Gaza War: इजरायली हमले में गाजा के दो स्कूल तबाह, 33 की मौत में ज़्यादातर बच्चे और महिलाएं शामिल
गाजा में गुरुवार को इजरायली हवाई हमलों ने तबाही मचा दी, जिसमें महिलाओं और बच्चों समेत कम से कम 100 लोगों की जान चली गई। इनमें से 33 मौतें उत्तरी गाजा के एक स्कूल पर हुए हमले में हुईं, जहां लोग शरण लिए हुए थे। स्कूल पर बमबारी के दौरान करीब 70 लोग घायल भी हुए, जिनमें कई की हालत गंभीर है। हमलों के बाद गाजा में मातम और दहशत का माहौल है।
फलस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता जहेर अल-वाहिदी ने जानकारी दी कि गाजा शहर के तुफ्फाह क्षेत्र के एक स्कूल से 14 बच्चों और 5 महिलाओं के शव बरामद किए गए हैं। इसके अलावा, हिजाय्याह इलाके में मकानों पर हुए हमलों में 30 से अधिक अन्य गाजा निवासी मारे गए हैं। यह जानकारी अहली अस्पताल के रिकॉर्ड के आधार पर दी गई।
इजरायली सेना ने कहा है कि उसने गाजा सिटी इलाके में हमास के कमांड और कंट्रोल सेंटर को निशाना बनाया है और यह हमला रणनीतिक दबाव बनाने के उद्देश्य से किया गया है। सेना ने यह भी दावा किया कि हमले से पहले उन्होंने नागरिकों को नुकसान से बचाने के लिए जरूरी कदम उठाए थे। इसके तहत उन्होंने उत्तरी गाजा के निवासियों को चेतावनी दी और उन्हें पश्चिमी गाजा शहर में सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा।
इस चेतावनी के बाद बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से निकल पड़े। कुछ लोग पैदल चलकर सुरक्षित ठिकानों की ओर रवाना हुए, तो कुछ ने अपने सामान को खच्चर गाड़ियों में लादकर स्थान परिवर्तन किया। विस्थापन के इस दृश्य ने मानवीय संकट को और गहरा कर दिया है।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बयान में कहा है कि गाजा में एक नई रणनीति के तहत इजरायली सैन्य कार्रवाई को और तेज किया जा रहा है। उनका कहना है कि हमास को पूरी तरह से परास्त करने के लिए दबाव बढ़ाया जा रहा है, और इसके लिए जरूरत पड़ने पर अत्यधिक बल का प्रयोग किया जाएगा।
गाजा में लगातार हो रहे हमले और नागरिकों की मौत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और नाराजगी पैदा की है। महिलाओं और बच्चों की जान जाना इस संघर्ष के सबसे काले पहलुओं में से एक बन गया है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य मानवीय संगठनों ने एक बार फिर तत्काल युद्धविराम की मांग की है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।
गाजा में जिस प्रकार की तबाही देखी जा रही है, वह न केवल एक मानवीय संकट है, बल्कि यह युद्ध के नियमों और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। जैसे-जैसे संघर्ष तेज होता जा रहा है, निर्दोष नागरिकों का जीवन दांव पर लगता जा रहा है, और शांति की उम्मीदें धुंधली होती जा रही हैं।



