Share Market Update: ट्रंप की टैरिफ नीति से भारतीय शेयर बाजार में भूचाल, 19 लाख करोड़ रुपये स्वाहा
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी ने सोमवार को भारतीय शेयर बाजार को झकझोर दिया। सप्ताह की शुरुआत बाजार के लिए ऐतिहासिक गिरावट के साथ हुई, जिसमें निवेशकों के करीब 19 लाख करोड़ रुपये डूब गए।
सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट
प्री-ओपनिंग में ही सेंसेक्स 3,900 अंक गिरकर 71,449 और निफ्टी 1,100 अंक टूटकर 21,758 के नीचे पहुंच गया। बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी 5% से अधिक टूटे, जो 4 जून 2024 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट रही।
सुबह 9:35 बजे तक सेंसेक्स 2,381 अंक या 3.12% गिरकर 73,010 पर और निफ्टी 816 अंक या 3.56% गिरकर 22,088 पर पहुंच चुका था। एक समय पर सेंसेक्स 2,639 अंक और निफ्टी 869 अंक तक लुढ़क गया।
मिडकैप-स्मॉलकैप से लेकर दिग्गज शेयर धराशायी
आईटी और मेटल सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे, दोनों इंडेक्स में 7% से अधिक की गिरावट दर्ज हुई। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी 6% से ज्यादा टूटे। सेंसेक्स की सभी 30 कंपनियों के शेयर लाल निशान में रहे।
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टाटा स्टील 8%
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टाटा मोटर्स 7%
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एचसीएल टेक, टीसीएस, इंफोसिस, एलएंडटी, रिलायंस – भारी नुकसान
मार्केट कैप में ऐतिहासिक गिरावट
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बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का मार्केट कैप 16.19 लाख करोड़ रुपये घटा
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एनएसई पर कंपनियों की वैल्यू में करीब 20 लाख करोड़ रुपये की गिरावट
गिरावट के पीछे क्या वजहें?
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डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति – ट्रंप ने टैरिफ को “दवा” बताया और बाजार की गिरावट को नज़रअंदाज़ कर दिया, जिससे वैश्विक अस्थिरता और बढ़ गई।
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जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट – वैश्विक मंदी की संभावना 60% तक बढ़ी।
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RBI की MPC बैठक – आज से शुरू हुई बैठक पर निवेशकों की नजर, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता।
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विदेशी निवेशकों की बिकवाली – एफआईआई ने शुक्रवार को 3,484 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की।
पिछले हफ्ते भी कमजोरी का ट्रेंड
शुक्रवार को ही सेंसेक्स 930 अंक और निफ्टी 345 अंक टूटे थे। पूरे सप्ताह में सेंसेक्स 2,050 अंक और निफ्टी 614 अंक गिरा। शीर्ष 10 में से 9 कंपनियों के मार्केट कैप में 2.94 लाख करोड़ रुपये की गिरावट हुई।
निष्कर्ष
भारतीय शेयर बाजार इस समय वैश्विक टैरिफ पॉलिसियों, मंदी की आशंका और घरेलू नीतिगत अनिश्चितताओं की मार झेल रहा है। ट्रंप की बयानबाजी ने इस अनिश्चितता को और गहरा किया है। यदि जल्द ही स्थिरता नहीं आई, तो निवेशकों के लिए यह साल और भी मुश्किल साबित हो सकता है।



