छोटे कारोबारियों के लिए रोजाना का कारोबार पहले ही विभिन्न खर्चों से प्रभावित होता है। ऐसे में डिजिटल भुगतान से जुड़े किसी भी अतिरिक्त शुल्क की स्थिति में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उसका भार दुकानदारों या ग्राहकों पर न आए। उन्होंने कहा कि डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार को छोटे व्यापारियों के साथ नियमित संवाद करना चाहिए और उनकी व्यावहारिक समस्याओं को समझकर नीति तैयार करनी चाहिए।



