जंतर-मंतर पर प्रदर्शन रोकने का फैसला लोकतांत्रिक अधिकारों पर प्रहार : महेंद्र भास्कर
नई दिल्ली (रविंद्र कुमार): जंतर-मंतर को धरना-प्रदर्शन के निर्धारित स्थलों की सूची से बाहर किए जाने के फैसले ने लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस ने इस निर्णय की आलोचना करते हुए इसे जनता की आवाज को सीमित करने वाला कदम बताया है। करोल बाग जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र भास्कर ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराना नागरिकों का अधिकार है और सरकार को ऐसे फैसले लेने से बचना चाहिए, जिनसे आम लोगों के अपनी समस्याएं उठाने के अवसर प्रभावित हों। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर लंबे समय से जन आंदोलनों, सामाजिक संगठनों, कर्मचारी संगठनों और राजनीतिक दलों के लिए अपनी मांगों को सामने रखने का प्रमुख केंद्र रहा है। ऐसे में इस स्थान को प्रदर्शन के निर्धारित स्थलों से हटाने का निर्णय जनता की आवाज को सत्ता तक पहुंचाने के रास्ते को सीमित कर सकता है। महेंद्र भास्कर ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती इस बात से तय होती है कि सरकार असहमति और आलोचना को किस तरह स्वीकार करती है। जनता को अपनी समस्याओं, मांगों और शिकायतों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर की भौगोलिक स्थिति इसे विशेष महत्व प्रदान करती है, क्योंकि यहां होने वाले प्रदर्शनों के जरिए जनता अपनी बात सरकार और प्रशासन के सामने प्रभावी ढंग से रख सकती है। यदि प्रदर्शनकारियों को ऐसे स्थानों पर जाने के लिए बाध्य किया जाता है, जहां उनकी आवाज संबंधित अधिकारियों तक पहुंचना कठिन हो, तो इससे विरोध के लोकतांत्रिक उद्देश्य पर असर पड़ सकता है। कांग्रेस नेता ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन इसके नाम पर लोकतांत्रिक गतिविधियों के अवसरों को सीमित करना उचित नहीं है। यातायात, सुरक्षा और आम नागरिकों की सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का समाधान निर्धारित समय, बेहतर व्यवस्था और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के माध्यम से निकाला जा सकता है। इसके लिए किसी महत्वपूर्ण प्रदर्शन स्थल को सूची से हटाना ही एकमात्र विकल्प नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को जनता की असहमति को समस्या मानने के बजाय उसे जनभावनाओं को समझने का अवसर मानना चाहिए। महेंद्र भास्कर ने मांग की कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले पर पुनर्विचार किया जाए और शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन के लिए पर्याप्त अवसर सुनिश्चित किए जाएं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता को केवल मतदान तक सीमित नहीं किया जा सकता, बल्कि उसे अपनी समस्याओं और विचारों को सार्वजनिक रूप से व्यक्त करने का अधिकार भी मिलना चाहिए। सरकार की जवाबदेही तभी मजबूत होती है, जब जनता की आवाज सुनी जाए और असहमति के लिए लोकतांत्रिक स्थान उपलब्ध रहें।



